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लोकतंत्र के असली हीरो थे सुकुमार सेन, भारत का पहला चुनाव ऐसे कराया कि विदेश से आ गया बुलावा

Tue, 19 Feb 2019 05:33 PM IST
ललित फुलारा ललित फुलारा, अमर उजाला
ललित फुलारा, अमर उजाला Published by: ललित फुलारा Updated Tue, 19 Feb 2019 05:33 PM IST
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lok sabha election: know about sukumar sen Who Set Up India’s Electoral System
सुकुमार सेन भारत के पहले चुनाव आयुक्त थे। उनकी बदौलत ही 67 साल पहले पहला आम चुनाव संपन्न हुआ।

15 अगस्त 1947 को आजादी मिलने के बाद भारत सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि चुनाव प्रणाली का ढांचा कैसा हो? इस चुनौती का हल निकालने वाले थे भारतीय सिविल सेवा के सुकुमार सेन। उनकी बदौलत ही भारत का पहला आम चुनाव संपन्न हुआ था। सुकुमार सेन भारत के पहले चुनाव आयुक्त थे जिन्होंने 25 अक्टूबर 1951 से लेकर फरवरी 1952 के बीच पहला आम चुनाव संपन्न करवाया था। उन्हीं की बदौलत 67 साल पहले भारत के नागरिक पहली बार अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर पाए। उनकी इस ख्याति से प्रभावित होकर सूडान ने भी उन्हें अपने यहां चुनाव करवाने के लिए बुलाया था। कहा जाता है कि सुकुमार सेन की ही बदौलत भारत के दूसरे आम चुनाव में साढ़े चार करोड़ की बचत हो सकी।

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22 साल में ज्वॉइन की थी सिविल सेवा, 1947 में बने थे प. बंगाल के शासन सचिव

सुकुमार सेन गणित में गोल्ड मेडलिस्ट थे। 1899 में बंगाल में पैदा हुए सुकुमार सेन ने लंदन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के लिए जाने से पहले कलकत्ता के प्रेसिडेंसी कॉलेज में पढ़ाई की। महज  22 साल की उम्र में वह सिविल सेवा सर्विस में तैनात हो गए। यह 1921 की बात है। तब भारत गुलामी की बेड़ियों से जकड़ा हुआ था। अपनी सेवा के दौरान उन्होंने भारत के कई राज्यों और जिलों में काम किया। अपनी तेज-तर्रारी और गजब की मेधा की वजह से 1947 में सुकुमार सेन को पश्चिम बंगाल का प्रमुख शासन सचिव बनाया गया जो कि ब्रिटिश भारत में आईसीएस अधिकारी की सबसे वरिष्ठ रेंक थी।

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और जब सुकुमार ने उठाई बहुत बड़ी जिम्मेदारी

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सुकुमार सेन की ही बदौलत प्रत्याशियों ने 4500 सीटों पर चुनाव लड़ा जिनमें से 489 सीटें लोकसभा चुनाव की थी और बाकी राज्यों के विधानसभा चुनाव की।

सुकुमार सेन का यही अनुभव भारत में पहला आम चुनाव संपन्न कराने में उनके काम आया। 1951 के पहले आम चुनाव में भारत में मतदाताओं की संख्या 17 करोड़ से ज्यादा थी। सुकुमार सेन की ही बदौलत प्रत्याशियों ने 4500 सीटों पर चुनाव लड़ा जिनमें से 489 सीटें लोकसभा चुनाव की थी और बाकी राज्यों के विधानसभा की। चुनाव के लिए भारत भर में  2,24,000 मतदान केंद्र बने और 56,000 अधिकारियों की तैनाती हुई। छह महीने के कॉन्ट्रैक्ट पर 16,500 क्लर्कों को चुनाव के लिए नियुक्त किया गया। 20 लाख से ज्यादा स्टील के बक्से बनाए गए। उस वक्त चुनाव बैलेट पेपर के जरिए हुआ था। स्टील के बक्से बनाने में 8200 टन स्टील लगा। उसके बाद सबसे बड़ी चुनौती थी इन स्टील के बक्सों को अलग-अलग पोलिंग बूथ तक कैसे ले जाया जाए।

जब चुनाव के लिए सुकुमार को बुलाया विदेश

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सुकुमार सेन को भारत में सफल इलेक्शन कराने के बाद सूडान भी इलेक्शन कराने के लिए बुलाया गया।

इसके लिए 280,000 सहायक लगाए गए। 224,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों ने इस चुनाव को संपन्न करवाया। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में चुनाव ढांचे के जनक सुकुमार सेन को इसके लिए कितनी मशक्कत करनी पड़ी होगी। इसकी बदौलत ही सुकमार सेन को सूडान में भी चुनाव करने के लिए बुलाया गया। सुकुमार सेन के काम से प्रभावित होकर सूडान ने उन्हें अपने यहां पहले संसदीय चुनाव कराने के लिए आमंत्रित किया।

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भारत के दूसरे आम चुनाव का बचाया था खर्च

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कहा जाता है कि सुकुमार सेन की बदौलत ही भारत के दूसरे आम चुनाव में सिर्फ 4.5 करोड़ रुपए से भी कम का खर्चा आया था।

सुकुमार सेन ने न सिर्फ भारत का पहला लोकसभा चुनाव संन्न करवाया बल्कि उन्होंने 1957 का दूसरा लोकसभा चुनाव भी करवाया। कहा जाता है कि सुकुमार सेन की बदौलत ही भारत के दूसरे आम चुनाव में 4.5 करोड़ रुपए की बचत हो सकी। क्योंकि सुकुमार सेन ने पहले आम चुनाव के लाखों बैलेट बॉक्स को बचा लिया था और दूसरे लोकसभा चुनाव में भी इन्हीं बैलेट बॉक्स का इस्तेमाल हुआ। चुनाव प्रक्रिया में सुकुमार सेन के इसी योगदान की बदौलत उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। सही मायने में कहा जाए तो सुकुमार सेन भारतीय लोकतंत्र के असली हीरो थे।

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