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महाराष्ट्र कैबिनेट में छगन भुजबल: मुंबई से दिल्ली तक लगा जोर, कैसे निकाय चुनाव में बन सकता है मास्टरस्ट्रोक
Wed, 21 May 2025 04:34 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 21 May 2025 04:34 PM IST
सार
छगन भुजबल को कैबिनेट में शामिल करने पर इतना सोच-विचार क्यों करना पड़ा? मौजूदा सरकार का कौन सा चेहरा भुजबल के लिए लगातार पैरवी करता नजर आया? इसके अलावा कैसे महायुति सरकार में भुजबल को कैबिनेट मंत्री का पद मिलना मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब के लिए हमने बात की महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत शिंदे से। आइये जानते हैं सभी सवालों के जवाब।
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छगन भुजबल महाराष्ट्र कैबिनेट में शामिल।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के वरिष्ठ नेता छगन भुजबल की एक बार फिर महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमंडल में वापसी हो गई है। उन्होंने 20 मई को पद की शपथ ले ली। 77 वर्षीय यह नेता महाराष्ट्र की राजनीति में ओबीसी समुदाय का प्रमुख चेहरा माने जाते हैं और पूर्व कैबिनेट मंत्री और उपमुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। हालांकि, महायुति सरकार के बीते साल सत्ता में आने के बाद उन्हें मंत्रिमंडल में जगह न मिलना अपने आप में कौतूहल का विषय बन गया। इसे लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा का बाजार भी गर्म रहा।
हालांकि, अब भुजबल को महाराष्ट्र कैबिनेट में शामिल किए जाने के बाद भी सियासी जगत में सवाल पूछे जाने जारी हैं। मसलन, धनंजय मुंडे का इस्तीफा मार्च में ही हो गया था, इसके बाद से खाली पड़े मंत्रिपद को भरने को लेकर कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें एक नाम छगन भुजबल का भी था।
ऐसे में पहला सवाल यह है कि क्यों इस खाली पड़े पद को भरने में दो महीने से भी ज्यादा का समय लग गया? छगन भुजबल को कैबिनेट में शामिल करने पर इतना सोच-विचार क्यों करना पड़ा? मौजूदा सरकार का कौन सा चेहरा भुजबल के लिए लगातार पैरवी करता नजर आया? इसके अलावा कैसे महायुति सरकार में भुजबल को कैबिनेट मंत्री का पद मिलना मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब के लिए हमने बात की महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत शिंदे से। आइये जानते हैं सभी सवालों के जवाब।
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हालांकि, अब भुजबल को महाराष्ट्र कैबिनेट में शामिल किए जाने के बाद भी सियासी जगत में सवाल पूछे जाने जारी हैं। मसलन, धनंजय मुंडे का इस्तीफा मार्च में ही हो गया था, इसके बाद से खाली पड़े मंत्रिपद को भरने को लेकर कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें एक नाम छगन भुजबल का भी था।
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ऐसे में पहला सवाल यह है कि क्यों इस खाली पड़े पद को भरने में दो महीने से भी ज्यादा का समय लग गया? छगन भुजबल को कैबिनेट में शामिल करने पर इतना सोच-विचार क्यों करना पड़ा? मौजूदा सरकार का कौन सा चेहरा भुजबल के लिए लगातार पैरवी करता नजर आया? इसके अलावा कैसे महायुति सरकार में भुजबल को कैबिनेट मंत्री का पद मिलना मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकता है? इन्हीं सवालों के जवाब के लिए हमने बात की महाराष्ट्र की राजनीति को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार चंद्रकांत शिंदे से। आइये जानते हैं सभी सवालों के जवाब।
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छगन भुजबल को पहले ही क्यों नहीं बनाया गया कैबिनेट का हिस्सा?
