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महासंग्राम 2019: एक नमो रथ पर रोज का खर्च आठ हजार रुपए, कमाई पांच सौ भी नहीं
Mon, 11 Mar 2019 12:47 AM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Mon, 11 Mar 2019 12:47 AM IST
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नमो रथ
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने गत चार मार्च को पार्टी ऑफिस से नमो रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इनके माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम और तस्वीरों से छपी विभिन्न सामग्रियों को बेचा जा रहा है। लेकिन खबर है कि इन रथों से सामानों की बिक्री न के बराबर हो रही है, जबकि एक रथ को चलाने पर प्रतिदिन के हिसाब से लगभग आठ हजार रुपये का खर्च आ रहा है। अकेले दिल्ली में ऐसे आठ वाहन चलाए जा रहे हैं। इस तरह रोज का खर्च साठ हजार रुपये से अधिक का आ रहा है।
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एक वाहन पर कितना खर्च
पार्टी मुख्यालय पर खड़े वाहन पर काम कर रहे एक कर्मचारी के मुताबिक हर छोटी गाड़ी का प्रतिदिन का किराया पांच हजार रुपए है। प्रत्येक वाहन पर एक ड्राइवर के अलावा दो लड़कों को नियुक्त किया गया है। ड्राइवरों को रोजाना के हिसाब से एक हजार रुपए और बाकी दोनों लड़कों को पांच-पांच सौ रुपए दिए जा रहे हैं। इसके अलावा वाहन पर काम कर रहे लोगों को दोनों समय का भोजन और नाश्ते का खर्च अलग से दिया जा रहा है। इन सबको जोड़कर एक वाहन पर रोजाना के हिसाब से लगभग आठ हजार रुपए का खर्च आ रहा है। वाहन चलने में लगने वाला ईंधन इससे अलग है।
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कितनी हो रही बिक्री
कर्मचारी ने बताया कि चार मार्च से ही वे अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों में जाकर सामानों की बिक्री करने की कोशिश कर रहे हैं। वाहनों की बनावट, सजावट और स्टैंड पर लगे सामानों को देखने के लिए काफी संख्या में लोग वाहन के पास आ जाते हैं। लेकिन सामान खरीदने की बात करें तो बहुत कम ही लोग इन सामानों को खरीद रहे हैं। कभी-कभी ही कुछ छोटे सामानों की बिक्री होती है। ज्यादातर मामलों में लोग उन्हें एक प्रचार वाहन समझते हैं और उनसे मुफ्त में सामान पाने की उम्मीद करते हैं। लेकिन, दाम चुकाने की बात आते ही आगे बढ़ जाते हैं।
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क्या बिक रहा
नमो मर्चेंडाइज के तहत बेचे जा रहे इन सामानों में मोदी हुडी (500 रुपए), टी शर्ट (200-300 रुपए), बैनर (50 रुपए), टोपी (100 रुपए), नमो मग (175 रुपए में दो), सौ रुपए प्रत्येक में नोटबुक, स्टिकर (50 रुपए में एक शीट) और पेन-छल्ले जैसी चीजें बेची जा रही हैं।
क्या कहते हैं कंपनी के अधिकारी
नमो मर्चेंडाइज से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि यह सच है कि इन वाहनों के जरिए सामानों की ज्यादा बिक्री नहीं हो रही है। लेकिन इसे उनकी कंपनी का प्रचार वाहन समझा जाना चाहिए। क्योंकि इन वाहनों के जरिए उनके उत्पादों के बारे में लोगों को पता चल रहा है। कंपनी के ऑन लाइन बाजार पर उन्हें भारी मात्रा में थोक ऑर्डर मिल रहे हैं। कई बार तो लाखों रुपयों का ऑर्डर एक ही बार में मिल रहा है।
अधिकारी के मुताबिक पार्टी के ऐसे कार्यकर्ता जो चुनाव लड़ने को इच्छुक हैं, जब वे कोई राजनीतिक कार्यक्रम करते हैं तब कार्यकर्ताओं और जनता के बीच बांटने के लिए थोक ऑर्डर देते हैं जिसके माध्यम से उनकी अच्छी कमाई हो रही है।
अधिकारी ने बताया कि सामानों को न्यूनतम संभव मूल्य पर बेचा जा रहा है क्योंकि इनका उद्देश्य लाभ कमाना नहीं है। इन सामानों की बिक्री से प्राप्त हुई पूरी रकम 'नमामि गंगे' योजना को समर्पित किया जाएगा।