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कोरोना के बीच आया टिड्डी संकट बेहद गंभीर, फसलों को हो सकता है भारी नुकसान

Tue, 26 May 2020 09:22 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Tue, 26 May 2020 09:22 PM IST
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Locust attack badly timed serious infestation and possibility of crop loss says Environment Ministry official
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

पश्चिमी भारत में टिड्डी दल के हमलों को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा है कि यह एक बहुत ही खराब समय पर आया गंभीर मामला है जब देश पहले ही वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रसार से जूझ रहा है, इससे फसलों को भारी नुकसान पहुंच सकता है। 

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पर्यावरण मंत्रालय के वन्यजीव इंस्पेक्टर जनरल सौमित्र दासगुप्ता ने कहा कि ये रेगिस्तानी टिड्डे थे जिन्होंने भारत में बड़ी संख्या में हमला किया और इससे फसलों को काफी नुकसान पहुंच सकता है। टिड्डियां हमारे देश में सामान्य हैं लेकिन यह हमला बहुत बड़ा है। 

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ऐसा हमला तीन दशक में एक बार होता है

दासगुप्ता ने कहा, 'रेगिस्तानी टिड्डियां पश्चिमी भारत में पहुंच गई हैं। आम तौर पर देश में यह सामान्य घटना है, लेकिन यह हमला बहुत बड़ा है। यह तीन दशक में एक बार होने वाली घटना है और इसके देश में होने का समय बहुत खराब है जब हम पहले ही एक महामारी से जूझ रहे हैं।'

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उन्होंने कहा कि टिड्डियों के हमले को नियंत्रित करने के लिए पर्यावरण मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है, इससे कृषि मंत्रालय और संबंधित राज्यों को निपटना होगा। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि टिड्डी हमला पूर्वी भारत में भी फैलने का खतरा है और इससे खाद्य सुरक्षा के लिए संकट बढ़ गया है।



 

राजस्थान टिड्डियों से सबसे ज्यादा प्रभावित

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के अनुसार ये टिड्डी दल फिलहाल राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में सक्रिय हैं। अभी तक राजस्थान टिड्डी दलों के हमले से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाला राज्य है। 

बता दें कि जयपुर में लगभग 28 साल बाद टिड्डी दल ने दस्तक दी है। इससे पहले 1993 में टिड्डियों ने जयपुर में फसलों को चट कर दिया था। यहां सोमवार सुबह टिड्डियों का एक बडा झुंड परकोटा क्षेत्र में बड़ी चैपड़ और आस-पास के इलाकों में देखा गया था।

उत्तर प्रदेश में कई जिलों में टिड्डी दल से खतरा

राजस्थान के बाद टिड्डी दल उत्तर प्रदेश में भी कोहराम मचा सकता है। यूपी के आगरा, लखीमपुर खीरी, मेरठ, शाहजहांपुर, प्रतापगढ़, बदायूं, फिरोजाबाद, झांसी और कानपुर देहात में भी इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

इस तरह फसलों के लिए घातक बनता है टिड्डी दल

टिड्डे की एक प्रजाति रेगिस्तानी टिड्डा सामान्यत: सुनसान इलाकों में पाया जाता है। जब हरे-भरे घास के मैदानों पर कई सारे रेगिस्तानी टिड्डे इकट्ठे होते हैं तो ये निर्जन स्थानों में रहने वाले सामान्य कीट-पतंगों की तरह व्यवहार नहीं करते बल्कि एक साथ मिलकर भयानक रूप अख्तियार कर लेते हैं।



आसमान में उड़ते हुए इन टिड्डी दलों में दस अरब तक टिड्डे हो सकते हैं। ये सैकड़ों किलोमीटर क्षेत्र में फैले हो सकते हैं। ये झुंड एक दिन में 200 किलोमीटर का रास्ता तय कर सकते हैं। 

एक दिन में टिड्डों के ये झुंड अपने खाने और प्रजनन के मकसद से इतने बड़े क्षेत्र में लगी फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन के मुताबिक एक औसत टिड्डी दल ढाई हजार लोगों का पेट भरने लायक अनाज को चट कर सकता है।

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