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छोटे भाई तेजस्वी को अर्जुन बताने वाले तेज प्रताप क्यों उतरे बगावत पर? 

Mon, 01 Apr 2019 07:47 PM IST
अमित मंडल चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमित मंडल Updated Mon, 01 Apr 2019 07:47 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Revolt of Tej Pratap Yadav and Lalu family politics
लालू परिवार में फूट? - फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव 2019 की जंग में अब एक और परिवार में सियासी घमासान मच गया है। इस बार बिहार के पूर्व सीएम और राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के घर में बगावत हो गई है। लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने सोमवार को एलान कर दिया कि वह लालू-राबड़ी मोर्चा बनाएंगे। अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो सभी सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारे जाएंगे। उन्होंने खुद के सारण सीट से चुनाव लड़ने की भी बात कही। 
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लालू परिवार में ये सियासी जंग नई नहीं है। लंबे अरसे से इसकी पटकथा तैयार हो रही थी। इसकी शुरुआत बिहार में जदयू-राजद सरकार बनने के साथ ही हो गई थी। तब लालू के छोटे बेटे तेजस्वी यादव को उप मुख्यमंत्री का पद मिला। लेकिन तेज प्रताप को मंत्री बनाया गया। यहीं से दोनों भाइयों के बीच तुलना का दौर भी शुरू हो गया। 
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हालांकि दोनों भाइयों की तरफ से हमेशा यही दिखाया जाता रहा कि सबकुछ शांत और अच्छा है। लेकिन शायद चिंगारी अंदर ही कहीं धधक रही थी। वक्त के साथ साथ इसमें और गर्मी पैदा होती गई। आज जब लोकसभा चुनाव सिर पर हैं ये चिंगारी आग बनकर बाहर निकल गई। तेज प्रताप ने साफ एलान कर दिया कि उनकी बात नहीं मानी गई तो राजद के खाते में आई सभी सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार उतारे जाएंगे। 
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हालांकि, आज तेज प्रताप ने भाई तेजस्वी यादव के खिलाफ सीधे कुछ नहीं कहा। उनकी तारीफ ही की। कहा कि तेजस्वी जी भी हमारे साथ हैं, वह अर्जुन हैं। बता दें कि इससे पहले भी तेज प्रताप कई मौकों पर खुद को कृष्ण और तेजस्वी को अर्जुन बात चुके हैं। जनता तो उनका कृष्ण अवतार भी देख चुकी है। 

(फोटो-PTI)

कई मौकों पर ये भी देखा गया कि तेज प्रताप को राजनीति में बहुत ज्यादा रुचि नहीं है। उनका मन कहीं और रमता है। लेकिन चुनाव नजदीक आने के साथ साथ हालात ने करवट ली और अब वह राजद की सीटों में अपनी हिस्सेदारी भी चाहते हैं। वह अपने ससुर चंद्रिका राय से भी नाराज हैं और उन्हें सारण से टिकट दिए जाने का लगातार विरोध कर रहे हैं। यहां से निर्दलीय लड़ने की बात तेज प्रताप पहले भी कह चुके हैं। 

दरअसल, आज तेज प्रताप ने एक महत्वपूर्ण बात कही कि महागठबंधन की सीटों का एलान से पहले तक उनसे यही कहा जाता रहा कि उनसे बात की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यानि सीटों के बंटवारे को लेकर तेज प्रताप की राय कभी सुनी ही नहीं गई। हालिया दिनों में वह भाई तेजस्वी के साथ एक मंच पर भी नजर नहीं आए हैं। चुनाव बंटवारे पर हुए मंथन में तेज प्रताप का रोल कहीं नजर नहीं आया। राजद की सीटों और उम्मीदवारों के एलान के साथ ही तेज प्रताप का विरोध तेज होता गया, लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। अंत में ये हुआ कि उन्होंने सार्वजनिक रूप से बगावत का एलान कर दिया। 
 
 
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