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कुरुक्षेत्र: राहुल के 'न्याय अस्त्र' और मोदी के 'शक्ति अस्त्र' में कौन पड़ेगा भारी?

Wed, 27 Mar 2019 10:17 PM IST
विनोद अग्निहोत्री विनोद अग्निहोत्री
विनोद अग्निहोत्री Published by: विनोद अग्निहोत्री Updated Wed, 27 Mar 2019 10:17 PM IST
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Lok Sabha Elections 2019: Now politics starts over Mission shakti
नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी
चुनावी कुरुक्षेत्र में अब रोज नए नए धमाके शुरू हो गए हैं। दो दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी न्यूनतम बेसिक आय (न्याय) योजना का धमाका करके करीब पांच करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपए की रकम खाते में भेजने का लॉलीपॉप दिखाया तो आज जैसे ही डीआरडीओ के भारतीय वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष में उपग्रह को मार गिराने वाली मिसाइल प्रणाली का सफल परीक्षण किया तो इसकी जानकारी खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को अपने एक विशेष संदेश में दी।
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प्रधानमंत्री ने इस मिशन शक्ति की जानकारी देते हुए बताया कि भारत अब अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया में चौथा ऐसा देश हो गया है जिसके पास अंतरिक्ष में किसी भी ऐसे उपग्रह को नष्ट करने की मिसाइल तकनीक आ गई है जो भारत की जासूसी कर रहा हो या भारतीय हितों के खिलाफ संदिग्ध गतिविधियों के लिए जिसका इस्तेमाल कोई शत्रु देश कर रहा हो। देश के वैज्ञानिकों की इस शानदार उपलब्धि को लेकर भी चुनावी सियासत शुरू हो गई।
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने ट्वीट करके कहा कि जहां पिछली सरकारों ने यह साहस नहीं दिखाया, वहीं मोदी सरकार ने देश की सुरक्षा के लिए यह साहसपूर्ण फैसला लिया और वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया। तो कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट करके जहां इस उपलब्धि के लिए डीआरडीओ और वैज्ञानिकों को बधाई दी, वहीं प्रधानमंत्री पर व्यंग्य करते हुए विश्व नाट्य दिवस (वर्ल्ड थिएटर डे) की बधाई दे दी। इसके बाद तो पक्ष विपक्ष के बीच मिशन शक्ति को लेकर एक दूसरे पर तीरंदाजी शुरू हो गई।
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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस अंदाज में देश को यह जानकारी दी वह बेहद दिलचस्प रहा। सुबह प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया कि वह दिन में पौने बारह बजे से बारह बजे के बीच देश को संबोधित करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं। इसके बाद पूरे देश में जबर्दस्त उत्सुकता पैदा हो गई कि आखिर चुनावी मौसम के इस उफान के बीच प्रधानमंत्री मोदी कौन सी अति महत्वपूर्ण घोषणा करने वाले हैं। क्या नोटबंदी जैसा कोई बड़ा धमाका होगा या पाकिस्तान को लेकर किसी बड़ी कार्रवाई की जानकारी दी जाएगी। कयास लगाने वाले तो नोटबंदी के दूसरे चरण की बात भी करने लगे, लेकिन चुनाव आचार संहिता की वजह से यह बात गले नहीं उतर रही थी।

 

कुछ कयास लगे कि क्या हमारी एजेंसियों को दाउद इब्राहिम को पकड़ने या मारने में कोई बड़ी कामयाबी मिल गई जिसकी जानकारी प्रधानमंत्री देंगे। घरों, दफ्तरों,पार्टी कार्यालयों, पान की दुकानों, होटलों और सभी सार्वजनिक जगहों पर लोग टेलीविजन सेटों के आगे जम गए। जहां टीवी नहीं मिला वहां रेडियो के इर्द गिर्द लोग जमा हो गए। जो रास्तों में थे, उन्होंने अपने मोबाइल पर सोशल मीडिया के अपने अपने प्लेटफॉर्म खोल लिए। प्रधानमंत्री ने भी खासा इंतजार कराया और इसके बाद उन्होंने जब मिशन शक्ति की जानकारी दी तो खुश होने के साथ साथ लोगों ने राहत की भी सांस ली। प्रधानमंत्री के इस अंदाज ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को एक दूसरे पर तीर चलाने का मौका दे दिया।

भाजपा की उम्मीद बढ़ी है कि मिशन शक्ति की कामयाबी चुनावी महाभारत में उसके राष्ट्रीय सुरक्षा के तरकश में एक ब्रह्मास्त्र की तरह आ गया है, जिसे वह जनता के बीच ऑपरेशन बालाकोट के साथ एक और बड़े कदम के रूप में प्रचारित करके अपने राष्ट्रवाद के एजेंडे को और मजबूत कर सकेगी। जबकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार और भाजपा सेना और वैज्ञानिकों की उपलब्धियों का भी चुनावी इस्तेमाल कर रही है जो अनैतिक है। लेकिन इश्क और जंग में सब जायज है के चलन के इस सियासी दौर में नैतिक और अनैतिक का फर्क मिट चुका है। अब तो सवाल यह है कि चुनावी महाभारत में राहुल के न्यायास्त्र और मोदी के शक्तास्त्र में कौन ज्यादा कारगर होगा। दलों में दलबदल का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

एक दिन पहले भाजपा ने अपने जमाने की ग्लैमर गर्ल जयाप्रदा को शामिल करके उनके पुराने लोकसभा क्षेत्र रामपुर में समाजवादी पार्टी के दिग्गज मोहम्मद आजम खान के खिलाफ उम्मीदवार बना दिया तो मंगलवार को कांग्रेस ने एक समय हिंदी फिल्मों की सफल तारिका उर्मिला मार्तोंडकर को अपने साथ लेकर न सिर्फ चार दिन पहले सपना चौधरी से मिली टीस को खत्म किया बल्कि यह संदेश भी दिया कि भले ही कांग्रेस 133 साल पुरानी पार्टी है लेकिन उसके प्रति आकर्षण अभी बना हुआ है।

भले ही लोगों को न उम्र की सीमा हो न जन्म का हो बंधन वाला गाना कभी खूब भाया हो, लेकिन भाजपा ने पार्टी में 75 साल की उम्र सीमा को सख्ती से लागू करते हुए पार्टी के संस्थापकों लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी के साथ साथ शांताकुमार, कलराज मिश्र और करिया मुंडा जैसे बुजुर्ग नेताओं को भी चुनावी राजनीति से अलग कर दिया।लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन पर अभी खामोशी है, शायद इसलिए कि वहां से पक्के तौर पर जिताऊ उम्मीदवार को पार्टी खोज रही है।
 
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