Madhya Pradesh: संघ के नाम पर मोदी-शाह ने लगाई मुहर, मोहन यादव को सबसे पहले RSS ने दी बधाई
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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी कौन संभालेगा, इसे लेकर कई दिनों से जारी सस्पेंस आज खत्म हो गया। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम पर सहमति बन गई है। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। मोहन यादव को संघ का करीबी बताया जाता है। यादव उज्जैन दक्षिण से सीट से 2013, 2018 और 2023 में चुनाव जीत चुके हैं।
जानकारी के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव विधायक दल की बैठक में किया था। इस एलान के साथ ही सभी कयासों पर विराम लग गया है। अब सूबे की कमान मोहन यादव के हाथों में होगी। सूत्रों का कहना है कि मोहन यादव का नाम आरएसएस ने ही दिल्ली हाईकमान को प्रस्तावित किया था। इसके बाद इनके नाम पर सहमति बन गई। नाम की घोषणा से बाद सबसे पहले संघ ने ही यादव को बधाई दी। उन्होंने भरे समारोह में फोन उठा कर बधाई स्वीकार भी की।
मध्य प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनमें जगदीश देवड़ा और राजेश शुक्ला शामिल है। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं और विंध्य के कद्दावर नेता के तौर पर उन्हें जाना जाता है। राजेंद्र शुक्ला चार बार कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। अपने चुनावी कैरियर में वह अब तक अजेय रहे हैं।
यादव का विवादों से भी रहा है नाता
मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री का पद संभाल चुके हैं। वह साल 2013 में पहली बार विधायक बन कर आए थे। मोहन यादव एबीवीपी और संघ से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। साल 1984 में मोहन यादव छात्र संघ के अध्यक्ष और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री चुने गए थे।
मध्यप्रदेश के नए सीएम मोहन यादव का विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। साल 2020 में उपचुनाव के समय असंयमित भाषा के प्रयोग के कारण चुनाव आयोग ने उनपर एक दिन के लिए प्रचार करने पर प्रतिबंधित लगा दिया था।