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महाराष्ट्र: डीजल के पैसे नहीं दे पाया मजदूर, बेहोश बेटी को सरकारी एंबुलेंस से उतारा; हुई क्या कार्रवाई?
Wed, 14 Oct 2026 09:36 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, बीड
पीटीआई, बीड
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Wed, 14 Oct 2026 09:36 PM IST
सार
महाराष्ट्र के बीड जिले में एक मजदूर को अपनी 11 वर्षीय बेहोश बेटी को कंधे पर उठाकर निजी क्लीनिक की ओर जाना पड़ा। आरोप है कि दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एंबुलेंस से बच्ची को दूसरे अस्पताल ले जाने के लिए डीजल के पैसे मांगे गए और भुगतान नहीं कर पाने पर परिवार को उतरने के लिए कह दिया गया।
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महाराष्ट्र में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
महाराष्ट्र के बीड जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि डीजल के पैसे नहीं दे पाने पर एक मजदूर और उसके परिवार को सरकारी एंबुलेंस से उतरने के लिए कह दिया गया। इसके बाद पिता अपनी 11 वर्षीय बेहोश बेटी को कंधे पर उठाकर निजी क्लीनिक की ओर चल पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है।
यह घटना पिछले महीने माजलगांव तहसील के दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. निलेश ढकने को उनके पद से हटा दिया गया है। उनके निलंबन समेत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को भेजा गया है।
स्कूल में दौरा पड़ने के बाद बच्ची को अस्पताल लाया गया
घटना 29 सितंबर की है। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची जिला परिषद के स्कूल में गंभीर दौरा पड़ने के बाद बेहोश हो गई थी। स्कूल प्रशासन उसे दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। माजलगांव तहसील के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुकर घुबड़े के अनुसार, डॉ. ढकने ने बच्ची को बेहतर और गंभीर उपचार वाली चिकित्सा सुविधा में ले जाने की सलाह दी थी।
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आरोप है कि जब बच्ची के पिता और परिवार के अन्य सदस्य उसे एंबुलेंस से ले जाने के लिए बैठे, तो स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने ईंधन के लिए पैसे मांगे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिता ने पैसे नहीं होने की बात कहकर उनसे गुहार लगाई, लेकिन परिवार को एंबुलेंस से उतरने के लिए कह दिया गया।
वीडियो में बेटी को कंधे पर ले जाता दिखा पिता
बच्ची के पिता मजदूरी करते हैं। पत्नी की मृत्यु के बाद वह अपने चार बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। वायरल वीडियो में पिता अपनी बेहोश बेटी को कंधे पर उठाकर पैदल निजी क्लीनिक की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी भी नजर आते हैं।
बच्ची की दादी ने आरोप लगाया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बताते हुए जब वह रोने लगीं, तो डॉ. ढकने ने उनसे कहा, "अगर आप बच्चों की देखभाल नहीं कर सकतीं, तो उन्हें जन्म क्यों देती हैं?"
जांच के बाद कार्रवाई का प्रस्ताव
बीड जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के निर्देश पर अतिरिक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय कदम, माजलगांव तहसील स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुकर घुबड़े और मीडिया अधिकारी संदीपन मांडवे ने स्वास्थ्य केंद्र में जांच की। इस दौरान बच्ची की दादी, पिता और चाचा के साथ संबंधित डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उल्हास गांदल ने बुधवार को बताया कि डॉ. ढकने को तत्काल प्रभाव से दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अगले आदेश तक उनका मुख्यालय बीड जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में तय किया गया है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव लातूर के स्वास्थ्य सेवा उपनिदेशक के माध्यम से मुंबई स्थित स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को भेजा गया है।
डॉक्टर ने मानी गलती
मामले को लेकर आलोचना के बीच डॉ. ढकने ने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा, "एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित है, लेकिन मुझे अपमानजनक तरीके से बात नहीं करनी चाहिए थी। यह मेरी गलती थी।" इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने बीड जिले के अंबाजोगाई शहर में शहरी स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर तैनात दो संविदा चिकित्सा अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी हैं। दोनों पर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप था।
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यह घटना पिछले महीने माजलगांव तहसील के दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुई थी। स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, केंद्र में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. निलेश ढकने को उनके पद से हटा दिया गया है। उनके निलंबन समेत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को भेजा गया है।
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स्कूल में दौरा पड़ने के बाद बच्ची को अस्पताल लाया गया
घटना 29 सितंबर की है। पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची जिला परिषद के स्कूल में गंभीर दौरा पड़ने के बाद बेहोश हो गई थी। स्कूल प्रशासन उसे दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचा। माजलगांव तहसील के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुकर घुबड़े के अनुसार, डॉ. ढकने ने बच्ची को बेहतर और गंभीर उपचार वाली चिकित्सा सुविधा में ले जाने की सलाह दी थी।
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आरोप है कि जब बच्ची के पिता और परिवार के अन्य सदस्य उसे एंबुलेंस से ले जाने के लिए बैठे, तो स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने ईंधन के लिए पैसे मांगे। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पिता ने पैसे नहीं होने की बात कहकर उनसे गुहार लगाई, लेकिन परिवार को एंबुलेंस से उतरने के लिए कह दिया गया।
वीडियो में बेटी को कंधे पर ले जाता दिखा पिता
बच्ची के पिता मजदूरी करते हैं। पत्नी की मृत्यु के बाद वह अपने चार बच्चों की परवरिश कर रहे हैं। वायरल वीडियो में पिता अपनी बेहोश बेटी को कंधे पर उठाकर पैदल निजी क्लीनिक की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारी भी नजर आते हैं।
बच्ची की दादी ने आरोप लगाया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बताते हुए जब वह रोने लगीं, तो डॉ. ढकने ने उनसे कहा, "अगर आप बच्चों की देखभाल नहीं कर सकतीं, तो उन्हें जन्म क्यों देती हैं?"
जांच के बाद कार्रवाई का प्रस्ताव
बीड जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के निर्देश पर अतिरिक्त जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय कदम, माजलगांव तहसील स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मधुकर घुबड़े और मीडिया अधिकारी संदीपन मांडवे ने स्वास्थ्य केंद्र में जांच की। इस दौरान बच्ची की दादी, पिता और चाचा के साथ संबंधित डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों के बयान दर्ज किए गए।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. उल्हास गांदल ने बुधवार को बताया कि डॉ. ढकने को तत्काल प्रभाव से दिंद्रुड प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा अधिकारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है। अगले आदेश तक उनका मुख्यालय बीड जिला परिषद के स्वास्थ्य विभाग कार्यालय में तय किया गया है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सिविल सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1979 के तहत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव लातूर के स्वास्थ्य सेवा उपनिदेशक के माध्यम से मुंबई स्थित स्वास्थ्य सेवा आयुक्त को भेजा गया है।
डॉक्टर ने मानी गलती
मामले को लेकर आलोचना के बीच डॉ. ढकने ने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा, "एंबुलेंस गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित है, लेकिन मुझे अपमानजनक तरीके से बात नहीं करनी चाहिए थी। यह मेरी गलती थी।" इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने बीड जिले के अंबाजोगाई शहर में शहरी स्वास्थ्य एवं आरोग्य केंद्रों पर तैनात दो संविदा चिकित्सा अधिकारियों की सेवाएं भी समाप्त कर दी हैं। दोनों पर ड्यूटी से अनुपस्थित रहने का आरोप था।