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खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की रीढ़ है यह खास सेंटर, अब तक दे चुका है तीन लाख इंटेलिजेंस इनपुट

Sat, 02 Nov 2019 06:50 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Sat, 02 Nov 2019 06:50 PM IST
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MAC is a backbone of indian security and intelligence agencies, issued 3 lakh terror alerts
सुरक्षा बलों ने मेंढर सेक्टर में आतंकी घटना को किया नाकाम, ध्वस्त किया ठिकाना, भारी गोला बारूद बरामद - फोटो : फाइल
देश की विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों में तालमेल की जिम्मेदारी रखने वाला मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) आतंकी हमलों, तोड़फोड़ की अन्य गतिविधियों, तस्करी और नकली करेंसी जैसे विभिन्न अपराधिक मामलों से जुड़े 3.15 लाख इंटेलिजेंस इनपुट जारी कर चुका है। इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) से संचालित मैक ने समय-समय पर जब इतनी बड़ी संख्या में इनपुट दिये, तो सुरक्षा एजेंसियां भी मुस्तैद बनी रहीं। नतीजा, आतंकियों के हमलों व दूसरी बड़ी वारदातों को समय रहते नाकाम किया जा सका।
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मैक की तरफ से जारी इनपुट में पीएम नरेंद्र मोदी, आर्मी चीफ बिपिन रावत और दूसरे बड़े अफसर, रॉ चीफ सामंत गोयल और क्रिकेटर विराट कोहली सहित कई हस्तियों पर आतंकी हमले के इनपुट आते रहे हैं। इसके अलावा चुनाव, त्योहार या अन्य किसी बड़े आयोजन पर भी आतंकी हमले के खुफिया अलर्ट मिले हैं।

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मुंबई हमले के बाद मैक का गठन

बता दें कि मुंबई में हुए आतंकी हमले 26/11 की घटना के बाद देश में पहली बार मैक का गठन किया गया था। मैक ने पूर्ण रूप से जून 2012 में काम करना शुरू किया। इसका मकसद संभावित आतंकी हमलों के बारे में पहले ही सुराग लगाने और उन्हें अंजाम देने वालों को पकड़ना था। साथ ही, मैक से अपराध की दूसरी वारदातों के बारे में भी संबंधित एजेंसियों को समय रहते जानकारी मिल जाती है।

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मैक में आईबी, रॉ, तीनों सेनाओं की इंटेलिजेंस इकाई, सभी अर्धसैनिक बल, वित्त मंत्रालय से जुड़ी एजेंसी जैसे 'ईडी, डीआरआई, आयकर' और आरपीएफ सहित करीब 26 संगठन शामिल हैं। इन सभी संगठनों के प्रतिनिधि रोजाना नियमित तौर पर बैठक कर सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था से जुड़ी सूचनाएं आपस में साझा करते हैं।

सी-मैक प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू

मैक की इस बैठक में ही तय होता है कि किसका खुफिया अलर्ट कितना प्रभावी है। उसका वजन कितना है और जानकारी का स्रोत क्या है, आदि बातों का पता लगाकर सूचना को पुख्ता किया जाता है। जानकारी पक्की होते ही संबंधित एजेंसी को उस पर लगा दिया जाता है। कई बार ऐसा भी देखने को मिलता है कि किसी एक सूचना पर सिंगल एजेंसी काम करती है, तो कुछ ऐसे अत्यंत संवेदनशील इनपुट भी होते हैं, जिन्हें लेकर कई एजेंसियों को दौड़ाया जाता है।

यहां तक कि इसमें कई राज्यों की पुलिस भी शामिल रहती है। देश में आतंकी घटनाओं और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए अब 'क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर' (सी-मैक) के प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो गया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का दावा है कि इस साल के अंत तक देश के सभी राज्यों में पूर्णतया सी-मैक सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। हालांकि बहुत से राज्य इस पर प्रारंभिक तौर से काम करने लगे हैं।

मैक का इनपुट होता है अहम

केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि इस साल 31 मार्च तक मैक ने 3.15 लाख इनपुट जारी किए हैं। इन पर चर्चा करने के लिए नोडल अफसरों की रोजाना बैठक होती है। साथ ही फोकस ग्रुप में क्रॉस बॉर्डर टेररिज्म और इंसरजेंसी इन नॉर्थ ईस्ट आदि पर चर्चा की जाती है। जैसे ही कोई इनपुट पुख्ता होता है, तो उसे संबंधित केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी या राज्य पुलिस की विशेष शाखा के पास भेज देते हैं। पिछले एक साल के दौरान नोडल अफसरों की 367 बैठक हुईं, जबकि राज्य स्तर पर एस-मैक की 316 बैठक हो चुकी हैं। मैक की तरफ से जैसे ही किसी एजेंसी के पास कोई इनपुट भेजा जाता है, तो उसके बाद वह मुस्तैद हो जाती है।

