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महादेव एप केस में रवि उप्पल यूएई में गिरफ्तार: भारत लाने की तैयारी, पुलिस के शिकंजे में कैसे फंसा मास्टरमाइंड?
Wed, 04 Nov 2026 08:29 PM IST
राकेश कुमार
पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 04 Nov 2026 08:29 PM IST
सार
महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी एप के सह-संस्थापक रवि उप्पल को यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है, और भारतीय एजेंसियां उसे जल्द भारत लाने की प्रक्रिया में जुटी हैं। इससे पहले उसके साथी सौरभ चंद्राकर को ओमान से प्रत्यर्पित किया जा चुका है, जो मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में वांछित था। इन दोनों ने विदेश भागने के लिए वानातू देश का पासपोर्ट इस्तेमाल किया था और साल 2019 से चल रहे इस 80,000 करोड़ रुपये के अवैध नेटवर्क का पर्दाफाश अब तेजी से हो रहा है।
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महादेव सट्टा एप केस में बड़ी कार्रवाई
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
ऑनलाइन सट्टेबाजी के सबसे बड़े और बहुचर्चित घोटालों में से एक 'महादेव एप' को लेकर जांच एजेंसियों के हाथ एक और बड़ी कामयाबी लगी है। इस मामले के मुख्य को-प्रमोटर और आरोपी रवि उप्पल को संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई में गिरफ्तार कर लिया गया है। भारतीय जांच एजेंसियां अब उसे जल्द से जल्द देश वापस लाने के लिए कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर तेजी से काम कर रही हैं। यह कार्रवाई उस वक्त हुई जब इंटरपोल की ओर से उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसके आधार पर यूएई के स्थानीय प्रशासन ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।
सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद क्यों तेज हुई कार्रवाई?
पिछले दिनों इसी केस से जुड़े एक अन्य सह-संस्थापक और रवि उप्पल के करीबी साथी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया था। ओमान की एक अदालत से कानूनी मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की एक टीम ने एक नवंबर को उसे अपनी गिरफ्त में लिया और भारत ले आई, जहां मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी भारत से भागने के बाद से लगातार अपनी लोकेशन और पहचान छिपाने की फिराक में थे, लेकिन एजेंसियों के कड़े शिकंजे ने उनके विदेश में छिपने के सारे रास्ते धीरे-धीरे बंद कर दिए हैं।
वानातू देश का फर्जी पासपोर्ट और छत्तीसगढ़ से क्या है कनेक्शन?
जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों और पुख्ता सबूतों के अनुसार, रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर दोनों ने मिलकर दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे से द्वीप देश 'वानातू' से फर्जी तरीके से पासपोर्ट हासिल कर लिए थे। अधिकारियों का यह भी दावा है कि ये दोनों छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई शहर के ही रहने वाले हैं और वहीं से अपने आपराधिक साम्राज्य की जड़ें मजबूत कर रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय ने अक्तूबर 2023 में ही अपनी चार्जशीट में रवि उप्पल का नाम शामिल कर दिया था, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वह अपराध से भारी मात्रा में अवैध कमाई जुटा रहा था और पैसे की हेराफेरी व छुपाने के काले कारोबार में सीधे तौर पर लिप्त था।
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यह भी पढ़ें: सिंडिकेट: 'द ठेका' पर बेची गई बिना 'ट्रैक एंड ट्रेस स्ट्रिप्स' वाली विदेशी शराब, यूं हुई कस्टम ड्यूटी की चोरी
ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं तक कैसे पहुंचती थी घूस की रकम?
जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि रवि उप्पल दुबई में बैठकर इस पूरे नेटवर्क के जरिए होने वाली काली कमाई और अवैध उगाही को मैनेज कर रहा था। आरोप है कि वह छत्तीसगढ़ के कई बड़े राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों तक हवाला के जरिए रिश्वत और लाइजनिंग का पैसा पहुंचाने का काम देखता था। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए उसने चंद्रभूषण वर्मा नाम के एक पुलिस सहायक उप-निरीक्षक और उसके कुछ खास साथियों का इस्तेमाल किया था। रायपुर की एक विशेष अदालत ने हाल ही में सौरभ चंद्राकर को आठ दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है, जिससे पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट के कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
80 हजार करोड़ के इस सट्टा साम्राज्य का कैसे हुआ था पर्दाफाश?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) एप की शुरुआत साल 2019 और 2020 के दौरान की गई थी, लेकिन साल 2020 में कोरोना महामारी के लॉकडाउन के दौरान इसका यूजर बेस बहुत तेजी से और अचानक बढ़ा था। यह पूरा अवैध धंधा इंटरनेट पर हजारों अलग-अलग पैनल्स के जरिए चलाया जा रहा था, जिसने साल 2019 से लेकर अब तक कुल 80,000 करोड़ रुपये के आसपास के अपराध से जुड़े अवैध धन का सृजन किया है। भारत सरकार और तमाम केंद्रीय एजेंसियां अब यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि देश के करोड़ों युवाओं को ठगने वाले इस गिरोह के दोनों मुख्य सरगनाओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।
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सौरभ चंद्राकर की गिरफ्तारी के बाद क्यों तेज हुई कार्रवाई?
