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हरियाणा में लालों के 'लाल' से निपटने के लिए नए चेहरे तलाश रही भाजपा
Fri, 15 Mar 2019 07:35 PM IST
Jitendra Bhardwaj
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Jitendra Bhardwaj
Updated Fri, 15 Mar 2019 07:35 PM IST
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बीजेपी
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा की राजनीति में दशकों तक छाए रहने वाले तीनों लाल यानी देवीलाल-भजनलाल-बंसीलाल आज भले ही लोगों के बीच नहीं हैं, मगर उनकी विरासत को आगे बढ़ाने वाले, भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं। नतीजा, भाजपा 'लाल' परिवारों के सामने नए चेहरे तलाशने के लिए मजबूर हो गई है।
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इस बार के लोकसभा चुनाव में 'लाल' परिवारों के एक से ज्यादा सदस्य चुनाव मैदान में उतरकर सत्तापक्ष की मुसीबत बढ़ा सकते हैं। हालांकि प्रदेश की राजनीति में दो परिवार और भी हैं, जो अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। इनमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद हुड्डा और चौ. दलबीर सिंह की पुत्री कुमारी शैलजा भी भाजपा को बड़ी चुनौती दे रहे हैं।
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प्रदेश की 10 में से पांच-छह सीटों पर इन राजनीतिक परिवारों का प्रभाव माना जाता है। देवीलाल परिवार का दबदबा हिसार और सिरसा में ज्यादा रहा है। हालांकि इस परिवार के सदस्य अब इन लोकसभा क्षेत्रों से बाहर निकलने लगे हैं। मौजूदा राजनीतिक हालात में दुष्यंत चौटाला जो कि अजय चौटाला के पुत्र हैं, वे हिसार से सांसद हैं।
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ओमप्रकाश चौटाला और उनके बड़े बेटे अजय चौटाला तिहाड़ जेल में हैं। छोटे बेटे अभय चौटाला अपने भतीजों दुष्यंत और दिग्विजय चौटाला के साथ भारतीय राष्ट्रीय लोकदल को संभाल रहे थे। जींद उपचुनाव से पहले पार्टी दो फाड़ हो गई। अजय चौटाला ने अपने बेटे दुष्यंत और दिग्विजय के साथ मिलकर 'जननायक जनता पार्टी' (जजपा) बना ली। लोकसभा चुनाव में संभव है कि दुष्यंत, दिग्विजय और इनकी मां नैना चौटाला भी किसी सीट से ताल ठोकें।
जींद उपचुनाव में जजपा ने भाजपा को जिस तरह की कड़ी टक्कर दी, उससे राजनीतिक दल हैरत में पड़ गए थे। हिसार, भिवानी-महेंद्रगढ़ और सोनीपत सीट पर इस लाल परिवार से कोई सदस्य चुनाव मैदान में उतर सकता है। फिलहाल भिवानी-महेंद्रगढ़ और सोनीपत सीट भाजपा के कब्जे में हैं, लेकिन अब इन दोनों जगह पर नए प्रत्याशी तलाशे जा रहे हैं।
यह तय है कि जजपा के चौटाला परिवार से अगर कोई सदस्य भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट से चुनाव लड़ने के लिए आता है तो मौजूदा भाजपा सांसद धर्मवीर की राह मुश्किल हो जाएगी। इसी तरह सोनीपत सीट पर भी दिग्विजय चौटाला चुनाव मैदान में आ सकते हैं। यहां से मौजूदा भाजपा सांसद रमेश कौशिक की टिकट कटने के आसार हैं।
यहां से भाजपा ओलम्पिक मेडल विजेता पहलवान योगेश्वर दत्त को टिकट दे सकती है। सिरसा से भाजपा इस बार गायक हंसराज हंस को टिकट देने का मन बना रही है। यहां पर भी चौटाला परिवार का खासा दबदबा रहा है।
भजनलाल परिवार भी भाजपा को देगा कड़ी टक्कर
2014 के लोकसभा चुनाव में भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजका) का भाजपा के साथ गठबंधन था।अब हजका का कांग्रेस में विलय हो चुका है। कुलदीप चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी कम से कम दो सीटें उन्हें दे। हिसार से वे अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं, जबकि दूसरी किसी भी सीट जैसे करनाल और भिवानी-महेंद्रगढ़ से खुद या अपने भाई चंद्रमोहन को मैदान में उतार सकते हैं। भाजपा को यह परिवार भी कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है। कुलदीप बिश्नोई हिसार और भिवानी, दोनों लोकसभा सीटों से सांसद रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी उनकी बात मान लेती है तो वे भाजपा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
तीसरा लाल परिवार भिवानी-महेंद्रगढ़ तक सीमित है
