प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आसाराम बापू का बेटा बताने वाली वायरल तस्वीर का पूरा सच
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इन दिनों सोशल मीडिया पर अखबार की एक कटिंग वायरल हो रही है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आसाराम बापू के बेटे हैं। लोग इस खबर को तरह-तरह के मैसेज के साथ शेयर कर रहे हैं। देखने में ये किसी अखबार में छपी खबर जैसा लग रहा है। खबर की हेडलाइन में बड़े अक्षरों में लिखा है कि 'अमेरिकी डीएनए विशेषज्ञ का दावा आसाराम के बेटे हैं मोदी'। खबर के अंदर लिखा है 'अमेरिका में रहने वाले डीएनए विशेषज्ञ डॉक्टर मॉर्टिन सिजो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके चौंकाने वाला दावा किया है। डॉ मार्टिन का कहना है कि उनके पास आसाराम और नरेंद्र मोदी के डीएनए है। इनके डीएनए आपस में मैच कर रहे हैं. डॉ मार्टिन ने कहा कि वो भारत सरकार को सारे सबूत देने को तैयार हैं। जिसके बाद साबित हो जाएगा कि मोदी आसाराम के बेटे हैं। भाजपा ने डॉ मार्टिन के दावे पर फिलहाल चुप्पी साध ली है। कोई भी भाजपा नेता इस मामले पर कुछ बोलने को तैयार नहीं है।'
क्या कहती है अमर उजाला की पड़ताल?
अमर उजाला ने इस खबर की पड़ताल की तो कुछ ऐसी बातें सामने आईं जिनसे यह साफ होता है कि सोशल मीडिया का यह दावा पूरी तरह झूठा है। इसे जानबूझ कर गलत खबर फैलाने के इरादे से वायरल किया जा रहा है। यह तस्वीर सबसे पहले 1 जनवरी को ट्विटर पर शेख अम्मास नाम के एक व्यक्ति ने @SheikhA51764243 अकाउंट से शेयर की थी।
कैसे पता चलता है कि खबर फर्जी है-
- इंटरनेट पर डीएनए विशेषज्ञ डॉ मार्टिन सिजो के बारे में कोई ठोस जानकारी नहीं मिलती है और अगर उन्होंने इस मामले में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की होती, तो न्यूज मीडिया ने कवर किया होता, लेकिन किसी भी मीडिया ग्रुप से ऐसी कोई खबर नहीं मिली है।
- खबर की जो तस्वीर साझा की जा रही है उसमें अखबार या उसके किसी सूत्र का नाम नहीं दिख रहा है। यह पता ही नहीं चल पा रहा है कि खबर किस अखबार में छपी है।
- किसी भी अखबार में छपी खबर को लिखने का एक तरीका होता है। एक खबर की सारी पंक्तियां एक लाइन से लिखी होती हैं। इस वायरल तस्वीर को ध्यान से देखने और पढ़ने पर आपको साफ नजर आएगा कि खबर में किसी तरह का अनुशासन नहीं है, कोई भी पंक्ति कहीं से भी शुरू और कहीं भी खत्म हो रही है। इसलिए यह असली अखबार की तस्वीर नहीं हो सकती।
- पड़ताल के दौरान ऐसी ही एक पुरानी तस्वीर मिली जिसमें राहुल गांधी और राजीव गांधी के बारे में भी झूठा दावा किया गया था। वो खबर भी बिल्कुल गलत थी।
दरअसल अखबार की ऐसी तस्वीरें इंटरनेट और तमाम तरह की तकनीकों की मदद से बड़ी आसानी से बनाई जा सकती हैं। इस तस्वीर के साथ भी यही किया गया है।
आपके लिए
अगर आपको भी सोशल मीडिया में वायरल हो रही किसी खबर पर संदेह है, तो कमेंट बॉक्स में लिखें। अमर उजाला , खबर की पड़ताल करेगा और सच्चाई आपके सामने होगी।