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बच्चे न वेटलिफ्टर हैं, न बस्ता ढोने वाले : मद्रास हाईकोर्ट

Wed, 30 May 2018 08:01 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Updated Wed, 30 May 2018 08:01 AM IST
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Madras High Court says Children are not a weightlifter nor schoolbags loaded containers
मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने छोटे बच्चों पर से बस्ते और होमवर्क का बोझ हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बच्चे न तो वेटलिफ्टर हैं और न ही किताबों से भरे स्कूल बैग ढोने वाले। अदालत ने केंद्र सरकार से सभी राज्यों को पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के बस्ते का भार घटाने और होमवर्क न देने का निर्देश जारी करने को कहा है। कोर्ट केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से चार हफ्ते में अनुपालना रिपोर्ट देने को कहा है।

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अपने अंतरिम आदेश में अदालत ने राज्य सरकारों से कहा कि वह सुनिश्चित करें कि बस्ते का भार बच्चों के भार से 10 फीसदी से ज्यादा न हो। न्यायमूर्ति एन किरुबकरण ने तेलंगाना और महाराष्ट्र सरकारों के आदेश का हवाला देते हुए केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वह सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को ‘चिल्ड्रन स्कूल बैग पॉलिसी’ को लागू करने का निर्देश दे।
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कोर्ट ने सीबीएसई, बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और एसोसिएशन ऑफ मैनेजमेंट ऑफ प्राइवेट स्कूल को निर्देश दिया है कि वह एनसीईआरटी किताबें ही पढ़ने को कहें और उन्हीं का इस्तेमाल करें। जस्टिस किरुबकरण ने याचिकाकर्ता एवं वकील एम पुरुषोत्तमन की याचिका यह फैसला सुनाया।
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पहली-दूसरी के बच्चे केवल भाषा और गणित पढ़ेंगे

कोर्ट ने राज्य बोर्डों के स्कूलों में इस फैसले को लागू करने को कहा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि पहली और दूसरी कक्षा तक के बच्चों को भाषा और गणित के अलावा कोई और विषय न पढ़ाने को कहा। जबकि तीसरी से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों भाषा, ईवीएस और गणित की पढ़ाई कराने को कहा।
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