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महाराष्ट्र में सट्टेबाजों का नया पैंतरा: किस तरह बैंकों का इस्तेमाल कर पैसा दुबई भेज रहे क्रिकेट बुकीज?

Wed, 14 Oct 2026 10:22 PM IST
Sunil Mehrotra सुनील मेहरोत्रा
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:22 PM IST
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Maharashtra bookies new ploy How cricket bookies using banks to send money to Dubai
साइबर अपराध (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

साइबर फ्रॉड की वजह से बड़े शहरों के बड़े निजी बैंकों के ट्रांजैक्शनों को जांच एजेंसियां लगातार मॉनिटर करती रहती हैं, इसलिए क्रिकेट बुकीज ने इसकी काट के लिए देश के ग्रामीण बैंकों में म्यूल अकाउंट्स खोलने शुरू किए हैं। क्रिकेट बुकीज के लोग इन खातों से बैंक जाकर या एटीएम से रकम निकालते हैं और फिर अपने सरगनाओं को भेजते हैं। 

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हवाला से रकम भेजने के बदले कमीशन
मुंबई से सटे वसई क्राइम ब्रांच ने पिछले एक हफ्ते में नौ लोगों को सट्टेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया है। उनसे पूछताछ में यह खुलासा हुआ है। वसई क्राइम ब्रांच के सीनियर इंस्पेक्टर नितिन पाटील ने बातचीत में बताया कि हवाला से दुबई रकम भेजने के बदले में बुकीज के लोगों को 30 प्रतिशत तक कमिशन दुबई से सरगनाओं द्वारा दिया जाता है। नितिन पाटील ने क्रिकेट सटोरियों के अपराध का तरीका बताया। 
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बिना सिम के व्हाट्सएप चलता है
पुलिस अधिकारी के अनुसार, क्रिकेट बुकीज गांवों में लोगों को मोटी रकम देकर उनके आधार कार्ड व अन्य दस्तावेज लेते हैं। फिर इन दस्तावेजों के जरिए सिम कार्ड खरीदे जाते हैं। इन्हीं दस्तावेजों और सिम कार्ड नंबर से ग्रामीण बैंकों में अकाउंट खोले जाते हैं। बाद में इन सिम कार्ड को किसी मोबाइल हैंडसेट में डालकर बुकीज के लोग उससे वॉट्सएप डाउनलोड कर लेते हैं। फिर वॉट्सएप वाले मोबाइल सेट से सिम कार्ड को निकालकर किसी ऐसे मोबाइल सेट में डाल दिया जाता है, जिसमें व्हाट्सएप चल ही नहीं सकता, लेकिन जिस मोबाइल सेट में बिना सिम के व्हाट्सएप चलता है, उसे लेकर बुकीज और उनके लोग देश और विदेश में अलग-अलग होटलों में ठहरते हैं। उन होटलों का वाय-फाय यूज करते हैं। फिर कुछ घंटे बाद दूसरा होटल बदलते हैं और वहां का वाय-फाय यूज करते हैं। इन होटलों में व्हाट्सएप नंबरों से सट्टा खेलते हैं। चूंकि सिम कार्ड का लोकेशन दूसरी जगह का दिख रहा होता है और वॉट्सऐप वाले मोबाइल सेट में सिम न होने की वजह से उसका लोकेशन जांच एजेंसियों को आसानी से मिलना मुश्किल होता है, इसलिए क्रिकेट बुकीज जांच एजेंसियों की रडार से आसानी से बचते रहते हैं।
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नितिन पाटील के अनुसार, सट्टे में रकम जीतने पर क्रिकेट बुकीज ग्रामीण बैंकों के खातों में रकम ऑनलाइन ट्रांसफर करवा लते हैं। फिर बुकीज के वे लोग, जिनके नाम बैंक खाते खुले होते हैं, इन बैंकों में खुद जाकर रकम विदड्रा करवा लेते हैं या एटीएम से रकम निकाल लेते हैं। अलग-अलग गांवों के बैंकों से निकाली गई रकम एक खास दिन किसी बड़े शहर में लाई जाती है और फिर हवाला के जरिए दुबई व विदेश के कुछ अन्य शहरों में भेज दी जाती है। सट्टेबाजी से जुड़े इस रैकेट के बारे में सबसे चौंकाने वाली बात यह बात पता चली कि इन लोगों का लिंक महादेव एप के सरगनाओं से भी निकला है। 

जब सीनियर इंस्पेक्टर नितिन पाटील और इंस्पेक्टर अविनाश कुराडे ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की, तो उन्होंने बताया कि महादेव एप वालों ने जांच एजेंसियों की रडार से बचने के लिए अलग-अलग नाम के सट्टे के एप और बुक अकाउंट बनाए हैं। ऐसे ही दो बुक अकाउंट 'Reddy Book' व 'Reddy 66' के बारे में जब जानकारी मिली, तो वसई क्राइम ब्रांच ने वसई के पास नायगांव में रेड डाली और वहां से एक आरोपी को गिरफ्तार किया। उससे पूछताछ में उसके कुछ साथियों के गोवा में होने की टिप मिली। 


बस के अंदर से गिरफ्तार हुए आरोपी
इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम गोवा गई। वहां से कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इनसे पूछताछ में पता चला कि ये लोग Nitin Online Book के नाम से सट्टा खेलते थे। इनसे पूछताछ में इनके दो प्रमुख साथियों के बारे में टिप मिली कि यह लोग पुणे में हैं। जब क्राइम ब्रांच टीम पुणे गई, तो पता चला कि यह दोनों पुणे से नागपुर की एक ट्रैवल बस में बैठे हैं। फिर इन दोनों को बस के अंदर से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में पता चला कि उसके खिलाफ छत्तीसगढ़ में सट्टेबाजी से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। इसके बाद ही इस केस में महादेव सट्टा लिंक सामने आया। महादेव सट्टा केस की जांच छत्तीसगढ़ ईडी के अलावा कई अन्य एजेंसियां भी कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के पिछले विधानसभा चुनाव में यह राजनीतिक मुद्दा बना था। महादेव एप से जुड़े सरगना इन दिनों विदेश में बैठे हैं। वसई क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई राउटर, मोबाइल, टैब, लैपटॉप, कैमरे, सिम कार्ड, हिसाब की नोटबुक और गाड़ियां जब्त की हैं।

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