चंद्रकांत शिंदे के मुताबिक, छगन भुजबल के महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल से जुड़ने में देरी की बड़ी वजह अजित पवार से उनका मनमुटाव रहा।
बीच में अटकलें थीं कि छगन भुजबल आगे देवेंद्र फडणवीस के साथ जा सकते हैं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। देवेंद्र फडणवीस की तरफ से उन्हें समझाए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं।
बीते दिनों में छगन भुजबल की जो अजित पवार से दूरियां कम हुई हैं, उसकी असल वजह देवेंद्र फडणवीस हैं। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और छगन भुजबल के बीच बातें हो रही थीं।
चंद्रकांत शिंदे के मुताबिक, छगन भुजबल के महाराष्ट्र के मंत्रिमंडल से जुड़ने में देरी की बड़ी वजह अजित पवार से उनका मनमुटाव रहा।
बीच में अटकलें थीं कि छगन भुजबल आगे देवेंद्र फडणवीस के साथ जा सकते हैं। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। देवेंद्र फडणवीस की तरफ से उन्हें समझाए जाने की चर्चाएं भी सामने आईं।
बीते दिनों में छगन भुजबल की जो अजित पवार से दूरियां कम हुई हैं, उसकी असल वजह देवेंद्र फडणवीस हैं। क्योंकि पिछले कुछ दिनों से देवेंद्र फडणवीस, अजित पवार और छगन भुजबल के बीच बातें हो रही थीं।
भुजबल को कैबिनेट में जगह दिलाने के लिए किसने लगाई मुंबई से दिल्ली की दौड़?
देवेंद्र फडणवीस छगन भुजबल को कैबिनेट में लेने के लिए तैयार थी, लेकिन अजित पवार इसमें आनाकानी कर रहे थे, क्योंकि दोनों में कुछ विवाद हो गए थे। ऊपर से भुजबल के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे। भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने कई आरोप लगाए थे। हालांकि, देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें (अजित पवार को) समझाया। इसके बाद फडणवीस की दिल्ली में अमित शाह से बात हुई और शाह की तरफ से भुजबल को कैबिनेट में शामिल करने का ग्रीन सिग्नल मिल गया।
छगन भुजबल जब कैबिनेट मंत्री बन गए, तब देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया है कि वे ओबीसी के बहुत बड़े चेहरे हैं और समाज को इस वक्त इस तरह के चेहरे की जरूरत है। फडणवीस का समाज से सीधा मतलब महायुति सरकार से था। दरअसल, धनंजय मुंडे, जो कि बड़ा ओबीसी चेहरा थे, वह मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके थे। ऐसे में महायुति को एक ऐसे ओबीसी चेहरे की जरूरत थी, जो सिर्फ राज्य में ही नहीं देश में भी जाना-माना चेहरा हो। इससे भाजपा को महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश में फायदा मिलने की उम्मीद है।
देवेंद्र फडणवीस छगन भुजबल को कैबिनेट में लेने के लिए तैयार थी, लेकिन अजित पवार इसमें आनाकानी कर रहे थे, क्योंकि दोनों में कुछ विवाद हो गए थे। ऊपर से भुजबल के ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगे थे। भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता अंजलि दमानिया ने कई आरोप लगाए थे। हालांकि, देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें (अजित पवार को) समझाया। इसके बाद फडणवीस की दिल्ली में अमित शाह से बात हुई और शाह की तरफ से भुजबल को कैबिनेट में शामिल करने का ग्रीन सिग्नल मिल गया।
छगन भुजबल जब कैबिनेट मंत्री बन गए, तब देवेंद्र फडणवीस ने बयान दिया है कि वे ओबीसी के बहुत बड़े चेहरे हैं और समाज को इस वक्त इस तरह के चेहरे की जरूरत है। फडणवीस का समाज से सीधा मतलब महायुति सरकार से था। दरअसल, धनंजय मुंडे, जो कि बड़ा ओबीसी चेहरा थे, वह मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके थे। ऐसे में महायुति को एक ऐसे ओबीसी चेहरे की जरूरत थी, जो सिर्फ राज्य में ही नहीं देश में भी जाना-माना चेहरा हो। इससे भाजपा को महाराष्ट्र ही नहीं पूरे देश में फायदा मिलने की उम्मीद है।
शिंदे के मुताबिक, छगन का चेहरा महायुति में बाकी साथी पार्टियों (भाजपा-शिवसेना) में स्वीकृत भी है। ऐसे में वह महायुति को काफी फायदा पहुंचा सकते हैं।
क्या शरद पवार फैक्टर के डर से तो कैबिनेट में शामिल नहीं किए गए भुजबल?
