लोकसभा चुनाव 2019 : कम अंतर वाली सीटों पर सपा-बसपा में भ्रम की स्थिति
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अब जब सपा-बसपा के बीच अगले लोकसभा चुनाव में बराबर-बराबर सीटें लड़ने का समझौता हो गया है तो दोनों ही दलों के सामने समस्या सूबे की 16 सीटों को लेकर है कि किस सीट पर कौन सी पार्टी उम्मीदवार उतारेगी। दरअसल इन सीटों पर दोनों ही दलों के प्रत्याशियों के बीच का अंतर दो फीसदी से भी कम था।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र से 2014 के चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रवि शंकर सिंह 1,59,871 वोट पाकर भाजपा उम्मीदवार के बाद दूसरे स्थान पर रहे थे जबकि समाजवादी पार्टी के हरिशंकर सहाय कुशवाहा 1,59,688 वोट पाकर तीसरे। यानी 16.61 लाख मतदाताओं वाले क्षेत्र में दोनों के बीच सिर्फ 183 वोट (.01 फीसदी वोट का अंतर)।
इसी तरह धौरहरा सीट पर बसपा के दाऊद अहमद और सपा के आनंद भदौरिया के बीच केवल 650 वोटों का फर्क था। यानी दोनों को मिल मतों में सिर्फ .06 फीसदी का अंतर। हरदोई में बसपा के शिव प्रसाद वर्मा को और सपा की उषा वर्मा को मिले मतों के बीच भी 2615 (.27 प्रतिशत) का अंतर था।
अलीगढ़ में बसपा के डॉ. अरविंद कुमार सिंह और सपा के जफर आलम को मिले वोटों में 1692 (.15 प्रतिशत) का अंतर रहा। हालांकि सुल्तानपुर, उन्नाव, बाराबंकी, हमीरपुर, शाहजहांपुर, डुमरियागंज, संत कबीरनगर, महराजगंज, पडरौना, पीलीभीत वाराणसी और भदोही मे अंतर इतना कम भले ही नहीं था लेकिन फिर भी कुल वैध वोटों के दो प्रतिशत से कम रहा।
बसपा की सूची एक हफ्ते टली
सीटें चिह्नित न हो पाने की वजह से बसपा अध्यक्ष मायावती ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित करना स्थगित कर दिया है। हालांकि वे अपना जन्मदिन मंगलवार को दिल्ली में धूमधाम से मनाएंगी जिसमें चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों के बढ़ चढ़ कर भाग लेने की संभावना है। अब उनके उम्मीदवारों की सूची सप्ताहांत आएगी या फिर अगले सप्ताह।
ये था दावा
पिछले चुनाव में सपा ने पांच सीटें जीती थीं और 31 पर दूसरे स्थान पर आई थी। यानी केवल 36 सीटों पर उसका दावा था। हालांकि उपचुनाव में फूलपुर, गोरखपुर और कैराना में जीतकर उसका दावा 39 सीटों पर हो गया था। वहीं बसपा जीती एक भी नहीं लेकिन 34 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। लेकिन दोनों दलों ने 38-38 सीटें लड़ने का फैसला किया है। कांग्रेस वे दो सीटें जीती थीं और छह सीटों पर उसके उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे। संभवत: इसी वजह से उसने इस गठबंधन से अलग लड़ने का फैसला किया है।