Maharashtra Civic Polls: 'मतदान से ठीक पहले नियम क्यों बदले गए?' राज ठाकरे ने चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप
महाराष्ट्र में 29 नगर निगमों के मतदान से पहले सियासत गरमा गई है। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने राज्य चुनाव आयोग पर नियम बदलकर महायुति सरकार को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रचार खत्म होने के बाद घर-घर प्रचार की अनुमति पर सवाल उठाते हुए आयोग की निष्पक्षता पर संदेह जताया।
विस्तार
महाराष्ट्र में एक तरफ जहां कल यानी गुरुवार को 29 नगर निगमों पर होने वाले मतदान को लेकर सियासत में गर्माहट तेज है। वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे ने बुधवार को राज्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने नगर निकाय चुनावों में वोटिंग से ठीक पहले नियम बदलकर सत्ताधारी महायुति सरकार को फायदा पहुंचाने का काम किया है।
राज ठाकरे ने कहा कि बीएमसी (बीएमसी) और महाराष्ट्र की 28 अन्य नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं, लेकिन चुनाव प्रचार खत्म होने के बाद भी घर-घर जाकर प्रचार करने की इजाजत दे दी गई है। उनका कहना है कि यह फैसला सत्ताधारी दलों को जिताने के लिए लिया गया है।
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राज ठाकरे ने उठाए सवाल
राज ठाकर ने इस दौरन आयोग पर सवाल भी उठाए। उन्होंने पूछा कि जब लोकसभा और विधानसभा चुनावों में यह अनुमति नहीं थी, तो अब क्यों दी गई? चुनाव से ठीक पहले नियम क्यों बदले गए? क्या चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा है? इसके साथ ही राज ठाकरे ने अपनी पार्टी मनसे और सहयोगी शिवसेना (उद्धव गुट) के कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सत्ताधारी दलों के उम्मीदवारों पर नजर रखें, क्योंकि उनके द्वारा पैसे बांटे जाने की आशंका है।
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संजय राउत ने भी लगाए आरोप
इस बीच शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने भाजपा, अजित पवार की एनसीपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना को घर-घर जाकर पैसे बांटने की छूट दे दी है। हालांकि चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि मंगलवार शाम को सार्वजनिक प्रचार खत्म हो गया है, लेकिन उम्मीदवार पांच लोगों तक के साथ बिना माइक के मतदाताओं के घर जा सकते हैं। आयोग ने इसके लिए 14 फरवरी 2012 के एक आदेश का हवाला दिया और कहा कि इसे सार्वजनिक प्रचार नहीं माना जाता।
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