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26/11 आतंकी हमला: 'मैंने भी देखा था वो खूनी मंजर'

Sat, 26 Nov 2016 10:58 AM IST
जुबैर अहमद/ बीबीसी
जुबैर अहमद/ बीबीसी Updated Sat, 26 Nov 2016 10:58 AM IST
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maharashtra: 26/11 mumbai terrorist attack

आज ही के दिन ठीक आठ साल पहले मुंबई पर घातक आतंकवादी हमले हुए थे जिन में 160 के करीब आम नागरिक मारे गए थे। ये हमले 60 घंटों तक जारी रहे थे। उन तीन दिनों में दौड़ता-भागता, जीता-जागता मेट्रोपोलिटन मुंबई शहर ठहर सा गया था। सहम सा गया था। ये न्यू यॉर्क के 9 /11 की तरह मुंबई का 26/11 साबित हुआ। देखते ही देखते आठ साल गुजर गए।

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लेकिन उन परिवार वालों के लिए इन हमलों की याद अब भी ताजा है जिनके सगे संबंधी इन में मारे गए थे। मौत के उस नंगे नाच को वो भी कभी भूल नहीं सकेंगे जिन्होंने इसे करीब से देखा हो। जिन्होंने
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आटोमेटिक राइफलों से निकली गोलियों की आवाजें सुनी हों, हथगोलों के फटने की गूँज सुनी हो और बंधक बनाए लोगों की बेबसी की झलक देखी हो। उन में से एक मैं भी हूँ। मैं 26 नवंबर 2008 की उस रात दोस्तों के साथ खाना खाने ट्रिडेंट होटल के करीब एक रेस्त्रां में बैठा हुआ था।
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लगभग 9.30 बजे खबर आयी कि दक्षिण मुंबई में गैंग वार शुरू हो गया है। मुंबई के अंडरवर्ल्ड के डॉन के बीच झड़पों के आदी हो चुके शहरवासियों को पहले ऐसा ही लगा था। लेकिन जल्द ही ये समझ में आ गया कि ये चरमपंथी हमले हैं। जो सारा सच अब हम जानते हैं वो उस रात को देर तक हमें नहीं मालूम था। हमें नहीं मालूम था कि हमला करने वाले बंदूकधारी पाकिस्तान के कराची शहर से अरब महासागर में एक नाव पर सवार होकर आये थे।

अचानक हुए इन हमलों के लिए पुलिस तैयार नहीं थी

maharashtra: 26/11 mumbai terrorist attack

हमें नहीं मालूम था कि उनकी संख्या दस थी और वो दो-दो की पांच टुकड़ियों में बंट कर एक साथ पांच जगहों पर हमला कर रहे थे। अचानक हुए इन हमलों के लिए पुलिस तैयार नहीं थी। घायलों से जूझने के लिए अस्पताल चौकस नहीं थे। पीड़ितों की मदद के लिए प्रशासन चुस्त नहीं था। मुंबई में 2006 में एक साथ कई लोकल ट्रेनों के अंदर घातक बम धमाके हो चुके थे। लेकिन 26 नवंबर के हमले अलग थे।

पहली बार हमला करने वालों को आप देख सकते थे। पहली बार वो तीन दिनों तक हमला करते रहे। और पहली बार वो सर पर मौत का कफन बांधे लोगों पर भरे स्टेशन में अंधाधुंध गोलियां चलाते रहे। हमलों की चपेट में आए वीटी स्टेशन, ट्रिडेंट होटल, ताज महल होटल, लियोपोल्ड कैफे और ससून हॉस्पिटल में लाशों के ढेर लग गए थे। 

जब मुंबई पुलिस और दिल्ली से आए स्पेशल कमांडो दस्ते ने मिलकर नौ बंदूकधारी मार गिराए तो हमले खत्म हो गए। अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया था। गिरफ्तार होने के बाद उन्होंने ही इस हमले की पूरी कहानी बयां की।

बंदूकधारियों के साथ मुठभेड़ में आतंकवाद निरोधक दस्ते के प्रमुख हेमंत करकरे समेत कई पुलिस वाले भी मारे गए थे। इन हमलों से मुंबई के सैकड़ों परिवारों की दर्द भरी यादें जुड़ी हैं। मैं उस दंपति के दर्द को याद करता हूँ जिनका 10 साल का बेटा एक ही होटल (ताज महल होटल) में रात भर उन से बिछड़ गया था।

भाई अपने भाई के मारे जाने के सदमे से इस दुनिया से गुजर गया

maharashtra: 26/11 mumbai terrorist attack

इस बच्चे ने मुझे बाद में बताया कि जब वो शौचालय जा रहा था तो उस ने देखा दो बंदूकधारी गोली चला रहे हैं। रिसेप्शन पर लोग खड़े हैं लेकिन हिल भी नहीं पा रहे हैं। उसने सोचा कि कोई वीडियो गेम चल रहा है। लेकिन जब उसे खतरा महसूस हुआ तो वो भाग न सका। बिलकुल स्थिर खड़ा रहा। उसकी किस्मत अच्छी थी कि कुछ घंटों के बाद बंदूकधारी ऊपर की मंजिल पर चले गए थे।

फिर लियोपोल्ड कैफे में काम करने वाले दो वेटर भाइयों को याद करता हूँ। एक भाई कैफे में मारा गया। दूसरा भाई अपने भाई के मारे जाने के सदमे से इस दुनिया से गुजर गया। कैफे में मारे गए भाई की कम उम्र की बेटी ने मुझ से रोकर पूछा था, "मेरे अब्बू ने इनका क्या बिगाड़ा था? उनकी जो भी मांग है क्या मेरे अब्बू के मारे जाने से पूरी हो जाएगी?" इन हमलों में इसराइली और अमेरिकी समेत कई विदेशी भी मारे गए थे। 

शायद इन हमलों के बाद पहली बार अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने ये समझा कि भारत आतंकवाद का बुरी तरह से शिकार है। इस कांड ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी को जन्म दिया। अमेरिका से आतंकवाद के मामले में ताल मेल बढ़ा। भारत को सब तरफ से सहानूभूति मिली।

शायद खुफिया एजेंसियों ने अपने काम को मजबूत किया। 26/11 के बाद मुम्बई में आठ साल में केवल एक चरमपंथ हमला हुआ (2011 में दो बम धमाके एक साथ हुए थे।) मुंबई में कई साल रह कर तीन साल पहले मैं ने शहर को अलविदा कहा था। ये भी क्या इत्तेफाक है कि 26/11 की आठवीं बरसी पर मैं यहाँ, कई यादों से जुड़े शहर में, कुछ दिनों के लिए वापस लौटा हूँ। शहर में वापसी पर खुशी है। साथ ही ये महसूस करके भी कि अब ये शहर पहले से काफी सुरक्षित है।

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