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TEDxDelhi: ब्लैक बोर्ड छात्रों का विलेन, पजल और गेम्स से दूर होंगी मैथ्स प्रॉब्लम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 15 Apr 2018 07:43 PM IST
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दुनियाभर में मशहूर TEDx व्याख्यान श्रृंखला का आयोजन आज दिल्ली में शुरू हो गया है। आईआईटी दिल्ली के डोगरा हॉल में हो रहे TEDxDelhi चैप्टर में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है। TEDx के लोकप्रिय और बड़े चैप्टर्स में से एक है TEDxDelhi, जहां जाने-माने लीडर्स, लीक से हटकर सोच रखने वाले लोग और यूथ आइकंस साथ आते हैं। तर्क, सिद्धांत और विचारों में दक्ष ये लोग अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा आइडिया शेयर करते हैं और मानवता के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर बात करते हैं।
इस इवेंट में भाग लेने वाले तमाम वक्ता रचनात्मक और प्रगतिशील सोच रखने वाले दर्शकों के साथ अपने विचार साझा करते हैं। नई सोच के इस सफर में कई उभरते कलाकारों को अपने हुनर को प्रदर्शित करने का मौका भी मिलता है।
TEDxDelhi में 'मानवता का भविष्य' विषय पर अलग-अलग क्षेत्र से आए 25 धुरंधरों द्वारा विचार व्यक्त किया जा रहा है। ये सभी वक्ता सभागार में उपस्थित लगभग 1100 दर्शकों से मुखातिब होने के लिए उपस्थित हुए हैं और सजीव प्रसारण के जरिए लाखों दर्शकों के साथ अपने ऐसे अनुभव साझा कर रहे हैं, जिन्होंने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। TEDxDelhi को amarujala.com वेबसाइट पर facebook.com/Amarujala/ पर सजीव (लाइव) देख सकते हैं।
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UPDATES:-
7.39PM: जेंडर कार्यकर्ता और ट्रांसजेंडर डॉट कॉम की संस्थापक नयसारा राय ने मर्द से औरत बनने की यात्रा पर बताया कि उन्हें कई कठिनाइयों से जुझना पड़ा। 2006 में जब मैंने अपना जेंडर बदलवाया तो समाज ने मुझे हीन भावना से देखा। एक जेंडर कार्यकर्ता के तौर पर में मेरी खुद की कहानी में कई उतार-चढ़ाव थे।
6.48PM: क्यूमैथ के संस्थापक और सीईओ मनन खुर्मा ने बताया कि 'बीते 15 साल में एक टीचर के रूप में मैंने महसूस किया है कि मैथ्स सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग है। ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन है क्योंकि यह छात्र को आगे सोचने से रोकता है। मैथ्स को रिजनिंग की तरह ही सीखना होगा। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हम पजल और गेम्स के जरिए मैथ्स की कठिनाओं को आसानी से सुलझा सकते हैं। क्यूमैथ की क्लास में बच्चे पुराने बोरिंग से हटकर इन्हीं माध्यमों से मैथ्स की कठिनाओं को दूर करते हैं बल्कि वह इस विषय में बेहतर भी करते हैं।
6.17PM: बड़े पर्दे की फिल्म बनाने का लोकतांत्रीकरण विषय पर सुपरहिट मलयालम फिल्म आनंदम के डायरेक्टर और स्क्रिपट राइटर गणेश राज ने कहा कि 'इंटरनेट के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को साकार करने में कामयाब हुआ क्योंकि मेरा फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी खास नहीं था। मैं एक साधारण परिवार से था और मैं पायलट बनना चाहता था। लेकिन मैंने अपने करियर की शुरूआत शॉर्ट फिल्में बनाकर की। मैंने वीकिपीडिया के जरिए फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं।'
4.20PM: भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि डॉक्टर यास्मिन ए हक ने कहा कि '1.1 बिलियन स्कूल जाने वाले बच्चों में से ज्यादात्तर बच्चे प्राइमरी शिक्षा भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। डिजिटल वर्ल्ड के जरिए हम बच्चों को बेहतर एजुकेशन दे सकते हैं। भारत में पढ़ाई पूरी करने से पहले ही लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। लेकिन हमें बदलाव लाना होगा और यह बदलाव हमारे जरिए ही आएगा।'
