{"_id":"5cc6ba25bdec22070518bb4e","slug":"lok-sabha-chunav-2019-battle-of-asansol-and-political-journey-of-babul-supriyo","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"आसनसोल सीट: बाबुल सुप्रियो Vs मुनमुन सेन की जंग ने दिलचस्प बनाया मुकाबला ","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
आसनसोल सीट: बाबुल सुप्रियो Vs मुनमुन सेन की जंग ने दिलचस्प बनाया मुकाबला
Mon, 29 Apr 2019 02:43 PM IST
Trainee Trainee
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Mon, 29 Apr 2019 02:43 PM IST
विज्ञापन
आसनसोल
- फोटो : Amar Ujala
लोकसभा चुनाव 2019 की लड़ाई में इस बार पश्चिम बंगाल बेहद चर्चा में है। यहां की कुछ सीटें ऐसी हैं जो उम्मीदवारों के चलते चर्चा में है। इन्हीं में एक सीट है आसनसोल।
विज्ञापन
कोलकाता के बाद पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा शहर है आसनसोल। यह शहर छोटा नागपुर के पठार के लगभग मध्य में प्रदेश के पश्चिमी सीमा पर स्थित है। खनिज पदार्थों केमामले में आसनसोल धनी है और उद्योग धंधे भी फल-फूल रहे हैं। यह शहर भारत के उन 11 शहरों में से एक है जो विश्व के 100 सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों की सूची में हैं।
विज्ञापन
अगर आप चाहते हैं कि आपको किसी एक राजनीतिक पार्टी के झुकाव रखने वाले के तौर पर नहीं जाना जाए तो आप आसनसोल के लोगों के पदचिह्नों पर चल सकते हैं। वे हर राजनीतिक पार्टी की बैठक में शामिल होते हैं ताकि उन्हें किसी एक दल से जोड़कर नहीं देखा जाए। पश्चिम बंगाल के महानगरीय चरित्र वाले शहर और कोयला कारोबार के प्रमुख केंद्र आसनसोल के लोग खुलकर अपनी राजनीतिक प्राथमिकताओं के बारे में बात करने से बचते हैं। लोगों का कहना है कि इस प्रकार की बात करने के लिए माहौल ठीक नहीं है। यहां का सियासी इतिहास हिंसा का गवाही रहा है।
विज्ञापन
2014 में बाबुल सुप्रियो जीते
आसनसोल लोकसभा सीट पर वर्तमान सांसद है भाजपा के बाबुल सुप्रियो। वह केंद्र में राज्यमंत्री भी हैं। 2014 में बाबुल ने टीएमसी की डोला सेन को 70 हजार वोटों से हराया था। इस बार यहां बाबुल का मुकाबला टीएमसी उम्मीदवार मुनमुन सेन से हैं जिन्होंने 2014 में बांकुरा से चुनाव लड़ा था। दोनों के बीच इस बार जबरदस्त जंग है। 2014 में यहां 77.76 फीसदी मतदान हुआ था। यहां कुल 1,142786 मतदाता हैं। महिला वोटरों की संख्या 509230 है।
आसनसोल-दुर्गापुर क्षेत्र 2014 के लोकसभा चुनाव से राज्य में राजनीतिक और सांप्रदायिक रूप से अशांत क्षेत्रों में एक है। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बाबुल सुप्रियो ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की थी। पिछले साल मार्च-अप्रैल में पश्चिम बर्दवान जिले के आसनसोल में रामनवमी समारोह को लेकर सांप्रदायिक दंगा हुआ था। इस क्षेत्र में करीब 70 फीसद हिंदू और 28 फीसद मुसलमान हैं।
बाबुल सुप्रियो का सियासी सफर
बाबुल सुप्रियो का राजनितिक सफर मार्च 2014 से शुरू हुआ। इसके पीछे भी एक दिलचस्प वजह है। बाबुल सुप्रियो का सियासी सफर और बीजेपी का टिकट मिलने की शुरुआत एकफ्लाइट से हुई। बाबुल सुप्रियो 28 फरवरी 2014 को दिल्ली से जा रही एक फ्लाइट में थे और बाबा रामदेव उनके बगल में बैठे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि बाबा रामदेव फोन पर टिकटों के बारे में बात कर रहे हैं। इस पर बाबुल सुप्रियो ने उनसे पूछा कि वो किस बात की चर्चा कर रहे हैं, तो रामदेव ने बताया कि देश में चुनाव होने जा रहा है और उन्हें कुछ अच्छे लोग चाहिए। इस पर बाबुल सुप्रियो ने जवाब दिया कि वह भी एक अच्छे इंसान हैं और टिकट चाहते हैं। इस पर बाबा रामदेव चौंक गए और बाबुल का नंबर ले लिया।
बाबुल सुप्रियो इस मुलाकात को संयोग मानकर भूल ही गए। बताया जाता है कि एक मार्च को उन्हें संघ से जुड़े एक शख्स का कॉल आया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। उनसे चुनाव लड़ने की इच्छा पूछी गई। जवाब में उन्होंने कहा कि वह बंगाल में अपने दम पर भाजपा को एक सीट दिला सकते हैं। कुछ और बातचीत के बाद भाजपा ने आसनसोल से उनका नाम पक्का कर दिया। बाबुल अपने दावे पर खरे उतरे भी। 2014 चुनाव में उन्होंने आसनसोल से टीएमसी की डोला सेन को हराकर भाजपा का परचम लहरा दिया।
बाबुल सुप्रियो का राजनितिक सफर मार्च 2014 से शुरू हुआ। इसके पीछे भी एक दिलचस्प वजह है। बाबुल सुप्रियो का सियासी सफर और बीजेपी का टिकट मिलने की शुरुआत एकफ्लाइट से हुई। बाबुल सुप्रियो 28 फरवरी 2014 को दिल्ली से जा रही एक फ्लाइट में थे और बाबा रामदेव उनके बगल में बैठे थे। इस दौरान उन्होंने देखा कि बाबा रामदेव फोन पर टिकटों के बारे में बात कर रहे हैं। इस पर बाबुल सुप्रियो ने उनसे पूछा कि वो किस बात की चर्चा कर रहे हैं, तो रामदेव ने बताया कि देश में चुनाव होने जा रहा है और उन्हें कुछ अच्छे लोग चाहिए। इस पर बाबुल सुप्रियो ने जवाब दिया कि वह भी एक अच्छे इंसान हैं और टिकट चाहते हैं। इस पर बाबा रामदेव चौंक गए और बाबुल का नंबर ले लिया।
बाबुल सुप्रियो इस मुलाकात को संयोग मानकर भूल ही गए। बताया जाता है कि एक मार्च को उन्हें संघ से जुड़े एक शख्स का कॉल आया तो उन्हें यकीन ही नहीं हुआ। उनसे चुनाव लड़ने की इच्छा पूछी गई। जवाब में उन्होंने कहा कि वह बंगाल में अपने दम पर भाजपा को एक सीट दिला सकते हैं। कुछ और बातचीत के बाद भाजपा ने आसनसोल से उनका नाम पक्का कर दिया। बाबुल अपने दावे पर खरे उतरे भी। 2014 चुनाव में उन्होंने आसनसोल से टीएमसी की डोला सेन को हराकर भाजपा का परचम लहरा दिया।