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री व सुरेंद्र सिंह की बेटी श्रुति चौधरी पहले भी इस सीट से सांसद रही हैं। उनकी मां किरण चौधरी मौजूदा विधायक हैं। कांग्रेस की ओर से टिकट के लिए यहां पर श्रुति चौधरी सबसे प्रबल दावेदार हैं। अगर उन्हें टिकट मिलता है तो वे भाजपा प्रत्याशी को टक्कर दे सकती हैं। चर्चा यह भी है कि इस बार भाजपा यहां किसी नए चेहरे को मौका देगी।
2014 के लोकसभा चुनाव में भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई की पार्टी हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजका) का भाजपा के साथ गठबंधन था।अब हजका का कांग्रेस में विलय हो चुका है। कुलदीप चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी कम से कम दो सीटें उन्हें दे। हिसार से वे अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं, जबकि दूसरी किसी भी सीट जैसे करनाल और भिवानी-महेंद्रगढ़ से खुद या अपने भाई चंद्रमोहन को मैदान में उतार सकते हैं। भाजपा को यह परिवार भी कड़ी टक्कर देने की स्थिति में है। कुलदीप बिश्नोई हिसार और भिवानी, दोनों लोकसभा सीटों से सांसद रहे हैं। अगर कांग्रेस पार्टी उनकी बात मान लेती है तो वे भाजपा के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं।
तीसरा लाल परिवार भिवानी-महेंद्रगढ़ तक सीमित है
पूर्व मुख्यमंत्री बंसीलाल की पौत्री व सुरेंद्र सिंह की बेटी श्रुति चौधरी पहले भी इस सीट से सांसद रही हैं। उनकी मां किरण चौधरी मौजूदा विधायक हैं। कांग्रेस की ओर से टिकट के लिए यहां पर श्रुति चौधरी सबसे प्रबल दावेदार हैं। अगर उन्हें टिकट मिलता है तो वे भाजपा प्रत्याशी को टक्कर दे सकती हैं। चर्चा यह भी है कि इस बार भाजपा यहां किसी नए चेहरे को मौका देगी।
हुड्डा और शैलजा भी दे रहे चुनौती
ये परिवार भले ही 'लाल' घरानों से बाहर हैं, लेकिन प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से मौजूदा सांसद हैं। वे तीन बार यहां से सांसद चुने गए हैं।
हरियाणा में इस बार भाजपा ने इस सीट को नाक का सवाल बना लिया है। पार्टी के पास अभी तक दीपेंद्र के खिलाफ कोई भी मजबूत उम्मीदवार नहीं है। इस बार भाजपा यहां से पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सुहाग या किसी अन्य हस्ती को दीपेंद्र के मुकाबले में खड़ा करने की योजना बना रही है।
ऐसी चर्चा भी है कि कांग्रेस पार्टी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो सत्ताधारी पार्टी के लिए इस सीट को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
कुमारी शैलजा अंबाला और सिरसा, दोनों सुरक्षित सीटों से सांसद रही हैं। इस बार वे सिरसा से चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं। अगर भाजपा यहां से हंसराज हंस को टिकट देती है तो शैलजा के आने से वह मुकाबला रौचक हो जाएगा। यदि वे अंबाला से चुनाव लड़ती हैं तो भाजपा के लिए सीट बचा पाना आसान नहीं होगा।
ये परिवार भले ही 'लाल' घरानों से बाहर हैं, लेकिन प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं। दस साल तक प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभालने वाले भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पुत्र दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से मौजूदा सांसद हैं। वे तीन बार यहां से सांसद चुने गए हैं।
हरियाणा में इस बार भाजपा ने इस सीट को नाक का सवाल बना लिया है। पार्टी के पास अभी तक दीपेंद्र के खिलाफ कोई भी मजबूत उम्मीदवार नहीं है। इस बार भाजपा यहां से पूर्व आर्मी चीफ दलबीर सुहाग या किसी अन्य हस्ती को दीपेंद्र के मुकाबले में खड़ा करने की योजना बना रही है।
ऐसी चर्चा भी है कि कांग्रेस पार्टी भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सोनीपत सीट से चुनाव मैदान में उतार सकती है। अगर ऐसा होता है तो सत्ताधारी पार्टी के लिए इस सीट को बचाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।
कुमारी शैलजा अंबाला और सिरसा, दोनों सुरक्षित सीटों से सांसद रही हैं। इस बार वे सिरसा से चुनाव लड़ने का मन बना रही हैं। अगर भाजपा यहां से हंसराज हंस को टिकट देती है तो शैलजा के आने से वह मुकाबला रौचक हो जाएगा। यदि वे अंबाला से चुनाव लड़ती हैं तो भाजपा के लिए सीट बचा पाना आसान नहीं होगा।