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मद्रास हाईकोर्ट ने एक मंदिर के 'भ्रष्ट' अधिकारी को ‘भारी मन’ से दी राहत
Tue, 15 Jun 2021 03:03 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, चेन्नई
एजेंसी, चेन्नई
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 15 Jun 2021 03:03 AM IST
सार
- एक मंदिर के ‘भ्रष्ट’ अधिकारी की वजह से मंदिर को भारी राजस्व की हानि हुई
- मद्रास हाईकोर्ट ने नियमों के प्रावधान को देखते हुए ‘भ्रष्ट’ अधिकारी को राहत दी।
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मद्रास हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
मद्रास हाईकोर्ट ने एक मंदिर के ‘भ्रष्ट’ अधिकारी को भारी मन से राहत प्रदान की। इस अधिकारी की वजह से मंदिर को भारी राजस्व की हानि हुई। जस्टिस एस वैद्यनाथन ने नियमों के प्रावधान को देखते हुए राहत दी।
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साथ ही भ्रष्ट अधिकारी का साथ देने के लिए उच्चाधिकारियों को फटकार लगाई। एक्जीक्यूटिव ऑफिसर ग्रेड-वन आर मुथुसामी ने तीन अगस्त 2020 को स्वैच्छिक सेवानिवृत्त योजना के तहत सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन किया था और नियम के अनुसार, इसे तीन महीने के अंदर मंजूर या खारिज किया जाना चाहिए था। इसके लिए आखिरी तारीख चार नवंबर थी, लेकिन उसके आवेदन को पांच नवंबर 2020 को खारिज किया। संबंधित अधिकारियों ने आवेदन पर 12 नवंबर को हस्ताक्षर किए और उसे 31 अक्तूबर 2020 को सेवानिवृत्त होने की अनुमति दी गई।
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उसने पांच नवंबर के आदेश को रद्द और अपनी सेवानिवृत्त को सेवा से 31 अक्तूबर ही मानने तथा सेवानिवृत्त के बाद मिलने वाली सुविधाओं की बहाली के लिए याचिका दायर की। संबंधित नियमों को ध्यान में रखते हुए जज ने मुथुसामी की याचिका को मंजूर करते हुए पांच नवंबर के आदेश को खारिज कर दिया।
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जज ने अपने आदेश में कहा कि मुथुसामी द्वारा कई गंभीर वित्तीय अनियमितताएं बरती गई लेकिन विभाग को आखिरी समय तक उसके आवेदन को रद्द करने के लिए इंतजार नहीं करना चाहिए था। जज ने कहा कि बिना उच्चाधिकारियों की मदद के याचिकाकर्ता के लिए वित्तीय अनियमितताएं करना संभव नहीं था। उनकी इस हरकत से मंदिर को संपत्ति और राजस्व का नुकसान पहुंचा।