चेतावनी: 'सोनिया, राहुल और कांग्रेस के अलावा किसी नेता का नारा लगा तो टिकट काट देंगे'
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हरियाणा कांग्रेस के नेताओं में चल रही गुटबाजी खत्म कराने के लिए अब पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी के हरियाणा प्रभारी गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस आलाकमान को यह भरोसा दिलाने के लिए कि प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता एकजुट हैं, शनिवार को 24 अकबर रोड स्थित कांग्रेस मुख्यालय में कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया।
यहां पर जिस तरह की नारेबाजी हुई, उससे एक बार फिर कांग्रेसी नेताओं की एकजुटता हवा-हवाई होते दिखी। कांग्रेस कार्यकर्ता अपने-अपने नेताओं का नाम लेकर जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। गुलाम नबी आजाद ने मंच पर बैठे उन सभी नेताओं को चेतावनी दे डाली कि अगर उनके नाम का नारा लगा तो टिकट काट देंगे। इसके बाद नारेबाजी बंद हो गई।
दरअसल, कांग्रेस पार्टी ने 26 मार्च से शुरू हो रही बस यात्रा की जानकारी देने के लिए कार्यकर्ता सम्मेलन बुलाया था। यह बस यात्रा गुरुग्राम से शुरू होकर हरियाणा के सभी लोकसभा क्षेत्रों से गुजरती हुई छह दिन बाद पलवल में समाप्त होगी। कांग्रेस पार्टी की समन्वय समिति के सभी 15 नेता इस बस में सवार होंगे। यह इसलिए किया गया है ताकि लोगों को चुनाव के मौके पर ऐसा न लगे कि प्रदेश कांग्रेस कई धड़ों में विभाजित है।
शनिवार सुबह 11 बजे कांग्रेस मुख्यालय में हरियाणा के विभिन्न जिलों से कार्यकर्ता पहुंचने लगे। यहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने जब अपने-अपने नेताओं का नाम लेकर नारेबाजी शुरू की तो एक बार फिर से प्रदेश कांग्रेस में चल रही गुटबाजी सामने आ गई। जहां पर ये कार्यकर्ता एकत्रित किए हुए थे, उसके साथ ही सोनिया गांधी का आवास है। कुमारी शैलजा, अशोक तंवर और किरण चौधरी ने मंच से कहा कि कोई भी कार्यकर्ता किसी नेता का नाम लेकर नारे न लगाए। यहां पर केवल तीन नारे लगेंगे। सोनिया गांधी, राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी के नाम का नारा लगाएं। इसके बाद भी कार्यकर्ता चुप नहीं हुए।
ज्यादातर कार्यकर्ता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और दीपेंद्र सिंह हुड्डा जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे। गुलाम नबी आजाद ने स्थिति को भांपकर तुरंत माइक संभाला। उन्होंने पहले तो मंच पर मौजूद समन्वय समिति के सभी नेताओं से कहा कि वे अपने अपने समर्थकों को समझाएं। इसके बाद भी कार्यकर्ता जब नारे लगाने से बाज नहीं आए तो आजाद ने कहा, अब यदि किसी नेता के नाम का नारा सुनाई पड़ा तो उसका टिकट कट जाएगा। इसके तुरंत बाद कार्यकर्ता शांत हो गए।
सभी सदस्यों को चार-पांच मिनट बोलने का वक्त दिया गया
समन्वय समिति के सदस्यों को चार-पांच मिनट बोलने का समय दिया गया। कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अजय यादव को छोड़कर समन्वय समिति के बाकी सदस्य मंच पर मौजूद थे। हालांकि बिश्नोई के भाई एवं प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन मंच पर बैठे हुए थे।
बाकी सदस्यों में समन्वय समिति के चेयरमैन भूपेंद्र हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, महेंद्र प्रताप सिंह, दीपेंद्र हुड्डा, नवीन जिंदल, कैलाशो सैनी, अनिल ठक्कर, कुलदीप शर्मा, जयवीर सिंह बाल्मीकी और सरदार जयपाल सिंह लाली कार्यकर्ता सम्मेलन में पहुंचे थे। गुलाम नबी आजाद ने कहा, प्रदेश कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है। उन्होंने लोकसभा चुनाव में सभी दस सीटें जीतने का दावा किया।पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को दस में से केवल एक ही सीट पर जीत हासिल हुई थी। सात सीटों पर भाजपा और दो सीटें इनेलो के खाते में गई थी।
दीपेंद्र हुड्डा को छोड़कर कांग्रेस के सभी दिग्गज अपनी सीट बचाने में असफल रहे। इसके बाद अशोक तंवर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, लेकिन कांग्रेस में गुटबाजी खत्म नहीं हो सकी। यहां तक कि अशोक तंवर की कई जनसभाओं और यात्राओं में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा शामिल नहीं हुए।
हुड्डा ने अपने स्तर पर जो कार्यक्रम आयोजित किए, वहां अशोक तंवर खेमा नदारद रहा। कुमारी शैलजा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई और कैप्टन अजय यादव जैसे बड़े नेता भी एक साथ नहीं चले। हालांकि किरण चौधरी और अशोक तंवर जरुर एक मंच पर दिखाई देते रहे हैं।