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लोकसभा उपचुनावों का विश्लेषण : मंडी लोकसभा सीट क्यों हारी भाजपा, दादरा व नगर हवेली में शिवसेना को कैसे मिली जीत? पढ़िए तीनों सीटों की डिटेल रिपोर्ट

Tue, 02 Nov 2021 09:41 PM IST
Himanshu Mishra हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 02 Nov 2021 09:41 PM IST
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सार
मंडी में कांग्रेस की प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने जीत हासिल की है, जबकि खंडवा में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल सांसद चुने गए हैं। दादरा एवं नगर हवेली से पहली बार शिवसेना के किसी प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
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Loksabha by election 2021 results Live updates; Mandi loksabha himachal pradesh, khandwa madhya pradesh loksabha, dadar and nagar haveli loksabha result
मंडी से कांग्रेस की प्रतिभा सिंह, खंडवा से भाजपा के ज्ञानेश्वर पाटिल और दादर एवं नगर हवेली से शिवसेना की कलावती ने जीत हासिल की। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

30 अक्तूबर को देश के तीन लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजे आ गए हैं। इसमें हिमाचल प्रदेश की मंडी, मध्य प्रदेश का खंडवा और दादर एवं नगर हवेली संसदीय सीट के लिए उपचुनाव हुए थे। मंडी में कांग्रेस की प्रत्याशी प्रतिभा सिंह ने जीत हासिल की है, जबकि खंडवा में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल सांसद चुने गए हैं। दादरा एवं नगर हवेली से पहली बार शिवसेना के किसी प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। यहां शिवसेना के बैनर तले चुनाव लड़ने वाली कलावती डेलकर ने भाजपा के प्रत्याशी को हराया है। पढ़िए तीनों सीटों की डिटेल रिपोर्ट...


1. दादर एवं नगर हवेली 
नतीजे क्या रहे? : शिवसेना की प्रत्याशी कलावती डेलकर ने दादरा एवं नगर हवेली संसदीय उपचुनाव से जीत दर्ज की है। कलावती यहां 7 बार के निर्दलीय सांसद दिवंगत मोहन डेलकर की पत्नी हैं। मोहन डेलकर की पिछले साल संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। कलावती को 59.5% वोट मिले जबकि भाजपा के प्रत्याशी ने 33.68% वोट हासिल किया। 2.79% लोगों को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं आया। इन लोगों ने नोटा का बटन दबाया। कांग्रेस के खाते में 3.10% वोट गए।


शिवसेना क्यों जीती? : राजनीतिक विशेषज्ञ और वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव बताते हैं कि दादरा एवं नगर हवेली संसदीय क्षेत्र में शुरू से ही मोहन डेलकर का दबदबा रहा है। अब उनके निधन के बाद उनकी पत्नी को टिकट देकर शिवसेना ने अच्छा गेम खेला।
कलावती को उपचुनाव में पति की मौत की सहानुभूति मिली और वह भारी मतों से जीतने में कामयाब हो गईं। कलावती अगर पति की तरह निर्दलीय भी चुनाव लड़ जाती तो वह जीतने में कामयाब होतीं। ऐसे में शिवसेना ने उन्हें टिकट देकर पहली बार महाराष्ट्र के बाहर किसी दूसरे राज्य में जीत हासिल करने का तमगा भी ले लिया। ये शिवसेना का प्लस पॉइंट रहा।   

2. हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट
नतीजे क्या रहे? : 
मंडी संसदीय सीट पर 30 अक्टूबर को हुए मतदान में कुल 7 लाख 42 हजार 771 वोटरों ने वोट दिए थे। इनमें से कांग्रेस की प्रतिभा सिंह को कुल 365650 वोट मिले। यह कुल वोटिंग का 49.14% रहा। इसी तरह भाजपा कैंडिडेट खुशहाल सिंह को कुल 356884 वोट मिले जो वोटिंग का 48.14% रहा। 1.68% लोगों ने नोटा का चयन किया। मतलब उन्हें कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं था। अन्य के खाते में 1.03% वोट गए। 

कांग्रेस क्यों जीती? : आंकड़ों का एनालिसिस करें तो साफ होता है कि नोटा ने ही भाजपा का खेल बिगाड़ दिया। 2019 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों  से तुलना करें तो भाजपा के वोट शेयर में 20.96% की भारी कमी आई है। 2019 में भाजपा के प्रत्याशी रामस्वरुप शर्मा को 68.7% वोट मिले थे। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस प्रत्याशी आश्रय शर्मा ने 25.7% वोट हासिल किया था। तब नोटा का बटन केवल 0.5% लोगों ने दबाया था।

हिमाचल की इस सीट पर भाजपा को कांग्रेस ही टक्कर देती आई है। 2019 चुनाव में भाजपा के टिकट पर जीत हासिल करने वाले रामस्वरुप शर्मा की इसी साल 17 मार्च को संदिग्ध परिस्थिति में मौत हो गई थी। इसलिए  उपचुनाव में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह को मैदान में उतारकर राजनीतिक दांव चल दिया था और इसमें वह सफलता भी मिली। राजनीतिक विशेषज्ञ अशोक वाजपेयी बताते हैं हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से कई मामलों में लोगों की नाराजगी है। इसमें बढ़ती महंगाई ने तड़का का काम कर दिया। 

3. मध्य प्रदेश का खंडवा लोकसभा
नतीजे क्या रहे? : खंडवा लोकसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल ने 81 हजार 701 वोट से जीत हासिल की। कांग्रेस प्रत्याशी यहां दूसरे नंबर पर रहे। वोटिंग प्रतिशत पर नजर डालें तो यहां भाजपा को 49.85% वोट मिले और कांग्रेस ने 43.38% वोट हासिल किए। अन्य प्रत्याशियों को 5.69% वोट मिले। 1.08% लोगों ने नोटा का बटन दबाया।   

2019 लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान उर्फ नंदू भैया ने 57.1% वोट हासिल किया था। दूसरे नंबर पर रहे कांग्रेस के प्रत्याशी अरुण सुभाष को 38.5% वोट से ही संतोष करना पड़ा था। पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार भाजपा का वोटिंग प्रतिशत कम हुआ है, वहीं कांग्रेस की स्थिति मजबूत हुई है। 

भाजपा क्यों जीती ? : मध्य प्रदेश के खंडवा लोकसभा क्षेत्र में 2014 से ही भाजपा का दबदबा है। 2014 और फिर 2019 में भाजपा के नंद कुमार सिंह चौहान ने यहां से जीत हासिल की थी। इसके पहले 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के अरुण सुभाषचंद्र यादव जीते थे। नंद कुमार सिंह की असामयिक निधन के बाद ये सीट खाली हुई थी।

राजनीतिक विशेषज्ञ महेश वर्मा बताते हैं कि नंद कुमार सिंह ने यहां के लोगों के दिल में जगह बना ली थी। ऐसे में काफी लोगों ने सहानुभूति में भाजपा को वोट दिया। इसके अलावा शिवराज सिंह चौहान के कामकाज ने भी भाजपा को साथ दिया। हालांकि वोटिंग प्रतिशत घटने से ये साफ होता है कि आने वाले दिनों में भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 
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