हर मामले की गहराई से छानबीन होती है। जैसे, पिछले कई वर्षों में दिल्ली मेट्रो या दूसरे शहरों पर आतंकी हमला होने के अलर्ट मिले हैं। मैक ने समय पर ऐसी सूचनाएं दूसरी एजेंसियों के साथ साझा कर आतंकी घटनाओं को टाल दिया। दिल्ली में इंडिया गेट और बड़े बाजारों पर आतंकी हमलों के दर्जनों इनपुट मिल चुके हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता से अधिकांश इनपुट को असफल कर दिया गया।

नेशनल मेमोरी बैंक में हैं काउंटर टेररिज्म की फाइल्स 

मैक के अंतर्गत ही नेशनल मेमोरी बैंक बनाया गया है। इसमें काउंटर टेररिज्म से जुड़ी करीब 16,170 फाइलें सुरक्षित रखी गई हैं। यह बैंक क्लासिफाइड इलेक्ट्रॉनिक लाइब्रेरी का हिस्सा है। टेररिज्म की फाइलों को थ्रैट मैनेजमेंट सिस्टम के साथ लिंक किया गया है। इसका फायदा यह रहता है कि एजेंसियां आतंकवाद से जुड़े किसी पुराने मामले का लिंक ताजा जानकारी के साथ जोड़कर किसी निष्कर्ष पर पहुंच सकती हैं। जैसे देश में तीन-चार बड़े आतंकी संगठन ही हमलों की धमकी या कोई वारदात करते हैं।

आतंकी हमले की जांच के बाद संबंधित एजेंसी अदालत के समक्ष जो आरोप पत्र दाखिल करती है, उसका तुरंत पता लगाया जा सकता है। किसी दूसरे मामले में कोई संदर्भ चाहिए, तो उस बाबत फाइलें नहीं खंगालनी पड़ती हैं। मात्र एक क्लिक से सारी जानकारी सामने आ जाती है। अगर किसी मामले में डोजियर देना है, तो उस वक्त नेशनल मेमोरी बैंक की मदद बहुत कारगर साबित होती है।

सी-मैक में देश के हर अपराधी का डाटा

अगर घटनास्थल पर भीड़ जमा है, और कोई अपराधी भी उसी भीड़ में छुपा है, तो पुलिस के लिए उसका पता करना बड़ा मुश्किल होता है। अगर घटना का कोई वीडियो बना है तो वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे को क्राइम डाटा से मिलाना नामुमकिन होता है। संगठित अपराध को अंजाम देने वाले अपराधी अकसर पुलिस की इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं।

सी-मैक से घटनास्थल पर बने किसी भी वीडियो का मिलान पुलिस क्राइम डाटा से तुरंत संभव होगा। मान लीजिए वीडियो में हजारों आदमी हैं, तो उन सबका पता कैसे लगाया जाए। लेकिन जल्द ही यह संभव होगा। सी-मैक में देश के हर छोटे-बड़े अपराधी का डाटा और उनके फोटो मौजूद रहेंगे।

फोटो से लग जाएगा पता

वारदात से जुड़ी अगर कोई क्लिप, फुटेज या वीडियो है, तो उसमें मौजूद सभी लोगों की जानकारी उनके चेहरे से पता चल जाएगी। अगर कोई व्यक्ति पहले किसी भी तरह के अपराध में शामिल रहा है या जेल गया है या कोर्ट से लताड़ लगी है या किसी मामले में आरोपी है तो कंप्यूटर स्क्रीन पर उसके चेहरे के सामने अलर्ट दिखेगा। यह सब जानकारी पुलिस जांच में रामबाण का काम करेगी।

चेन स्नैचर, वाहन चोर गिरोह, लूटमार गिरोह, बैंक फ्रॉड, कॉल सेंटर के जरिए लोगों को चूना लगाने वाले गिरोह, इन सभी का पता लगाना आसान हो जाएगा। इनका फोटो बता देगा कि इन्होंने पहले कहां, कब और किस राज्य में वारदात की है।

सी-मैक में यह सब शामिल रहेगा

एफआईआर, क्राइम डिटेल, कोर्ट सरेंडर फॉर्म, प्रॉपर्टी सर्च और जब्त, अपील फॉर्म का नतीजा, मिसिंग पर्सन डिटेल, अन-आइडेंटिफाइड पर्सन रजिस्ट्रेशन, आइडेंटिफाइड डेड बॉडी, गैंग प्रोफाइल फॉर्म, गैंग क्रिमिनल एक्टिविटी एंड मेंबर फॉर्म, लॉस्ट प्रॉपर्टी डिटेल, मेडिको लीगल केस, फॉरनर रजिस्ट्रेशन फॉर्म, मिसिंग व्हीकल, प्रोक्लेम ऑफेंडर, फिंगर प्रिंट एनालिसिस, रिक्वेस्ट फॉर लुकआउट सर्कुलर, लेटर रोगेटरी रिक्वेस्ट, समन वारंट, जेल डिटेल, आर्म्स लाइसेंस, रिट पिटिशन, सीनियर सिटिजन, सिंगल वुमन, ड्रग पैड्लर्स, सेक्स ऑफेंडर और विलेज क्राइम डिटेल आदि जानकारी शामिल रहेगी।
 

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