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ईएसआई एक्ट में शरीर के अंदरूनी अंगों को भी करें कवर: मद्रास हाईकोर्ट

Thu, 18 Apr 2019 11:53 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Priyesh Mishra Updated Thu, 18 Apr 2019 11:53 AM IST
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Madras High Court Says, covers internal organs of body in ESI Act
मद्रास उच्च न्यायालय (फाइल फोटो)
मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि 71 साल पुराने कर्मचारी राज्य बीमा कानून में संशोधन कर कर्मचारियों को लगने वाली अंदरूनी अंगों की चोटों को भी इस एक्ट के तहत शामिल करना चाहिए।
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कोर्ट ने यह सुझाव राज्य सरकार की अपील पर दिया है। काम के दौरान हुए दुर्घटना में एक कर्मचारी ने किडनी गंवा दी थी। जिसके लिए ईएसआईसी कोर्ट ने पीड़ित को दो लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था।  
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सरकार का तर्क था कि अंदरूनी चोटों के लिए ईएसआई एक्ट में कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए, 2 लाख मुआवजे का मामला बनता ही नहीं है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान मुआवजे की रकम को बढ़ाकर 2 लाख 15 हजार रुपये कर दिया। कोर्ट ने कहा, '1948 में नीति बनाने वालों ने केवल बाहरी अंगों की चोटों पर ध्यान दिया। ऐसे में ईएसआई कानून में संशोधन कर अंदरूनी अंगों की चोटों और उनसे होने वाली अपंगता की स्थिति में कर्मचारी को लाभ देने के लिए कानून में संशोधन जरूरी है।'
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कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत में ज्यादातर लाेग श्रम कार्याें में लगे हैं। इन्हें काम के दाैरान अंदरूनी चाेटें लगने का खतरा ज्यादा रहता है। काेर्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि अंदरूनी अंगाें काे पहुंचने वाली चाेटें भी कानून में शामिल की जानी चाहिए। 

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