पिछले दिनों इसी केस से जुड़े एक अन्य सह-संस्थापक और रवि उप्पल के करीबी साथी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाया गया था। ओमान की एक अदालत से कानूनी मंजूरी मिलने के बाद सीबीआई की एक टीम ने एक नवंबर को उसे अपनी गिरफ्त में लिया और भारत ले आई, जहां मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी भारत से भागने के बाद से लगातार अपनी लोकेशन और पहचान छिपाने की फिराक में थे, लेकिन एजेंसियों के कड़े शिकंजे ने उनके विदेश में छिपने के सारे रास्ते धीरे-धीरे बंद कर दिए हैं।
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वानातू देश का फर्जी पासपोर्ट और छत्तीसगढ़ से क्या है कनेक्शन?
जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों और पुख्ता सबूतों के अनुसार, रवि उप्पल और सौरभ चंद्राकर दोनों ने मिलकर दक्षिण प्रशांत महासागर में स्थित एक छोटे से द्वीप देश 'वानातू' से फर्जी तरीके से पासपोर्ट हासिल कर लिए थे। अधिकारियों का यह भी दावा है कि ये दोनों छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई शहर के ही रहने वाले हैं और वहीं से अपने आपराधिक साम्राज्य की जड़ें मजबूत कर रहे थे। प्रवर्तन निदेशालय ने अक्तूबर 2023 में ही अपनी चार्जशीट में रवि उप्पल का नाम शामिल कर दिया था, जिसमें साफ तौर पर कहा गया था कि वह अपराध से भारी मात्रा में अवैध कमाई जुटा रहा था और पैसे की हेराफेरी व छुपाने के काले कारोबार में सीधे तौर पर लिप्त था।
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ब्यूरोक्रेट्स और नेताओं तक कैसे पहुंचती थी घूस की रकम?
जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि रवि उप्पल दुबई में बैठकर इस पूरे नेटवर्क के जरिए होने वाली काली कमाई और अवैध उगाही को मैनेज कर रहा था। आरोप है कि वह छत्तीसगढ़ के कई बड़े राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों तक हवाला के जरिए रिश्वत और लाइजनिंग का पैसा पहुंचाने का काम देखता था। इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए उसने चंद्रभूषण वर्मा नाम के एक पुलिस सहायक उप-निरीक्षक और उसके कुछ खास साथियों का इस्तेमाल किया था। रायपुर की एक विशेष अदालत ने हाल ही में सौरभ चंद्राकर को आठ दिन की सीबीआई कस्टडी में भेज दिया है, जिससे पूछताछ के बाद इस सिंडिकेट के कई और बड़े चेहरों के बेनकाब होने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।
80 हजार करोड़ के इस सट्टा साम्राज्य का कैसे हुआ था पर्दाफाश?
जांच एजेंसियों के मुताबिक, महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) एप की शुरुआत साल 2019 और 2020 के दौरान की गई थी, लेकिन साल 2020 में कोरोना महामारी के लॉकडाउन के दौरान इसका यूजर बेस बहुत तेजी से और अचानक बढ़ा था। यह पूरा अवैध धंधा इंटरनेट पर हजारों अलग-अलग पैनल्स के जरिए चलाया जा रहा था, जिसने साल 2019 से लेकर अब तक कुल 80,000 करोड़ रुपये के आसपास के अपराध से जुड़े अवैध धन का सृजन किया है। भारत सरकार और तमाम केंद्रीय एजेंसियां अब यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि देश के करोड़ों युवाओं को ठगने वाले इस गिरोह के दोनों मुख्य सरगनाओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए।