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साक्षात्कार: चुनाव लड़ने के लिए नहीं जीतने के लिए लड़ते हैं: प्रकाश जावड़ेकर

Sun, 14 Apr 2019 06:45 AM IST
vivek shukla न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: vivek shukla Updated Sun, 14 Apr 2019 06:45 AM IST
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Lok sabha election 2019: hrd minister prakash javadekar interview in amar ujala
प्रकाश जावड़ेकर - फोटो : Amar Ujala
मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर राजस्थान के चुनाव प्रभारी भी हैं, जहां तीन महीने पहले ही भाजपा विधानसभा चुनाव हारी है। ऐसे में चुनावी चुनौतियों, तैयारियों और उपलब्धियों के बारे में उन्होंने शरद गुप्ता से बात की। प्रस्तुत हैं साक्षात्कार के मुख्य अंश...
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राजस्थान में चार महीने पहले भाजपा विधानसभा चुनाव हारी थी। ऐसे में 2014 की शत प्रतिशत सफलता कैसे दोहराएंगे?
मतदाता बहुत समझदार हैं। लोकसभा व विस चुनाव में अलग तरह से वोटिंग करते हैं। 1999 में महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना सरकार थी। मार्च 2000 में विस चुनाव होने थे। केंद्र में अटलजी की सरकार एक वोट से हार गई। प्रमोद महाजन ने कहा, साथ चुनाव होने से हमें विधानसभा में भी अटलजी की लोकप्रियता का फायदा मिल जाएगा। एक ही दिन दोनों चुनाव हुए। लोकसभा में हमें 40% वोट मिले व विधानसभा में 30%। हम विधानसभा चुनाव हार गए। इसलिए भरोसा है कि हम राजस्थान की सभी 25 सीटें जीतेंगे।
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आप विकास व राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं, विपक्ष बेरोजगारी, गरीबी और किसानों की समस्याओं की। क्या ज्यादा अपील करेगा?
जनता की पहली इच्छा होती है,देश सुरक्षित रहे। लोगों को विश्वास हो गया कि मोदी के हाथों देश सुरक्षित है। 2008 में जब आतंकियों ने मुंबई में हमला किया था तो सेना ने मनमोहन सिंह से पाकिस्तान में आतंक के अड्डे खत्म करने की इजाजत मांगी थी, लेकिन उन्होंने नहीं दी। जब मोदी के पास प्रस्ताव आया तो उन्होंने तुरंत हां कह दिया। इसी तरह मिशन शक्ति के लिए डीआरडीओ ने 2010 में इजाजत मांगी थी, जो नहीं दी गई। अब मोदी ने दी है।
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यानी विकास का मुद्दा गौण हो गया है?
नहीं! दूसरा मुद्दा देश की तरक्की का है। लोगों को भरोसा है कि वह भी मोदी जी ही करेंगे। पिछले पांच साल में ढाई करोड़ लोगों को आवास मिला, नौ करोड़ लोगों को टॉयलेट मिले, छह करोड़ लोगों को गैस का चूल्हा मिला, दस हजार किमी. के हाईवे बनाया वाटरवेज और एयरपोर्ट इतने बने जो पिछले 70 साल में नहीं बने थे। हम विश्व की 11वें नंबर की अर्थव्यवस्था से छठे नंबर पर पहुंच गए। एक भी मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप न लगना, कोई आम बात नहीं है।

आप किसान को 6 हजार  साल दे रहे हैं जबकि कांग्रेस न्याय में छह हजार रुपये महीने की बात कर रही है। नहीं लगता लोग इससे प्रभावित होंगे?
जिसके सत्ता में आने की उम्मीद ही नहीं, वह साठ हजार की घोषणा भी कर दे, तो क्या अर्थ है। हमारी ठोस योजनाओं का कांग्रेस के हवा हवाई वादों से कोई मुकाबला नहीं है। 

पहले भी देश ने अंतरिक्ष में कई उपलब्धियां हासिल कीं, लेकिन किसी पीएम ने संदेश नहीं दिया। कांग्रेस उन्हें प्रचारमंत्री कहती है?
हर प्रधानमंत्री को ऐसे अवसरों पर देश की तरफ से अपने वैज्ञानिकों को बधाई देनी चाहिए। यह तो देश का गौरव बढ़ाने की बात है। पीएम ने यह तो नहीं कहा-भाजपा को वोट दो। तो क्या परेशानी है? हमें कहते हैं, ये देशभक्ति का माहौल बना रहे हैं, राष्ट्रवाद की बात कर रहे हैं। तो राष्ट्रद्रोह का माहौल बनाना चाहिए?

पार्टी में ऐसे लोग भी शामिल हो रहे हैं, जिनकी वैचारिक प्रतिबद्धता नहीं है?
हम 450 से ज्यादा सीटों पर लड़ रहे हैं। ऐसे में बाहर से लाकर जिनको टिकट दिया ऐसे केवल आठ-दस लोग ही तो होंगे और फिर चुनाव जीतने के लिए ही लड़ा जाता है। केवल लड़ने के लिए थोड़े ही मैदान में उतरा जाता है।


बुजुर्ग नेताओं को जबरन रिटायर कराया जा रहा है?
यह प्राकृतिक प्रवाह है। आडवाणी नए नए लोगों को लाए थे। अभी भी नए लोगों को लाया जा रहा है, लेकिन उनके लिए जगह तो बनानी पड़ेगी न। खुद नानाजी देशमुख ने 60 साल की उम्र में संसद से इस्तीफा दे दिया था और कहा था, साठ के बाद सबको चुनावी राजनीति छोड़ देनी चाहिए। अब उसे 60 की जगह 75 कर दिया गया क्योंकि लोगों का स्वास्थ्य अब पहले के मुकाबले बेहतर रहता है। इसलिए हमारे सभी वरिष्ठ नेताओं ने खुद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया।
 
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