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राजीव हत्याकांड में दोषी नलिनी की रिहाई से मद्रास हाईकोर्ट का इनकार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मद्रास
Updated Fri, 27 Apr 2018 04:14 PM IST
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मद्रास हाईकोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में दोषी नलिनी की समयपूर्व रिहाई से इनकार कर दिया। कोर्ट ने उसकी याचिका पर सुनवाई के बाद इस हफ्ते की शुरुआत में फैसला सुरक्षित रख लिया था। नलिनी को इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रही है।
हाईकोर्ट में जस्टिस केके शशिधरन और आर सुब्रह्मण्यम की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ नलिनी की याचिका पर 24 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
नलिनी ने अपनी समयपूर्व रिहाई के लिए संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य सरकार द्वारा 1994 में शुरू की गई एक स्कीम का हवाला दिया था। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले में एक याचिका के लंबित रहने के कारण इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में अपने एक आदेश में कहा था कि सीआरपीसी की धारा 435 के तहत सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा देखे जा रहे मामलों में समयपूर्व रिहाई के लिए केंद्र की सहमति जरूरी है।
एकल जस्टिस का आदेश बरकरार रखते हुए खंडपीठ ने कहा कि नलिनी को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर फैसला आने तक इंतजार करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि खंडपीठ के समक्ष बहस के दौरान नलिनी के वकील राधाकृष्णन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस मामले से कोई संबंध नहीं है क्योंकि उनकी मुवक्किल ने अनुच्छेद 161 के तहत समय पूर्व रिहाई की मांग की है।
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हाईकोर्ट में जस्टिस केके शशिधरन और आर सुब्रह्मण्यम की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले के खिलाफ नलिनी की याचिका पर 24 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
नलिनी ने अपनी समयपूर्व रिहाई के लिए संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत राज्य सरकार द्वारा 1994 में शुरू की गई एक स्कीम का हवाला दिया था। राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में संबंधित मामले में एक याचिका के लंबित रहने के कारण इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 2016 में अपने एक आदेश में कहा था कि सीआरपीसी की धारा 435 के तहत सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों द्वारा देखे जा रहे मामलों में समयपूर्व रिहाई के लिए केंद्र की सहमति जरूरी है।
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एकल जस्टिस का आदेश बरकरार रखते हुए खंडपीठ ने कहा कि नलिनी को सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले पर फैसला आने तक इंतजार करना होगा। इसके साथ ही अदालत ने उसकी अपील खारिज कर दी। उल्लेखनीय है कि खंडपीठ के समक्ष बहस के दौरान नलिनी के वकील राधाकृष्णन ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इस मामले से कोई संबंध नहीं है क्योंकि उनकी मुवक्किल ने अनुच्छेद 161 के तहत समय पूर्व रिहाई की मांग की है।
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