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सपा-बसपा में सीटों का बंटवारा तो हुआ लेकिन इन 26 सीटों पर जमीनी हकीकत कुछ और
Fri, 22 Feb 2019 12:29 PM IST
Prabudhh Jain
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Fri, 22 Feb 2019 12:29 PM IST
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सपा-बसपा के बीच ये बंटवारा तो हो गया कि कौन किस सीट से लड़ेगा लेकिन कई सीटों पर पार्टी की प्राथमिकता चौंकाती है। कुल मिलाकर 26 सीटें ऐसी हैं जहां उस पार्टी को दम दिखाने का मौका मिलेगा जिसे साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में अपनी सहयोगी पार्टी से कम वोट मिले थे।
अमरोहा की बात करें तो सपा उम्मीदवार को 2014 में 3 लाख 70 हजार वोट मिले थे जबकि बसपा को महज 1 लाख 62 हजार मत लेकिन सीटों का ताजा बंटवारा दिखाता है कि अमरोहा सीट बसपा को दी गई है।
इसी तरह हरदोई सीट पर बसपा उम्मीदवार को 2 लाख 79 हजार वोट मिले तो सपा प्रत्याशी को उससे तीन हजार कम यानी 2 लाख 76 हजार। लेकिन ये सीट सपा के खाते में गई है।
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इन 26 सीटों में से 12 सीट ऐसी हैं जिन पर 2014 में सपा उम्मीदवार को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद बसपा को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। ठीक इसी तरह 14 सीट ऐसी हैं जिन पर सपा अपने उम्मीदवारों को टिकट दे सकती है बावजूद इसके कि 2014 में उसका प्रदर्शन इन सीटों पर बसपा से कमतर रहा था।
पहले कयास लगाए जा रहे थे कि 2014 में जिस सीट पर जो दूसरे स्थान पर रहा होगा, उसे सीट बंटवारे में तरजीह मिलेगी। अब जब कई सीटों पर ये सूरते हाल नजर नहीं आ रहा तो दोनों ही दलों में कुछ असंतोष उभर सकता है। ये भी संभव है कि अंसतुष्ट नेता शिवपाल यादव की नई नवेली पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का दामन थाम लें।
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अमरोहा की बात करें तो सपा उम्मीदवार को 2014 में 3 लाख 70 हजार वोट मिले थे जबकि बसपा को महज 1 लाख 62 हजार मत लेकिन सीटों का ताजा बंटवारा दिखाता है कि अमरोहा सीट बसपा को दी गई है।
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इसी तरह हरदोई सीट पर बसपा उम्मीदवार को 2 लाख 79 हजार वोट मिले तो सपा प्रत्याशी को उससे तीन हजार कम यानी 2 लाख 76 हजार। लेकिन ये सीट सपा के खाते में गई है।
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इन 26 सीटों में से 12 सीट ऐसी हैं जिन पर 2014 में सपा उम्मीदवार को ज्यादा वोट मिलने के बावजूद बसपा को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। ठीक इसी तरह 14 सीट ऐसी हैं जिन पर सपा अपने उम्मीदवारों को टिकट दे सकती है बावजूद इसके कि 2014 में उसका प्रदर्शन इन सीटों पर बसपा से कमतर रहा था।
पहले कयास लगाए जा रहे थे कि 2014 में जिस सीट पर जो दूसरे स्थान पर रहा होगा, उसे सीट बंटवारे में तरजीह मिलेगी। अब जब कई सीटों पर ये सूरते हाल नजर नहीं आ रहा तो दोनों ही दलों में कुछ असंतोष उभर सकता है। ये भी संभव है कि अंसतुष्ट नेता शिवपाल यादव की नई नवेली पार्टी प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) का दामन थाम लें।
इन सीटों पर सपा को तरजीह
सपा को 2014 में पांच सीटों पर जीत हासिल हुई थी- फिरोजाबाद, मैनपुरी, बदायूं, कन्नौज और आजमगढ़। दोनों दलों ने जो लिस्ट गुरुवार को जारी की है उसके मुताबिक अब भी इन पांचों सीटों पर सपा ही लड़ेगी। अखिलेश यादव खुद कन्नौज से लड़ सकते हैं। मुलायम सिंह मैनपुरी से लड़ने की इच्छा जता चुके हैं लेकिन फिलहाल मैनपुरी में उनके पौत्र तेजप्रताप सिंह यादव सांसद हैं। 2014 में बसपा एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। न सिर्फ यूपी में बल्कि पूरे देश में।
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), फर्रुखाबाद, गाजीपुर और लालगंज में सपा 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी लेकिन इस बार इन पर बसपा अपना उम्मीदवार उतारेगी।
2018 के उपचुनाव में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में दमखम दिखाने वाले सपा-बसपा गठबंधन में से इन सीटों पर सपा चुनाव लड़ सकेगी।
गौतम बुद्ध नगर (नोएडा), फर्रुखाबाद, गाजीपुर और लालगंज में सपा 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी लेकिन इस बार इन पर बसपा अपना उम्मीदवार उतारेगी।
2018 के उपचुनाव में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में दमखम दिखाने वाले सपा-बसपा गठबंधन में से इन सीटों पर सपा चुनाव लड़ सकेगी।