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एनडीए से गठबंधन पर बोले संजय राउत, केंद्र में साथ चाहिए तो राज्य में सीएम हमारा हो
Thu, 14 Feb 2019 02:06 PM IST
Prabudhh Jain
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Prabudhh Jain
Updated Thu, 14 Feb 2019 02:06 PM IST
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संजय राउत
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लोकसभा चुनाव के महासंग्राम से पहले पक्ष-विपक्ष की परख के लिए हवा में कुछ बयान उछालने का सिलसिला भी तेज हो गया है। शिवसेना के नेता संजय राउत ने कहा है कि अगर एनडीए 2019 में सरकार बनाती है तो शिवसेना, अकाली दल और दूसरे बड़े सहयोगियों की भी भूमिका होगी। एनडीए के सभी सहयोगी अपने-अपने राज्यों में मजबूत हैं और अगर केंद्र में आपको उनके साथ गठजोड़ करना है तो राज्य में मुख्यमंत्री उस सहयोगी दल का ही होना चाहिए।
हालांकि, शिवसेना 2018 के मध्य में ही ये एलान कर चुकी है कि वो इस चुनावी महासंग्राम में अपने दम पर ही उतरेगी। लेकिन, दोनों के बीच समझौते की कुछ गुंजाइश अभी भी दिखती है। महाराष्ट्र में यूपी के बाद सबसे ज्यादा यानी 48 लोकसभा सीट हैं। ऐसे में दोनों की रस्साकशी में, नुकसान भी दोनों को ही उठाना पड़ सकता है।
इससे पहले बुधवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना में संजय राउत की चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात का बचाव किया गया। लिखा गया कि ये मुलाकात एक शिष्टाचार भेंट थी। इस मुलाकात को ऐसे देखा जा रहा है जैसे आसमान टूट पड़ा हो।
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संपादकीय के मुताबिक,
जाहिर है, आने वाले दिनों में शिवसेना और भाजपा के बीच रिश्तों की बेहतरी को लेकर बातचीत का सिलसिला बहाल हो सकता है।
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हालांकि, शिवसेना 2018 के मध्य में ही ये एलान कर चुकी है कि वो इस चुनावी महासंग्राम में अपने दम पर ही उतरेगी। लेकिन, दोनों के बीच समझौते की कुछ गुंजाइश अभी भी दिखती है। महाराष्ट्र में यूपी के बाद सबसे ज्यादा यानी 48 लोकसभा सीट हैं। ऐसे में दोनों की रस्साकशी में, नुकसान भी दोनों को ही उठाना पड़ सकता है।
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इससे पहले बुधवार को शिवसेना के मुखपत्र सामना में संजय राउत की चंद्रबाबू नायडू से मुलाकात का बचाव किया गया। लिखा गया कि ये मुलाकात एक शिष्टाचार भेंट थी। इस मुलाकात को ऐसे देखा जा रहा है जैसे आसमान टूट पड़ा हो।
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संपादकीय के मुताबिक,
क्या गारंटी है कि लोकसभा चुनावों के बाद सरकार गठन के लिए जरूरत पड़ने पर बीजेपी के वरिष्ठ नेता नायडू के दरवाजे पर दस्तक नहीं देंगे? नायडू जब तक एनडीए के साथ थे तब तक वह एक बेहतरीन नेता रहे और अब वह अचानक अछूत हो गए हैं।
जाहिर है, आने वाले दिनों में शिवसेना और भाजपा के बीच रिश्तों की बेहतरी को लेकर बातचीत का सिलसिला बहाल हो सकता है।