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करोड़ों में हैं दिव्यांग मतदाता, इस तरह दिलाया जा रहा उनका मतदान
Tue, 14 May 2019 09:44 PM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Tue, 14 May 2019 09:44 PM IST
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लोकसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग देश के चुनाव में मतदान फीसद बढ़ाने के लिए हमेशा प्रयास करता रहता है। इसी कड़ी में उसकी यह कोशिश होती है कि दिव्यांग लोग भी अपने मताधिकार से वंचित न रहें। उनकी सुविधा के लिए दिव्यांगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने के लिए और मतदान के समय भी उनको मदद देने के प्रयास किये जाते हैं। दिल्ली में रविवार को संपन्न हुए मतदान में भी चुनाव आयोग ने दिव्यांगों को विशेष सुविधाएं दिलवाईं और उनका मतदान करवाया। दिव्यांग मतदाताओं से विशेष तरीके से व्यवहार करने के लिए चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया।
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चुनाव अधिकारियों को दिव्यांग मतदाताओं से व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षित करने वाली संस्था 'स्वयं' के निदेशक सुभाष चंद्र वशिष्ठ ने अमर उजाला को बताया कि हमारे समाज में दिव्यांगों के लिए अभी भी बहुत अधिक बाधाएं हैं। मोबिलिटी की परेशानी के चलते लोग दिव्यांगों को अनेक कार्यक्रमों में ले जाने से भी बचते हैं। ऐसे में चुनाव के लिए दिव्यांगों को बाहर लाना एक बड़ी चुनौती होती है। इसके साथ ही इमारतों की संरचना अभी भी दिव्यांगों के अनुकूल नहीं होती है। जिसके कारण परेशानी बढ़ती है। लेकिन तमाम प्रयासों से इस क्षेत्र में अब सकारात्मक बदलाव हो रहे हैं और दिव्यांग मतदाताओं के मताधिकार को भी सुनिश्चित कराया जा रहा है।
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सुभाष चंद्र वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने दिल्ली में इस बार छह विशेष डिजाइन से बनी वैन को विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं को दान दिलवाया था। विशेष डिजाइन के कारण इन वाहनों में दिव्यांगों को चढ़ाना और वापस उतारना अपेक्षाकृत बेहद आसान होता है। हालांकि इसके लिए वे वाहन से जुड़े लोगों को तकनीकी मदद उपलब्ध करवाते हैं। उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग के सहयोग से इस बार दिल्ली में अधिकांश दिव्यांग मतदाताओं का मतदान सुनिश्चित करवाया जा सका।
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वशिष्ठ के मुताबिक शहरों में तो दिव्यांगों को कहीं ले आना या ले जाना आसान होता है क्योंकि एक तो यहां विशेष वाहनों की पहुंच बनाया जाना आसान है लेकिन गांवों में दिव्यांगों को मतदान केंद्रों तक पहुंचाना अभी भी बड़ी चुनौती है जहां दिव्यांगों की बहुत बड़ी आबादी रहती है।
भारत में ढाई करोड़ से ज्यादा दिव्यांग
आंकड़ों के मुताबिक, 2001 में दिव्यांगों की संख्या कुल आबादी के 2.13 फीसदी थी, जो 2011 में कुल आबादी की 2.21 फीसदी हो गई थी। संख्या में यह आंकड़ा लगभग 2.68 करोड़ था जो मतदान के लिहाज से एक बड़ी संख्या थी। इन दिव्यांगों में पुरुष दिव्यांगों की संख्या 1.5 करोड़ और महिला दिव्यांगों की संख्या 1.18 करोड़ थी। दिव्यांगों के लिहाज से एक आंकड़ा ज्यादा ध्यान आकर्षित करने वाला है। शहरी क्षेत्र में दिव्यांगों की संख्या 0.81 करोड़ थी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 1.86 करोड़ दिव्यांग रहते थे। इस क्षेत्र में काम कर रहे विशेषज्ञों के मुताबिक आज की स्थिति में यह आंकड़ा और अधिक बढ़ चुका है क्योंकि अनेक कारणों से दिव्यांगों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
वर्ष 2011 में की गई जनगणना के मुताबिक देश के कुल दिव्यांगों में सबसे बड़ा हिस्सा चलने (मोबिलिटी) और दृष्टि से बाधित लोगों की है। आंकड़ों के मुताबिक कुल दिव्यांगों में बीस फीसदी चलने में बाधित और 19 फीसदी दृष्टिबाधित और 19 फीसदी श्रवणबाधित दिव्यांग हैं। श्रवणबाधित दिव्यांग को छोड़ बाकी के दिव्यांगों को कहीं भी पहुंचने में बहुत बाधा आती है जो उन्हें मतदान करने में बड़ी बाधा पैदा करता है। इन बाधाओं को समाज के सहयोग से ही पीछे छोड़ा जा सकता है।