फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Lok Sabha Elections 2019: Amit Shah contest from Gandhinagar, in 1982 met with Narendra Modi

अमित शाह: 37 साल पहले पर्चे बांटे, अध्यक्ष बन पार्टी को शिखर पर पहुंचाया, अब बने गृह मंत्री

Thu, 30 May 2019 05:48 PM IST
Prabudhh Jain निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
निलेश कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prabudhh Jain Updated Thu, 30 May 2019 05:48 PM IST
सार

  • अमित शाह ने भाजपा की पारंपरिक सीट गांधीनगर से चुनाव जीता 
  • भाजपा को प्रचंड बहुमत से मिली जीत में रही अहम भूमिका
  • बूथ कार्यकर्ता से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष तक पहुंचे, बढ़ता गया कद
  • अमित शाह ने अबतक जितने भी चुनाव लड़े, सभी में मिली जीत

विज्ञापन
Lok Sabha Elections 2019: Amit Shah contest from Gandhinagar, in 1982 met with Narendra Modi
अमित शाह - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

'अमित शाह', देश की राजनीति में महज पांच सालों के भीतर उभरा एक ऐसा नाम, जो शून्य से शिखर तक के सफर पर तेजी से बढ़ता चला गया। एक राजनीतिक पार्टी में पद और कद के नजरिए से देखा जाए तो भाजपा में आज वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद दूसरे नंबर के नेता हैं और केंद्र सरकार में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका तय है। शाह 'मोदी कैबिनेट 2.0' में गृह मंत्रालय संभालने जा रहे हैं। 

विज्ञापन


करीब साढ़े तीन दशक पहले पार्टी के लिए कभी दीवारों पर पोस्टर साटने वाला और लोगों के बीच पर्चे बांटने वाला युवक आज देश की सबसे बड़ी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना और कीर्तिमान गढ़े। यही नहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता रहे देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और पूव उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी की सीट रही गुजरात के गांधीनगर से चुनाव लड़ा, रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की और अब देश के सर्वोच्च सदन पहुंच गए।
विज्ञापन


आइए, अमित शाह के इस शानदार सियासी सफर के बारे में विस्तार से जानते हैं:  

1982 में हुई थी नरेंद्र मोदी से मुलाकात, छात्र राजनीति से जुड़े

कहा जाता है कि 1982 में कॉलेज के दिनों में अमित शाह की मुलाकात नरेंद्र मोदी से हुई थी।1983 में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े और उनका छात्र जीवन में ही राजनीति के प्रति गंभीर रुझान बना। एक जमाने में भाजपा के कद्दावर नेता रहे अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी के लिए प्रचार का जिम्मा संभालने वाले अमित शाह आज उन्हीं की पारंपरिक सीट से उम्मीदवार हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन


नामांकन दाखिल करने से पहले शनिवार को अहमदाबाद के नारणपुरा में रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अपनी राजनीति के शुरुआती दिनों को याद किया। कहा कि 1982 में एक बूथ कार्यकर्ता के रूप में मैंने काम शुरू किया था। दीवारों पर पोस्टर साटते-साटते, क्षेत्र में पर्चा बांटते-बांटते विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भारतीय जनता पार्टी ने मुझे पहुंचाया है। मुझमें से भाजपा को निकाल दिया जाए, तो शून्य बचता है। 

अटल-आडवाणी के लिए संभाली चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी

Lok Sabha Elections 2019: Amit Shah contest from Gandhinagar, in 1982 met with Narendra Modi
Atal-Adwani(File Photo) - फोटो : Social media

22 अक्टूबर 1964 को महाराष्ट्र के मुंबई में व्यापारी अनिलचन्द्र शाह के घर जन्में अमित शाह की शुरुआती पढ़ाई मेहसाणा से हुई। गुजरात के एक रईस परिवार से ताल्लुक रखने वाले शाह का पैतृक गांव चंदूर पाटण जिले में पड़ता है। मेहसाणा में शुरुआती पढ़ाई के बाद वह अहमदाबाद आए और बॉयोकेमिस्ट्री में ग्रेजुएशन करने के बाद पिता का व्यवसाय संभालने लगे। 

राजनीति में रुचि के बाद साल 1987 में शाह का भारतीय जनता युवा मोर्चा का सदस्य बनाया गया। 1991 में उन्हें पहला बड़ा राजनीतिक मौका मिला और आज वह जिस गांधीनगर सीट से चुनावी मैदान में हैं, उसी सीट के लिए भाजपा के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए तब प्रचार की जिम्मेदारी संभाली थी। आडवाणी को चुनाव में जीत मिली।

इसके बाद अगले लोकसभा चुनाव 1996 में जब अटल बिहारी वाजपेयी ने गुजरात से चुनाव लड़ना तय किया, तब इसके लिए भी अमित शाह को चुनाव प्रचार का जिम्मा सौंपा गया। इस बार वाजयेपी पहली बार प्रधानमंत्री बने थे, हालांकि अल्पमत में बनी यह सरकार 13 दिन में ही गिर गई थी।

42 छोटे-बड़े चुनाव लड़े, सारे जीते, हारे एक भी नहीं

Lok Sabha Elections 2019: Amit Shah contest from Gandhinagar, in 1982 met with Narendra Modi
अपने एक प्रशंसक बच्चे से फूल लेते अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : twitter@AmitShah

