फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Mahagathbandhan appears to be strong in exit polls regarding the Bihar elections

बिहार चुनाव: तेजस्वी, लालूवाद से बाहर निकल आए, मगर नीतीश कुमार, मोदीवाद में फंसे रहे, ऐसे पलटा चुनाव ...

Sun, 08 Nov 2020 01:10 AM IST
Jeet Kumar जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jeet Kumar Updated Sun, 08 Nov 2020 01:10 AM IST
विज्ञापन
Mahagathbandhan appears to be strong in exit polls regarding the Bihar elections
बिहार चुनाव एग्जिट पोल 2020 - फोटो : Amar Ujala

बिहार चुनाव को लेकर सामने आए एग्जिट पोल में महागठबंधन की स्थिति मजबूत दिखाई पड़ रही है। अधिकांश सर्वे तेजस्वी के पक्ष में जाते दिख रहे हैं। तेजस्वी, लालूवाद से बाहर निकल आए, मगर नीतीश कुमार, मोदीवाद में फंसे रहे।बिहार में धर्म और जाति के नाम पर लड़ा जाने वाला चुनाव, कुछ दिन पहले ही 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' पर आ गया।

विज्ञापन


हालांकि यह चुनावी नारा युवा हल्लाबोल के संयोजक, अनुपम ने दिया था।बाद में इसे तेजस्वी यादव ने उठा लिया।जैसे जैसे मतदान की तारीख निकट आती गई, 36 लाख से अधिक बेरोजगारों की संख्या वाले बिहार में 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' के नारे ने चुनाव को पलट कर रख दिया।
विज्ञापन



जेएपी के अध्यक्ष पप्पू यादव का कहना है कि जो सीएम किसी की कृपा पर काम करता हो, वह कमजोर कहलाता है।ऐसा सीएम निर्णय लेने में सक्षम नहीं होता।

युवा हल्लाबोल के संयोजक अनुपम ने बिहार चुनाव में कई जिलों का दौरा कर ‘बोल बिहारी’ अभियान की शुरुआत की थी। उन्होंने नेताओं से रोजगार को लेकर कई सवाल पूछे। बाद में उन्होंने चुनाव में एक नारा दिया, 'पढ़ाई, कमाई और दवाई'।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके बाद में तकरीबन सभी पार्टियों ने उठाया। अनुपम कहते हैं कि बिहार चुनाव का शोर शुरु होने से पहले सभी लोग यही मान रहे थे कि यह चुनाव भी धर्म और जाति के इर्द गिर्द घूमेगा। भाजपा की तरफ से धर्म के अलावा अनुच्छेद 370 और चीन के साथ हुई झड़प में शहीद हुए बिहार के जवानों को भी चुनावी रैलियों में याद किया गया।

बेरोजगारी की राष्ट्रीय राजधानी कहे जाने वाले बिहार ने इस बार जमीनी स्थिति को समझा। लोगों ने देखा कि उनके बच्चों को नौकरी नहीं मिल रही है। जब कमाई नहीं है तो दवा कहां से आएगी, ये तथ्य बिहार के वोटरों के दिमाग में बैठ गया।

तेजस्वी यादव, जो कि प्रचार के शुरु में अन्य मुद्दों पर फोकस कर रहे थे, वे सही समय पर युवा हल्लाबोल द्वारा दिए गए स्लोगन पर आ गए।जैसे ही यादव ने जनता के बीच 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' के नारे को रखा तो लोगों ने उसे हाथों हाथ अपना लिया।

पप्पू यादव कहते हैं कि नीतीश कुमार, भाजपा के चलते कभी भी मजबूत निर्णय नहीं ले सके।उन्होंने भाजपा के साथ मिलकर दूसरे का गठबंधन तोड़ने में दिलचस्पी दिखाई।चुनाव में थका हुआ सीएम, तेजस्वी का यह नारा काम कर गया।

नीतीश कुमार न केवल खुद के लिए, बल्कि भाजपा के लिए भी परेशानी बने रहे।कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह के अनुसार, बिहार चुनाव में जुमला नहीं चला।भाजपा ने प्रयास बहुत किया, लेकिन बिहार की जनता ने उन्हें नकार दिया।लोग चाहते हैं कि मुद्दों पर बात हो।शिक्षा, स्वास्थ्य और नौकरी की बात हो।नीतीश कुमार को यह बात उस वक्त समझ आई, जब बाजी उनके हाथ से निकल चुकी थी।

अनुपम बताते हैं कि बिहार का चुनाव अब देश को एक नया संदेश देगा।लोगों की यह चुनावी समझ केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ये बहुत आगे जाएगी।सभी राज्यों में 'पढ़ाई, कमाई और दवाई' जैसे नारे काम करेंगे।नीतीश कुमार के पास पर्याप्त समय था, लेकिन वे कई ऐसे मुद्दों को उठाना भूल गए, जो हर परिवार की जरुरत रहे हैं।इनमें रोजगार सबसे अहम था।


नीतीश कुमार के पीछे रहने का एक कारण, उनकी भाजपा के साथ कहासुनी होना भी रहा है।बिहार की जनता इतना तो समझ चुकी थी कि उनका भाजपा के साथ जो गठबंधन है, वह बहुत ज्यादा मजबूरी की स्थिति में पहुंच गया है।दरअसल, विपक्ष ने ही नहीं, बल्कि नीतीश को खुद भाजपा ने भी कमजोर बनाया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed