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फैसला: मद्रास हाईकोर्ट ने कहा- अदालती आदेश या एफआईआर की राह न देखें, सीधे कार्रवाई करें
Fri, 10 Jun 2022 05:54 AM IST
Jeet Kumar
एजेंसी, मदुरै।
एजेंसी, मदुरै।
Published by: Jeet Kumar
Updated Fri, 10 Jun 2022 05:54 AM IST
सार
हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस बी पुगलेंथी ने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों और चैनलों या यूजर्स में अनुबंध होते हैं। इसका उल्लंघन करने वालों के वीडियो हटाना व चैनल ब्लॉक करना कंपनियों का कर्तव्य है।
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मद्रास हाई कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
फेसबुक, ट्विटर, यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अगर किसी चैनल या अकाउंट से वीडियो देश के कानूनों या खुद कंपनियों के नियमों का उल्लंघन करे तो कंपनियां खुद इन्हें हटाएं और चैनल या अकाउंट ब्लॉक करें। इसके लिए एफआईआर दर्ज होने या अदालत से आदेश आने का इंतजार न करें। ये निर्देश मद्रास हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में सोशल मीडिया कंपनियों को दिए।
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हाईकोर्ट की मदुरै पीठ के जस्टिस बी पुगलेंथी ने आदेश में कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों और चैनलों या यूजर्स में अनुबंध होते हैं। इसका उल्लंघन करने वालों के वीडियो हटाना व चैनल ब्लॉक करना कंपनियों का कर्तव्य है।
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इसलिए देना पड़ा ऐसा आदेश
कोर्ट में साइबर अपराध शाखा ने बताया था कि कई मामलों में पीड़ित शिकायतकर्ता एफआईआर दर्ज नहीं करवाते। एफआईआर हो जाए, तब भी कंपनियां कोर्ट का आदेश मांगती हैं। इतना सब करने पर भी अक्सर सोशल मीडिया कंपनियां किसी उल्लंघनकर्ता यूजर या आपत्तिजनक सामग्री को केवल अस्थायी रूप से ही ब्लॉक करती हैं। स्थायी कार्रवाई के लिए फिर से अदालती आदेश मांगती हैं।
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अदालत ने ये भी कीं टिप्पणियां
बताया क्या हैं अपराध : असलहा, बम, शराब आदि बनाने के वीडियो, अपमानजनक टिप्पणियों से भरे वीडियो, पोर्नोग्राफिक सामग्री के वीडियो, हिंसात्मक वीडियो, आदि इंटरनेट पर खूब पोस्ट हो रहे हैं। ये सभी अपराध हैं।
बच्चों के दिमाग में उथल-पुथल मच रही : मौजूद पीढ़ी इनसे बुरे रूप में प्रभावित हो रही है, बच्चों के दिमाग में उथल-पुथल हो रही है, मानसिक विकास कमजोर हो रहा है।
लोग खुद करें रिपोर्ट
न्याय मित्र केके रामाकृष्णन ने बताया कि यूट्यूब व अन्य कंपनियां यूजर्स के लिए गाइडलाइन बनाती हैं। कोई सामग्री इनके खिलाफ है, तो कोई भी उसे रिपोर्ट कर सकता है। इस पर कंपनी चेतावनी दे कर अकाउंट बंद कर सकती है।
मामला यह था
एक यूट्यूबर दुरईमुरुगन पांडियन सत्तई ने तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन के खिलाफ अपने वीडियो में आपत्तिजनक बातें कही। राज्य सरकार ने केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया। इस पर दुरुईमुरुगन ने जमानत याचिका दायर की।
सरकार ने कहा- जमानत पर था, फिर भी किया अपराध
सरकार ने याचिका का विरोध कर कहा कि उसने अपराध किया है। वह सोशल मीडिया पर लगातार झूठ फैलाता है, उसके खिलाफ कई केस दर्ज हैं। इनमें वह जमानत पर है, फिर भी उसने नया अपराध किया।
याची का बचाव-पैसा कमाने के लिए सब ऐसा कर रहे हैं
अपने बचाव में दुरईमुरुगन ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस प्रकार की सामग्री बनाने वाला वह अकेला नहीं है। कई लोग भड़काने वाली सामग्री पोस्ट कर रहे हैं ताकि ज्यादा लोग इन्हें देखें, इससे यूट्यूब से कमाई बढ़ती है।