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संजय निषाद को भाजपा से हरी झंडी मिलने का इंतजार, लेकिन यहां फंसा पेच
Sat, 06 Apr 2019 07:25 PM IST
शशिधर पाठक
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शशिधर पाठक
Updated Sat, 06 Apr 2019 07:25 PM IST
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praveen nishad
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योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर की संसदीय सीट भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गई है। उपचुनाव में इसे सपा के टिकट पर बसपा के सहयोग से लड़कर प्रवीण निषाद ने भाजपा का गोरखपुर में दंभ तोड़ दिया था। प्रवीण निषाद (निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल) पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद के बेटे हैं।
उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें मना लिया है, लेकिन अभी सीटों की घोषणा नहीं हो पाई है। डॉ. संजय निषाद अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं कि वह भी इंतजार कर रहे हैं। सांसद तो गोरखपुर से बनना अच्छा रहेगा। संजय निषाद की निगाह गोरखपुर के अलावा जौनपुर और भदोही सीट पर है। वह भाजपा से मल्लाह (मछुआरा) बहुल सीट पर टिकट चाहते हैं। बताते हैं कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने पूरा भरोसा दिया है, लेकिन अभी तक कौन सी सीट मिलेगी, उसकी घोषणा नहीं हुई है।
मिली जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की संसदीय सीट पर गोरखनाथ मंदिर का ही प्रत्याशी चाहते हैं। इसके कारण थोड़ा सा पेच फंसा हुआ है। वहीं संजय निषाद की निगाह गोरखपुर संसदीय सीट पर ही है। वह इसे पहली वरीयता देकर चल रहे हैं। उनके पुत्र प्रवीण निषाद का भी कहना है कि पहली वरीयता गोरखपुर संसदीय सीट की है।
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बड़े लोगों से क्या मांगना
निषाद पार्टी के संजय निषाद का कहना है कि उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ बैठक में कोई शर्त नहीं रखी थी। बड़े लोगों से क्या मांगना? संजय के अनुसार वह केवल मछुवारा समाज के लोगों के लिए संविधान में अनुसूचित जाति का दर्जा चाहते हैं। ताकि उनके साथ हो रहा अन्याय दूर हो सके। संजय निषाद का कहना है पार्टी नेतृत्व ने उन्हें सम्मानजनक सीट देने का भरोसा दिया है। वह चाहते हैं कि उन्हें भाजपा गोरखपुर सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा करने का अवसर दे।
सत्ता की चाबी आई हाथ
संजय निषाद 2017 में उ.प्र. विधानसभा चुनाव भी लड़े थे। 35 हजार से अधिक वोट मिला था, लेकिन चुनाव हार गए थे। भदोही सीट पर उनके प्रत्याशी विजय मिश्रा चुनाव जीतने में सफल रहे थे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और निषाद पार्टी से नाता तोड़ लिया था।
72 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़कर निषाद पार्टी को केवल एक सीट भदोही की मिली थी। लेकिन इसके बाद पिछले साल हुए लोकसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण को उम्मीदवार बनाया। बसपा का सहयोग मिला और प्रवीण निषाद सांसद बन गए। 2019 में चुनाव के तारीखों की घोषणा होने के बाद निषाद पार्टी ने इस बार भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया है।
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उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें मना लिया है, लेकिन अभी सीटों की घोषणा नहीं हो पाई है। डॉ. संजय निषाद अमर उजाला से विशेष बातचीत में कहते हैं कि वह भी इंतजार कर रहे हैं। सांसद तो गोरखपुर से बनना अच्छा रहेगा। संजय निषाद की निगाह गोरखपुर के अलावा जौनपुर और भदोही सीट पर है। वह भाजपा से मल्लाह (मछुआरा) बहुल सीट पर टिकट चाहते हैं। बताते हैं कि पार्टी के शीर्ष नेताओं ने पूरा भरोसा दिया है, लेकिन अभी तक कौन सी सीट मिलेगी, उसकी घोषणा नहीं हुई है।
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मिली जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ गोरखपुर की संसदीय सीट पर गोरखनाथ मंदिर का ही प्रत्याशी चाहते हैं। इसके कारण थोड़ा सा पेच फंसा हुआ है। वहीं संजय निषाद की निगाह गोरखपुर संसदीय सीट पर ही है। वह इसे पहली वरीयता देकर चल रहे हैं। उनके पुत्र प्रवीण निषाद का भी कहना है कि पहली वरीयता गोरखपुर संसदीय सीट की है।
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बड़े लोगों से क्या मांगना
निषाद पार्टी के संजय निषाद का कहना है कि उन्होंने भाजपा नेताओं के साथ बैठक में कोई शर्त नहीं रखी थी। बड़े लोगों से क्या मांगना? संजय के अनुसार वह केवल मछुवारा समाज के लोगों के लिए संविधान में अनुसूचित जाति का दर्जा चाहते हैं। ताकि उनके साथ हो रहा अन्याय दूर हो सके। संजय निषाद का कहना है पार्टी नेतृत्व ने उन्हें सम्मानजनक सीट देने का भरोसा दिया है। वह चाहते हैं कि उन्हें भाजपा गोरखपुर सीट से अपना उम्मीदवार खड़ा करने का अवसर दे।
सत्ता की चाबी आई हाथ
संजय निषाद 2017 में उ.प्र. विधानसभा चुनाव भी लड़े थे। 35 हजार से अधिक वोट मिला था, लेकिन चुनाव हार गए थे। भदोही सीट पर उनके प्रत्याशी विजय मिश्रा चुनाव जीतने में सफल रहे थे, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह भाजपा में शामिल हो गए और निषाद पार्टी से नाता तोड़ लिया था।
72 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़कर निषाद पार्टी को केवल एक सीट भदोही की मिली थी। लेकिन इसके बाद पिछले साल हुए लोकसभा के उपचुनाव में समाजवादी पार्टी ने डॉ. संजय निषाद के बेटे प्रवीण को उम्मीदवार बनाया। बसपा का सहयोग मिला और प्रवीण निषाद सांसद बन गए। 2019 में चुनाव के तारीखों की घोषणा होने के बाद निषाद पार्टी ने इस बार भाजपा में शामिल होने का फैसला कर लिया है।