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भाजपा के मार्गदर्शक मंडल का जिक्र कर भावुक हो उठे शत्रुघ्न सिन्हा

Sat, 06 Apr 2019 06:45 PM IST
Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: Jitendra Bhardwaj Updated Sat, 06 Apr 2019 06:45 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Shatrughan Sinha slams Modi after joining Congress
Shatrughan Sinha - फोटो : ANI
भाजपा के बिहारी बाबू यानी शत्रुघ्न सिन्हा आज कांग्रेस के हो गए। कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने के बाद उन्हें भाजपा के मार्गदर्शक मंडल की खूब याद आई। कोई एक बार नहीं, बल्कि कई दफा उन्होंने लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, जसवंत सिंह, यशवंत सिन्हा और अरुण शौरी का नाम लिया।
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आडवाणी के ब्लॉग का जिक्र कर उनकी आंखें भर आईं। कहा, अब संयुक्त निर्णयों का जमाना खत्म हो गया। कोई किसी की सुनने को ही तैयार नहीं। जिन लोगों ने अपना पूरा जीवन लगाकर पार्टी को खड़ा किया, उन्हें मार्गदर्शक मंडल में डाला जा रहा है। आखिर ये मार्गदर्शक मंडल क्या है। पार्टी के बुजुर्गों को अपमान कर उन्हें इस मंडल में डाल दिया जाता है, क्या वह ऐसा कोई संगठन है।
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सिन्हा ने करीब तीस मिनट तक मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत की। हर दो-तीन मिनट बाद उन्होंने मार्गदर्शक मंडल को याद किया। बिहारी बाबू ने कहा, हम लालकृष्ण आडवाणी को कैसे भूल सकते हैं। उन्होंने भाजपा ही नहीं, बल्कि आरएसएस को भी खड़ा करने में अहम भूमिका निभाई है।
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उन्होंने कहा, जसवंत सिंह के कामों को हम कैसे भुला दें, हमारे सुलझे हुए विद्वान नेता पंडित मुरली मनोहर जोशी, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा ने ऐसा क्या कर दिया कि उन्हें मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया। लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में ठीक ही लिखा है कि व्यक्ति से बड़ी पार्टी और पार्टी से बड़ा देश। दुख की बात है कि आज भाजपा इस सिद्धांत से दूर भाग रही है।

सिन्हा ने कहा, दो लोगों के हाथ में पूरी सत्ता है। जब आडवाणी जैसे लोगों की कद्र नहीं हो रही तो फिर भाजपा की मौजूदा स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। पार्टी के इन स्तंभों को गिराया जा रहा है। वाजपेयी जी, ने एक बार संसद में इंदिरा गांधी को दुर्गा कह दिया था। उनकी प्रशंसा की थी। आज कोई विपक्ष के बारे में ऐसा कुछ कह दे तो उसे पार्टी विरोधी करार दे दिया जाता है। पार्टी से निकालने की धमकी देने लगते हैं। सुमित्रा महाजन को भी आज जबरन मार्गदर्शक मंडल में डाल दिया गया है। 

ताली भी कप्तान को, गाली भी कप्तान को...

मुरली मनोहर जोशी, लालकृष्ण आडवाणी, अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा का नाम लेकर शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा, इन लोगों ने संवाद के जरिए पार्टी को आगे बढ़ाया है। ये सबकी सुनते थे और जो निर्णय करते, वह भी सभी की सहमति से करते थे। आज भाजपा अपनी इन धरोहरों को भुला रही है। वो ऐसे, क्योंकि पार्टी पर दो लोगों का कब्जा हो गया है।

मैं कहता हूं अगर ऐसा है तो उन्हें पिफर ये भी सुनना होगा। 'ताली भी कप्तान को, गाली भी कप्तान को'। दुख की बात यही है कि कप्तान ताली तो लेना चाहता है, मगर गाली से दूर भागने लगता है। उनके सामने कोई हिम्मत कर अपनी बात आगे रखता है तो उसे पार्टी विरोधी या देश विरोधी कह कर अपमानित करते हैं।

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