"अजित पवार ने जब शरद पवार का साथ छोड़ा, तब छगन भुजबल ने काफी बयानबाजी की थी। ऐसे में उनका शरद पवार के साथ जाना काफी मुश्किल था। इसकी भी संभावना नहीं थी कि शरद पवार के कोई साथी छगन भुजबल के साथ जुड़ जाते।"
Maharashtra: भुजबल ने फडणवीस कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ ली, मंत्रालय को लेकर कही यह बात
"अजित पवार ने जब शरद पवार का साथ छोड़ा, तब छगन भुजबल ने काफी बयानबाजी की थी। ऐसे में उनका शरद पवार के साथ जाना काफी मुश्किल था। इसकी भी संभावना नहीं थी कि शरद पवार के कोई साथी छगन भुजबल के साथ जुड़ जाते।"
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मराठा आरक्षण बनाम ओबीसी आरक्षण में अब क्या होगी भुजबल की भूमिका?
चंद्रकांत शिंदे ने बताया कि छगन भुजबल को बीते दिनों में उन चेहरों के तौर पर भी पहचाना गया, जिन्होंने मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पर जुबानी हमला बोला। ऐसे में उन्हें मराठा आरक्षण के खिलाफ और ओबीसी आरक्षण में छेड़छाड़ न करने वाले चेहरे के तौर पर जाना जाने लगा था। हालांकि, इस पर शिंदे ने बताया कि छगन भुजबल मराठा आरक्षण के खिलाफ नहीं दिखे। वे मनोज जरांगे के तरीकों के खिलाफ थे। जिस तरह जरांगे ने ओबीसी आरक्षण को लेकर बयान दिए थे। उन्हें लेकर भुजबल ने कई बार रोष जताया। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि मराठा आरक्षण देने में उन्हें कोई आपत्ति है, लेकिन जरांगे ने जिस तरह से यह मांगा, उसे लेकर उन्होंने चिंता जताई थी।"
उन्होंने कहा, "अभी हाल ही में जरांगे ने कहा है कि अजित पवार के साथ जातिवादी लोग पनप रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो वे मराठा आरक्षण को फिर से हवा देने के लिए छगन भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के मुद्दे को उठा रहे हैं।"
चंद्रकांत शिंदे ने बताया कि छगन भुजबल को बीते दिनों में उन चेहरों के तौर पर भी पहचाना गया, जिन्होंने मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन कर रहे मनोज जरांगे पर जुबानी हमला बोला। ऐसे में उन्हें मराठा आरक्षण के खिलाफ और ओबीसी आरक्षण में छेड़छाड़ न करने वाले चेहरे के तौर पर जाना जाने लगा था। हालांकि, इस पर शिंदे ने बताया कि छगन भुजबल मराठा आरक्षण के खिलाफ नहीं दिखे। वे मनोज जरांगे के तरीकों के खिलाफ थे। जिस तरह जरांगे ने ओबीसी आरक्षण को लेकर बयान दिए थे। उन्हें लेकर भुजबल ने कई बार रोष जताया। उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि मराठा आरक्षण देने में उन्हें कोई आपत्ति है, लेकिन जरांगे ने जिस तरह से यह मांगा, उसे लेकर उन्होंने चिंता जताई थी।"
उन्होंने कहा, "अभी हाल ही में जरांगे ने कहा है कि अजित पवार के साथ जातिवादी लोग पनप रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो वे मराठा आरक्षण को फिर से हवा देने के लिए छगन भुजबल को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के मुद्दे को उठा रहे हैं।"