1989 से 2014 के बीच शाह गुजरात राज्य विधानसभा और विभिन्न स्थानीय निकायों के लिए 42 छोटे-बड़े चुनाव लड़े, लेकिन वे एक भी चुनाव में नहीं हारे। 1997, 1998, 2002 और 2007 में वह सरखेज विधानसभा क्षेत्र से जीते। 2012 में वह अहमदाबाद के नरणपुरा से विधायक बने। वर्तमान में वह राज्यसभा सांसद हैं। 

इसके अलावे 1999 में वह अहमदाबाद डिस्ट्रिक्ट कोऑपरेटिव बैंक (एडीसीबी) के प्रेसिडेंट चुने गए। 2009 में गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बने और फिर 2014 में नरेंद्र मोदी के अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद वही इसके अध्यक्ष भी बने। 2003 से 2010 तक उन्होंने गुजरात सरकार की कैबिनेट में गृह मंत्रालय का जिम्मा संभाला।

फर्जी मुठभेड़ के आरोप लगे, फिर अदालत ने दी क्लिन चिट 

अमित शाह ने जीवन में चढ़ाव भी देखा और उतार भी। शाह तब सुर्खियों में आए, जब 2004 में अहमदाबाद के बाहरी इलाके में कथित रूप से एक फर्जी मुठभेड़ में इशरत जहां, ज़ीशान जोहर और अमजद अली राणा के साथ प्रणेश की हत्या हुई। गुजरात पुलिस का दावा था कि साल 2002 में गोधरा कांड का बदला लेने के लिए ये लोग तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को मारने आए थे। 

इस मामले में गोपीनाथ पिल्लई ने अदालत में एक आवेदन देकर मामले में अमित शाह को भी आरोपी बनाने की अपील की थी। एक समय ऐसा भी आया जब सोहराबुद्दीन शेख की फर्जी मुठभेड़ के मामले में साल 2010 में 25 जुलाई को उन्हें गिरफ्तार भी होना पड़ा। उनके बेहद खास रहे गुजरात पुलिस के निलंबित अधिकारी डीजी बंजारा ने शाह पर आरोप लगाए। हालांकि 15 मई 2014 को सीबीआई की एक विशेष अदालत ने शाह के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण इस याचिका को ख़ारिज कर दिया।

पन्ना प्रमुखों के जरिए उत्तर प्रदेश में किया करिश्माई कमाल

Lok Sabha Elections 2019: Amit Shah contest from Gandhinagar, in 1982 met with Narendra Modi
Amit Shah and Yogi Adityanath(File Photo)

लोकसभा चुनाव 2014 से पहले शाह को भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया। तारीख थी- 12 जून 2013। उत्तर प्रदेश में तब भाजपा की मात्र 10 लोक सभा सीटें थी। अमित शाह ने 'पन्ना प्रमुख' का कॉन्सेप्ट लाया। इसके तहत मतदाता सूची में एक पन्ने पर जितने मतदाताओं के नाम थे, उनकी जिम्मेदारी एक व्यक्ति को दी गई, जिनका काम था उस पृष्ठ में दर्ज सारे मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाना। ऐसे जिम्मेदार व्यक्ति को शाह ने पन्ना प्रमुख का नाम दिया था।

16 मई 2014 को सोलहवीं लोकसभा के चुनाव परिणाम आए तो शाह का संगठनात्मक कौशल और नेतृत्व क्षमता पार्टी नेतृत्व समेत पूरे देश ने देखी। उत्तर प्रदेश में 10 सीटों वाली भाजपा के पास 71 सीटें हो गई। इस करिश्माई जीत के शिल्पकार रहे अमित शाह का कद पार्टी के भीतर इतना बढ़ा कि उन्हें भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष बना दिया गया। 

तीन राज्यों में नहीं खिला पाए कमल, फिर समीक्षा कर अभियान में लग गए

पिछले साल खासकर हिंदी पट्टी के तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में अमित शाह के नेतृत्व वाली भाजपा कमाल नहीं कर पाई और इन राज्यों में खिला हुआ कमल मुरझा गया। तीनों ही राज्यों में कांग्रेस ने जीत हासिल की और सरकार बनाई।

किसानों की कर्जमाफी और आरक्षण जैसे कई मुद्दों पर कांग्रेस, भाजपा पर आक्रामक रही और ये मुद्दे भाजपा के लिए भारी पड़ गए। अमित शाह ने जनादेश का स्वागत करते हुए इसे समीक्षा का समय बताया था। इसके बाद से एक बार फिर वह पार्टी और संगठन को धार देने के अपने अभियान में लग गए। 

लोकसभा चुनाव में किया शानदार प्रदर्शन, बनी पूर्ण बहुमत की सरकार

लोकसभा चुनाव 2019 में अमित शाह ने शानदार प्रदर्शन किया और भाजपा के लिए यह जीत अब तक की सबसे बड़ी जीत रही। पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से बड़े और कड़े फैसले लेना मोदी सरकार 2.0 के लिए मुश्किल नहीं होगा। देश इस बार मोदी सरकार से उनके घोषणा पत्र में शामिल बड़े वादों को निभाए जाने की भी उम्मीद करेगी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed