क्या आप जानते हैं | कहां बनती है चुनाव की अमिट स्याही, पहली बार कब हुई इस्तेमाल?
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2019 का चुनाव इस बार चुनावी महासंग्राम साबित होने जा रहा है। अभी तक तो चुनाव तारीखों का एलान नहीं हुआ है लेकिन नेताओं के चुनावी दौरे और रैलियों ने माहौल गर्म कर दिया है। सियासी पंडित भी बता रहे हैं कि इस बार घमासान जबरदस्त होने जा रहा है। नेताओं के बयान और एक दूसरे पर हमले बता रहे हैं कि इस बार की सियासी जंग चरम पर पहुंचेगी। इन सबके बीच चुनाव से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य ऐसे हैं जिनके बारे में जानना आपके लिए भी जरूरी है।
ऐसा ही एक तथ्य जुड़ा हुआ है चुनाव के दौरान इस्तेमाल होने वाली अमिट स्याही से। वोट डालने के बाद मतदाता के हाथ की अंगुली के नाखून पर स्याही से निशान लगाया जाता है ताकि पता चल सके कि इस मतदाता ने वोट डाल दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी मतदान रोकना है।
दिलचस्प तथ्य है कि इस अमिट स्याही का इस्तेमाल पहली बार 1962 के तीसरे आम चुनाव में हुआ था ताकि फर्जी मतदान रोका जा सके। यह स्याही मैसूर में बनाई जाती है जो लगाने के बाद 60 सेकेंड में ही सूख जाती है।
कुछ दिलचस्प तथ्य
-मैसूर के महाराजा नालवाड़ी कृष्णराज वाडियर ने 1937 में एक कंपनी मैसूर लैक एंड पेंट्स लिमिटेड बनाई थी जो अब मैसूर पेंट्स एंड वॉर्निश लिमिटेड के नाम से जानी जाती है।
- यह स्याही सिंगापुर, थाइलैंड, नाइजीरिया, मलेशिया, पाकिस्तान, कनाडा, द. अफ्रीका सहित कई देशों को भेजी जाती है।
-पहली बार ये अमिट स्याही 1962 के आम चुनाव में इस्तेमाल हुई थी ताकि मतदान में फजीवाड़ा रोका जा सके।