लोकसभा चुनाव की जंग में भाजपा ने बनाया व्हाट्सएप को हथियार, बनाई ये खास रणनीति
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सोशल मीडिया लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रमुख मंच बन चुका है। चुनाव में हर राजनीतिक दल इसका जमकर इस्तेमाल भी कर रहे हैं। लेकिन व्हाट्सएप सोशल मीडिया के सभी मंचों में सबसे ज्यादा कारगर और विश्वसनीय मंच बनकर उभरा है। यही कारण है कि भाजपा ने जनता तक पहुंचने के लिए इसे अपना सबसे प्रमुख हथियार बनाया है। पार्टी ने केन्द्रीय स्तर से लेकर बूथ स्तर तक सोशल मीडिया प्रभारियों की नियुक्ति की है। इनके जरिये पार्टी लोगों तक अपनी बात पहुंचा रही है।
व्हाट्सएप ही क्यों?
सोशल मीडिया में ट्विटर नेताओं की पहली पसंद है। वे इसके जरिये अपनी बात लोगों तक पहुंचाते हैं। फेसबुक दूसरा बड़ा मंच है जिसके जरिये लोग अपने विचारों को प्रस्तुत कर रहे हैं। लेकिन व्हाट्सएप इन सभी माध्यमों से अलग महत्त्व रखता है। इसका कारण यह है कि जो लोग ट्विटर या फेसबुक का इस्तेमाल नहीं भी करते हैं, वे भी व्हाट्सएप का खूब इस्तेमाल करते हैं। भाजपा की आईटी टीम के एक सदस्य ने अमर उजाला को बताया कि हमने अपने अध्ययन में पाया है कि ट्विटर एक विशेष वर्ग के लोगों तक सीमित है। फेसबुक ट्विटर से ज्यादा लोकप्रिय है, लेकिन इसके बाद भी इसकी पहुंच सीमित है। दूसरे लोग फेसबुक एकाउंट को फ्री होने पर ही देखते हैं, जबकि व्हाट्सएप ऐसा माध्यम है जिसे लोग एक ही दिन में कई बार चेक करते हैं। फ्री न होने पर भी वे कई बार व्हाट्सएप का इस्तेमाल करते हैं क्योंकि कभी पारिवारिक तो कभी ऑफिस से जुड़ी जानकारी उन्हें इसके माध्यम से लेनी-देनी पड़ती है।
ट्विटर या फेसबुक अकाउंट पर दिन में दो-चार बार जाने वाले भी अपने व्हाट्सएप पर दिन में 20 से 50 बार या इससे भी अधिक बार जाते हैं। नेता के मुताबिक, इसके लावा व्हाट्सएप का सबसे बड़ा फायदा यह है कि लोगों की बात लोगों की भाषा में पहुंच रही है। इसमें आकर्षक वीडियो, ऑडियो, चित्र या टेक्स्ट मैसेज कुछ भी हो सकता है। इसे खुद ही खूब फॉरवर्ड भी करते हैं, जबकि ट्विटर या फेसबुक पर इस तरह की बात नहीं होती है।
टीम की तैयारी
भाजपा के केन्द्रीय कार्यालय पर आईटी सेल के 15 लोगों की एक विशेष टीम काम कर रही है जो देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग भाषाओं की जरूरतों के हिसाब से कंटेंट तैयार कर रही है। इनके नीचे ग्राफिक डिजाइनर और वीडियो एडिटर रखे गये हैं जो किसी कंटेंट को लोगों की रुचि के हिसाब से अंतिम रूप दे रहे हैं। बूथ स्तर का काम सबसे प्रमुख हैं। इसके अलावा राज्य, पार्टी के जोन, जिला, लोकसभा क्षेत्र और मंडल स्तर पर सोशल मीडिया प्रमुखों की नियुक्ति की गई है। नेता के मुताबिक सबसे महत्त्वपूर्ण भूमिका बूथ स्तर पर नियुक्त सोशल मीडिया प्रमुख की है। किसी भी बूथ पर औसतन एक हजार से बारह सौ वोट होते हैं। बूथ स्तर के कार्यकर्ता को कम से कम पांच व्हाट्सएअप ग्रुप बनाने के लिए कहा गया है। एक व्हाट्सएप ग्रुप में अधिकतम 256 सदस्य हो सकते हैं।
इस प्रकार पांच व्हाट्सएप ग्रुप में बूथ के हर परिवार, हर वोटर और हर सक्रिय स्मार्ट फोन यूजर तक पार्टी की पहुंच हो जाएगी। पार्टी की रणनीति है कि सरकार की योजनाएं लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन जाएं। व्हाट्सएप इसमें प्रमुख भूमिका निभा रहा है। पार्टी का विचार है कि इसके माध्यम से लोगों तक वे सभी संदेश पहुंचाए जा सकें जो मोदी सरकार ने पिछले पांच सालों में किये हैं। लाभार्थियों की जानकारी पास पड़ोस के सभी लोगों को दी जा सके जिससे वे सरकार के सकारात्मक प्रयासों को समझें और सरकार की वापसी के लिए वोट करें।
व्हाट्सएप पूरी दुनिया की तरह भारत में भी बहुत तेजी से लोकप्रिय हुआ है। एक आंकड़े के मुताबिक पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2014 में भारत में व्हाट्सएप के 5 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता थे। फरवरी 2017 तक व्हाट्सएप का इस्तेमाल करने वालों की संख्या चार गुना बढ़कर 20 करोड़ हो चुकी थी। ध्यान रहे कि यह संख्या पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिले कुल वोटों की संख्या (लगभग साढ़े 17 करोड़) से भी ज्यादा है। इसी से समझा जा सकता है कि पार्टी ने व्हाट्सएप को इतनी अहमियत क्यों दे रखी है।