भोपाल के महायुद्ध में साध्वी की जीत, इन कारणों से मिला जनता का समर्थन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भोपाल
भोपाल लोकसभा सीट पर शुरू से ही पूरे देश की नजर गड़ी हुई थी। देश के बेहद दिलचस्प मुकाबले वाली सीटों में से एक, भोपाल की सियासी लड़ाई में उम्मीदवार धर्म का सहारा लेते हुए साफ नजर आए थे। हिंदू वोटरों को लुभाने की कोशीश और हिंदुत्व के मुद्दे पर आधारित यहां के चुनाव में साध्वी प्रज्ञा पर लगे आतंकवाद के आरोपों को लेकर भी खूब बवाल हुआ था।
इन कारणों से भोपाल में जीतीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर-
- भाजपा ने यहां साध्वी प्रज्ञा को हिंदुत्व का प्रतीक के रूप में खड़ा किया था। ऐसे में वोटों का ध्रविकरण हो जाने के कारण हिंदू वोट भाजपा को मिले।
- साध्वी प्रज्ञा ने पार्टी के मुद्दों के अलावा जेल में अपने साथ हुए कथित अत्याचारों को चुनाव प्रचार के दौरान लोगों के साथ साझा कर के विक्टिम कार्ड खेला था। ऐसे में जनता की सहानुभूती भी वोट बन कर उनके हिस्से में आई।
- साध्वी प्रज्ञा भोपाल की स्थानीय निवासी हैं। जब्कि दिग्विजय सिंह मूलतः राघवगढ़ से आते हैं। ऐसे में साध्वी को यहां की स्थानीयता का भी पूरा फायदा मिला है।