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उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले की जानकारी को लेकर चुनाव आयोग का नया निर्देश
Wed, 15 May 2019 08:13 PM IST
Trainee Trainee
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Wed, 15 May 2019 08:13 PM IST
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चुनाव आयोग (फाइल फोटो)
- फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने आपराधिक मामलों की जानकारी जनता को देने के लिए आदेश दिया था। अदालत ने कहा था कि प्रत्याशी अपने आपराधिक मामलों के बारे में जनता को अखबार, टीवी और रेडियो के जरिए तीन बार प्रचार कर के जनता को बताएं। अब चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है कि वो इसे लेकर प्रचार में की गई खर्च की राशि को चुनाव खर्च के स्टेटमेंट में दिखाएं।
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चुनाव आयोग ने ताजा जारी निर्देश में कहा है इसके लिए चुनावी खर्च में दर्शाने के लिए नया फॉर्मेट जारी कर दिया गया है। इसमें प्रत्याशियों को आपराधिक मामलों की जानकारी प्रकाशित करने में हुए खर्च का ब्यौरा देने के लिए एक अलग से कॉलम बनाया गया है।
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सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए निर्देश में आयोग ने कहा है कि आरपी एक्ट 1951 की धारा 78 के तहत सभी दलों को चुनाव खर्च का अनुमानित हिसाब नतीजे आने के बाद 30 दिनों में देना अनिवार्य है।
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मालूम हो कि आपराधिक मामलों के प्रचार का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में एक जनहित याचिका के आधार पर दिया था। इस याचिका में मांग की गई थी कि ऐसे उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका जाए जिनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामलों में कोर्ट में आरोप तय हो चुके हैं, तभी राजनीति में सुधार आएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि महज आरोप के आधार पर किसी को भी चुनाव लड़ने से रोका नहीं जा सकता। लेकिन आपराधिक मामले के उम्मीदवारों को अपने आपराधिक रिकार्ड का ब्योरा अखबारों और टीवी में तीन बार दिखाने होंगे, ताकि वोटर को पता चल सके कि उसका प्रत्याशी कैसा है।