17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनाव में मतदाताओं ने प्रचंड बहुमत के साथ देश की बागडोर फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों में सौंपी है। भाजपा ने इस बार 2014 से भी बड़ी और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। ये पहली ऐसी गैर-कांग्रेसी पार्टी है जिसने लगातार दूसरी बार प्रचंड बहुमत से जीत हासिल की।
10 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में क्लीन स्वीप... अकेले दम पर 303 से अधिक सीटें... ये ऐतिहासिक कामयाबी सिर्फ पीएम मोदी के नाम पर हुई है। भाजपा के राष्ट्रवाद की लहर पर सवार मतदाताओं ने जातिवाद, परिवारवाद और तुष्टीकरण की राजनीति को ध्वस्त कर दिया।
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शीली दीक्षित (फाइल फोटो)
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भाजपा की इस सुनामी में 12 पूर्व मुख्यमंत्री अपनी पार्टी को जिताना तो दूर खुद अपनी ही सीट नहीं बचा पाए। इन पूर्व मुख्यमंत्रियों के नाम शीला दीक्षित, भूपेंद्र हुड्डा, हरीश रावत, मुकुल संगमा, एचडी देवगौड़ा, शिबू सोरेन, बाबूलाल मरांडी, दिग्विजय सिंह, नबाम तुकी, अशोक चव्हाण, सुशील शिंदे और जीतन राम मांझी हैं।
कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित दिल्ली की उत्तर पूर्वी दिल्ली सीट से लोकसभा चुनाव लड़ी थीं। उनके सामने भाजपा के मनोज तिवारी थे। यहां शीला को करारी हार का सामना करना पड़ा। तिवारी ने उनको करीब 3.63 लाख वोटों से हरा दिया।
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एचडी देवगौड़ा (फाइल फोटो)
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पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता एचडी देवगौड़ा अपनी सीट बचाने में असफल रहे। तुमकुर लोकसभा सीट से भाजापा के जेएस बासवराज ने उन्हें 13339 वोटों से हरा दिया।
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा (फाइल फोटो)
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पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा को हार का मुंह देखना पड़ा। हुड्डा सोनीपत लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे। भाजपा प्रत्याशी रमेशचंद्र कौशिक ने उन्हें करीब डेढ़ लाख वोटों से हरा दिया।
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दिग्विजय सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : Social Media
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा। भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने उन्हें हरा दिया। प्रज्ञा को 866482 और दिग्विजय को 501660 मत मिले।