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मानवाधिकार संरक्षण संशोधन बिल पर लोकसभा की मुहर, आरटीआई संशोधन सहित तीन अन्य बिल पेश
Fri, 19 Jul 2019 10:13 PM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Fri, 19 Jul 2019 10:13 PM IST
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संसद भवन (फाइल फोटो)
- फोटो : सोशल मीडिया
लोकसभा में शुक्रवार को मानवाधिकार संरक्षण संशोधन बिल पारित हो गया। इसी दिन लोकसभा में सूचना का अधिकार (आरटीआई) संशोधन, उभयलिंगी व्यक्ति अधिकार संरक्षण और चिटफंड पर पाबंदी संबंधी बिल पेश किए गए। मानवाधिकार और आरटीआई बिल पर सदन में सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। विपक्ष ने सरकार पर इन बिलों के जरिए संविधानिक संस्थाओं को ध्वस्त करने की साजिश का आरोप लगाया। जवाब में सरकार ने कहा कि इन बिलों का उद्येश्य संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत बनाना है।
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मानवाधिकार संशोधन बिल का बचाव करते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि सरकार का इरादा आयोग को और मजबूत बनाने का है। मोदी सरकार की नीति स्पष्ट है। सरकर मानव और मानवता का संरक्षण करने की हिमायती है। इस नीति के तहत न किसी पर अत्याचार हो और न किसी अत्याचारी को बख्शा जाए का भाव छिपा है। भाजपा सांसद सत्यापाल सिंह ने संशोधन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि विदेशी परिकल्पना पर आधारित मानवाधिकार भारतीय परंपरा के अनुरूप नहीं है। मानवाधिकारों से जुड़े संगठन आतंकवादी, नक्सली और अपराधियों की जगह सरकारी संस्थाओं पर सवाल उठा कर देश को बदनाम करते आए हैं।
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विपक्ष की ओर से शशि थरूर ने इसे पेरिस समझौते के सिद्घांतों का उल्लंघन बताया। उन्होंने कहा कि इस बिल में आयोग के अध्यक्षों और सदस्यों का कार्यकाल पांच साल से घटा कर तीन साल कर दिया गया है। बीजेडी के पिनाकी मिश्रा ने कहा कि मानवाधिकार का वर्तमान संवैधानिक और स्वायत्त स्वरूप हमें चीन और रूस जैसे देशों से अलग कर नई पहचान देता है। सरकार ऐसी संस्थाओं पर एकाधिकार स्थापित करना चाहती है।
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