चिंताजनक: अस्थमा के एक तिहाई मामलों में प्रदूषण के महीन कण जिम्मेदार, दुनिया की करीब चार फीसदी आबादी अस्थमा से
शोधकर्ताओं ने करीब ढाई करोड़ लोगों से जुड़े आंकड़ों का गहराई से अध्ययन कर उनका विश्लेषण किया है। इसमें पाया गया है कि लम्बे समय तक प्रदूषण के बेहद महीन कणों पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से न केवल बच्चों बल्कि वयस्कों में भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है।
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वायु प्रदूषण फेफड़ों को बुरी तरह प्रभावित करता है। यह अस्थमा और क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज(सीओपीडी) को बढ़ाने के साथ श्वसन तंत्र के संक्रमण और फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ाता है। वायु प्रदूषण से दिल के दौरे का खतरा भी बढ़ता है। इससे कोरोनरी धमनी रोग और आघात होता है। एक वैश्विक अध्ययन से पता चला है कि अस्थमा के करीब एक तिहाई मामले लम्बे समय तक प्रदूषण के महीन कणों के सम्पर्क में रहने से जुड़े हैं। पीएम 2.5 में हर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि के साथ बच्चों में अस्थमा का खतरा 21.4 फीसदी और वयस्कों में 7.1 फीसदी बढ़ जाता है।
यह जानकारी मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर केमिस्ट्री के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं द्वारा किए एक नए अध्ययन में सामने आई है। शोधकर्ताओं ने करीब ढाई करोड़ लोगों से जुड़े आंकड़ों का गहराई से अध्ययन कर उनका विश्लेषण किया है। इसमें पाया गया है कि लम्बे समय तक प्रदूषण के बेहद महीन कणों पीएम 2.5 के संपर्क में रहने से न केवल बच्चों बल्कि वयस्कों में भी अस्थमा का खतरा बढ़ जाता है। पिछले शोधों में इस पर मिलेजुले नतीजे सामने आए थे। अध्ययन में इस बात की भी पुष्टि की गई है कि बच्चे, वयस्कों की तुलना में पीएम 2.5 से जुड़े अस्थमा के प्रति बहुत ज्यादा ज्यादा संवेदनशील होते हैं। बचपन में फेफड़े और प्रतिरक्षा प्रणाली पूरी तरह विकसित नहीं होती इस कारण बच्चे प्रदूषण के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। वायु प्रदूषण के कारण श्वसन मार्ग में ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन हो जाता है। प्रदूषण प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित करता है। इसकी वजह से एलर्जी के प्रति संवेदनशीलता भी बढ़ जाती है। इन सभी कारणों से अस्थमा का प्रसार तेज होता है। अध्ययन के अनुसार निम्न और मध्यम आय वाले देशों में लोग वायु प्रदूषण के संपर्क में अधिक आते हैं। इन्हें पीएम 2.5 का अधिक सामना करना पड़ता है।
अस्थमा के 30% नए मामले पीएम 2.5 से जुड़े
दुनियाभर में अस्थमा के लगभग 30% नए मामले पीएम 2.5 से जुड़े हैं। इनमें से 60% मामले बच्चों से जुड़े थे। वर्तमान में दुनिया की करीब चार फीसदी आबादी अस्थमा से पीड़ित है। इसके अलावा प्रतिवर्ष अस्थमा के तीन करोड़ से अधिक नए मामले सामने आ रहे हैं। मौजूदा समय में अस्थमा एक लाइलाज बीमारी है जो जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है।