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पूर्वांचल की सीटों पर पीएम मोदी के लिए साइकिल से प्रचार करने निकले डंडा गुरू
Sun, 12 May 2019 05:37 PM IST
Abhishek Singh
भाषा, प्रयागराज
भाषा, प्रयागराज
Published by: Abhishek Singh
Updated Sun, 12 May 2019 05:37 PM IST
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डंडा गुरु
- फोटो : Social Media
लोगों के बीच डंडा गुरु के नाम से चर्चित तारा शंकर मिश्र उर्फ शास्त्री ने प्रयागराज और फूलपुर संसदीय सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में प्रचार करने के बाद अब वाराणसी में अपना खूंटा गाड़ दिया है। इस चिलचिलाती धूप और गर्मी में जहां लोग मतदान के लिए घर से निकलने में परहेज करते हैं, वहीं 56 वर्ष की आयु में डंडा गुरु सुबह से शाम तक साइकिल पर घूम-घूम कर मतदान की अपील करते हैं।
प्रयागराज के गंगापार झूंसी स्थित हवासपुर गांव के निवासी डंडा गुरु ने बताया कि मैं पिछले 26 वर्षों से साइकिल से हिंदुत्व के लिए प्रचार करता रहा हूं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे लगा कि यही पार्टी (भाजपा) हिंदुओं के हितों की रक्षा कर सकती है। तब से मैंने भाजपा के लिए प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को छोड़ दें तो अन्य सभी पार्टियां गंगा, गऊ माता, राम मंदिर के मुद्दे पर हिंदुओं पर हमला करती हैं।
इन दिनों देवरिया, गोरखपुर, गाजीपुर और वाराणसी में साइकिल से प्रचार के लिए निकले डंडा गुरु ने बताया कि अब तक मैं उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र का दौरा कर चुका हूं।
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यह पूछे जाने पर कि उनकी यात्रा आदि का खर्च कैसे निकलता है, उन्होंने बताया कि मेरी यात्रा का खर्च कोई पार्टी नहीं उठाती। मुझे किसी की खुशामद करना पसंद नहीं। हिंदू बिरादरी के लोग अपनी श्रद्धा से रूपये या सामान दे देते हैं। मेरे पास सामान के नाम पर साइकिल, दो जोड़ी कपड़े और खाने पीने की कुछ सामग्री होती है।
उनका नाम डंडा गुरु कैसे पड़ा? इस पर तारा शंकर मिश्र ने बताया कि गांव में एक नर्सरी स्कूल में उन्हें शिक्षक की नौकरी मिली थी। तब वह एक डंडा अपने पास रखते और बच्चों को पढ़ने के लिए डंडे का भय दिखाते थे। जब भी वह किसी विद्यार्थी के घर जाते, उसके अभिभावक कहते कि देखो डंडा गुरु आए हैं और वह डंडा गुरु कहलाने लगे।
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प्रयागराज के गंगापार झूंसी स्थित हवासपुर गांव के निवासी डंडा गुरु ने बताया कि मैं पिछले 26 वर्षों से साइकिल से हिंदुत्व के लिए प्रचार करता रहा हूं। अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्री बनने के बाद मुझे लगा कि यही पार्टी (भाजपा) हिंदुओं के हितों की रक्षा कर सकती है। तब से मैंने भाजपा के लिए प्रचार शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि भाजपा को छोड़ दें तो अन्य सभी पार्टियां गंगा, गऊ माता, राम मंदिर के मुद्दे पर हिंदुओं पर हमला करती हैं।
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इन दिनों देवरिया, गोरखपुर, गाजीपुर और वाराणसी में साइकिल से प्रचार के लिए निकले डंडा गुरु ने बताया कि अब तक मैं उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र का दौरा कर चुका हूं।
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यह पूछे जाने पर कि उनकी यात्रा आदि का खर्च कैसे निकलता है, उन्होंने बताया कि मेरी यात्रा का खर्च कोई पार्टी नहीं उठाती। मुझे किसी की खुशामद करना पसंद नहीं। हिंदू बिरादरी के लोग अपनी श्रद्धा से रूपये या सामान दे देते हैं। मेरे पास सामान के नाम पर साइकिल, दो जोड़ी कपड़े और खाने पीने की कुछ सामग्री होती है।
उनका नाम डंडा गुरु कैसे पड़ा? इस पर तारा शंकर मिश्र ने बताया कि गांव में एक नर्सरी स्कूल में उन्हें शिक्षक की नौकरी मिली थी। तब वह एक डंडा अपने पास रखते और बच्चों को पढ़ने के लिए डंडे का भय दिखाते थे। जब भी वह किसी विद्यार्थी के घर जाते, उसके अभिभावक कहते कि देखो डंडा गुरु आए हैं और वह डंडा गुरु कहलाने लगे।