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निरंकुश नहीं हो सकती प्रेस की स्वतंत्रता : कोर्ट
Mon, 20 Apr 2020 02:24 AM IST
संजीव कुमार झा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Mon, 20 Apr 2020 02:24 AM IST
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महाराष्ट्र में मुंबई की एक कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि प्रेस को अभिव्यक्ति और बोलने-लिखने की आजादी है लेकिन यह ‘निरंकुश’ नहीं हो सकती है। सार्वजनिक व्यवस्था के हित में वाजिब प्रतिबंधों का पालन करना आवश्यक है। कोर्ट ने यह टिप्पणी टीवी पत्रकार राहुल कुलकर्णी को जमानत देते हुए की।
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कुलकर्णी को मुंबई पुलिस ने ट्रेन संचालन संबंधी रिपोर्ट के जरिए गलत जानकारी देने के आरोप में बुधवार को गिरफ्तार किया था। उनकी रिपोर्ट की वजह से मंगलवार को बांद्रा इलाके में रेलवे स्टेशन के बाहर भारी भीड़ जुट गई थी। पीबी येरलेकर की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की कोर्ट ने बृहस्पतिवार को जमानत मंजूर की थी।
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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि प्रेस को अभिव्यक्ति की आजादी है। हालांकि आजादी निरंकुश नहीं हो सकती है। स्वतंत्रता का फायदा लेते हुए सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित प्रतिबंधों का पालन करना जरूरी है।
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कोर्ट ने कहा कि आरोपी को रिपोर्टिंग करते समय इन प्रतिबंधों को दिमाग में रखना चाहिए। मीडिया का आम जनता पर व्यापक प्रभाव है। ऐसे में यह बहुत ही जरूरी है कि न्यूज रिपोर्ट और अधिक संवेदनशील और जिम्मेदारी पूर्ण ढंग से की जानी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी की न्यूज रिपोर्ट से कानून व्यवस्था की स्थिति गड़बड़ा गई। ऐसे में पुलिस द्वारा आरोपी को हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई उचित प्रतीत होती है। पुलिस ने कुलकर्णी को आईपीसी की विभिन्न धाराओं और महामारी रोक अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, कुलकर्णी ने गलत खबर दी कि रेलवे प्रवासी मजदूरों को महाराष्ट्र से उनके गृह राज्यों के लिए विशेष ट्रेनों का संचालन करेगा। इसके चलते हजारों मजदूर बांद्रा रेलवे स्टेशन पहुंच गए।