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Maharashtra: मुंबई की बेकरियों में लकड़ी और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध, बेकर्स एसोसिएशन ने जताई आपत्ति
Thu, 20 Feb 2025 11:03 PM IST
बशु जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: बशु जैन
Updated Thu, 20 Feb 2025 11:03 PM IST
सार
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बेकरियों में लकड़ियों और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसे लेकर नेताओं और बेकर्स ने आपत्ति जताई है। बेकर्स का कहना है कि लकड़ियों और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से मुंबई में पाव की आपूर्ति बाधित होगी। साथ ही बड़ा पाव की कीमतों में इजाफा होगा।
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बीएमसी
- फोटो : ANI
विस्तार
बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने बेकरियों में लकड़ियों और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसे लेकर नेताओं और बेकर्स ने आपत्ति जताई है। बेकर्स का कहना है कि लकड़ियों और कोयले के इस्तेमाल पर प्रतिबंध से मुंबई में पाव की आपूर्ति बाधित होगी। साथ ही बड़ा पाव की कीमतों में इजाफा होगा।
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दरअसल, बड़ा पाव मुंबई की प्रमुख स्ट्रीट फूड है। बड़ा पाव हर मुंबईकर की बुनियादी जरूरत है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश पर बीएमसी ने वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बेकरी, भोजनालयों और रेस्टोरेंट में आठ जुलाई तक बिजली, सीएनजी, पीएनजी और एलपीजी जैसे ईंधन का प्रयोग करने के लिए कहा है।
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मामले को लेकर 79 साल पुराने भारतीय बेकर्स एसोसिएशन ने बीएमसी अधिकारियों को लिखे पत्र में कहा है कि बड़ा पाव की आपूर्ति में बाधा होने से स्थिति बिगड़ सकती है। एसोसिएशन के केपी ईरानी ने कहा कि नगर निगम ने लकड़ी और कोयले पर प्रतिबंध लगाने से पहले से हमसे बात नहीं की। पाव, ब्रेड और बन और ब्रून पाव को पकाने के लिए बिजली का इस्तेमाल आर्थिक रूप से अव्यवहारिक है। 150 वर्ग फीट में फैले गुंबदनुमा ढांचे में बिजली या अन्य ईंधन का इस्तेमाल करना संभव ही नहीं है।
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उन्होंने कहा कि एलपीजी और पीएनजी का उपयोग करने से सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ जाता है। प्रत्येक बेकरी के लिए कम से कम 10 एलपीजी सिलिंडरों की जरूरत होगी, तो दुर्घटना की स्थिति में बड़े नुकसान का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा मुंबई में पीएनजी के लिए हर जगह उपयुक्त इंतजाम नहीं हैं।
सपा के एक विधायक ने बीएमसी के प्रमुख भूषण गगरानी को लिखे पत्र में कहा कि सभी बेकर्स की सुनवाई तत्काल की जानी चाहिए। इससे पाव की कीमतें तीन से पांच रुपये तक बढ़ सकती हैं। ऐसे में बड़ा पाव और मिसल पाव की कीमत में भी इजाफा होगा। इसका व्यवहारिक समाधान निकाले जाने की जरूरत है। ताकि बेकरी उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े और कार्बन का उत्सर्जन भी कम हो।
भाजपा पार्षद ने की ईरानी कैफे और बेकरी को विरासत का दर्जा देने की मांग
भाजपा पार्षद मिलिंद नार्वेकर ने ईरानी कैफे और बेकरी को विरासत का दर्जा देने की मांग की है। सीएम देवेंद्र फडणवीस को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि ईरानी कैफे एक भोजनालय ही नहीं है, वे मुंबई के पाक इतिहास का अहम हिस्सा हैं। ये कैफे एक सदी से ज्यादा समय से अस्तित्व में हैं। यहां बनी लकड़ी की भट्टियां विरासत का अभिन्न अंग हैं। इन कैफे में पके माल का स्वाद और खुशबू अलग है। बिना लकड़ी और कोयले के ओवन इसके स्वाद को बदल देंगे।
नार्वेकर ने कहा कि कैफे की उत्पत्ति 19वीं शताब्दी में हुई थी। उन्होंने सीएम से अपील की कि बीएमसी से आदेश पर पुनर्विचार करने का अनुरोध करें। सरकार ईरानी कैफे को विरासत का दर्जा देने पर विचार करे। साथ ही लकड़ी और कोयले के उपयोग पर प्रतिबंध से छूट दे। न्यूयॉर्क जैसे शहरों में पारंपरिक खाना पकाने के तरीकों को बचाने के लिए ऐतिहासिक रेस्टोरेंट को नियमों से छूट दी गई है। नीदरलैंड में भी पुरानी पवन चक्कियों को राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षित किया गया है।
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