4.12PM: शांति के लिए काम करने वाले एक्टिवीस्ट समीर गुप्ता ने कहा कि 'भारत पाकिस्तान के रिश्ते आने वाले समय में बेहतर हो सकते हैं। हमें पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करनी होगी। लेकिन इसके लिए हमें सही रास्ते को चुनना होगा।
3.52PM: आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर एम बालाकृष्णन ने कहा 'नेत्रहीनों की सुरक्षा और एजुकेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमारे पास ऐसी डिवाइस होनी चाहिए जिससे नेत्रहीन को यह पता चल सके कि रास्ते में कोई व्यवधान तो नहीं। हमने भी इसपर काम किया और डिवाइस बनाई। इसके साथ ही नेत्रहीनों के बसों में चढ़ने के लिए होने वाली तकलीफों को दूर करने के लिए भी डिवाइस तैयार की है। इन डिवाइस से नेत्रहीनों की सुरक्षा पुख्ता होती हैं।
3.39PM: ऑटिज्म, एक महामारी पर ऑटिज्म सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संस्थापक डॉक्टर अर्चना नायर ने कहा कि 'यह कोई फिजिकल बीमारी नहीं है बल्कि मानसिक बीमारी है। लेकिन आज हमें इस बीमारी के बारे में बहुत कम जानकार है। देश में बहुत कम संगठन हैं जो इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करते हैं। इसमें वह अकेलापन महसूस करने लगते हैं।
3.14 PM: कथक का ढांचा विषय पर कथक प्रतिपादक दिव्या गोस्वामी दीक्षित ने कहा कि हम अपने भविष्य को लेकर इतने परेशान रहते हैं कि हम वर्तमान की खुशी को ठीक से महसूस नहीं कर पाते। डांस एक ऐसी भाषा है जो हमें बहुत कुछ समझाती है। यह मेरे लिए एक मेडिटेशन है। बिना डांसर के कोई डांस नहीं हो सकता। डांस एक मल्टी टास्किंग कला है जिसमें हमें कई भावों को साथ में परोसना होता है।
3.03PM: परवरिश इंस्टीट्यूट ऑफ पैरेंटिंग के सीईओ सुशांत कालरा ने कहा कि ये सच है कि परीक्षाओं में हमारे मार्क्स ही हमारी दिशा और दशा तय करते हैं। एक तरफ हम आपने बच्चों को कहते हैं कि मार्क्स जरूरी हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इनोवेशन सबसे पहले है। आजकल अभिभावक अपने बच्चों के कम नंबर आने से निराशा होते हैं लेकिन सच तो यह है कि 2030 जो कि इनोवेशन के लिहाज से एक ऐसा समय होगा जहां स्किलस की जरूरत होगी।
2.47PM: एम्पावर, इंडिया वरिष्ठ प्रोग्राम अधिकारी निशा धवन ने बताया कि आज भी देश में लड़कियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। जबकि लड़को को खुली आजादी है। हमें लड़कियों को केंद्र में रखना होगा। लड़कियों को यौन शोषण से बचाना होगा। लड़कियों को पॉवर देनी होगी क्योंकि लड़कियां किसी से कमजोर नहीं। देश में कई ऐसी लड़कियां हैं जो कई चुनौतियों को पार कर आगे बढ़ रही हैं।
2.36PM: इनवेस्ट इंडिया के एमडी और सीईओ दीपक वागला ने बताया कि आने वाले 133 मिलियन वोटर फर्स्ट टाइम वोटर होंगे जिसमें से 97 मिलियन गांव से ताल्लुक रखने वाले तो वहीं 63 मिलियन युवा वोटर होंगे। और यही न्यू इंडिया की नई कहानी देश के सामने रखेंगे।
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TEDxDelhi में 'मानवता का भविष्य' विषय पर अलग-अलग क्षेत्र से आए 25 धुरंधरों द्वारा विचार व्यक्त किया जा रहा है। ये सभी वक्ता सभागार में उपस्थित लगभग 1100 दर्शकों से मुखातिब होने के लिए उपस्थित हुए हैं और सजीव प्रसारण के जरिए लाखों दर्शकों के साथ अपने ऐसे अनुभव साझा कर रहे हैं, जिन्होंने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी है। TEDxDelhi को amarujala.com वेबसाइट पर facebook.com/Amarujala/ पर सजीव (लाइव) देख सकते हैं।
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7.39PM: जेंडर कार्यकर्ता और ट्रांसजेंडर डॉट कॉम की संस्थापक नयसारा राय ने मर्द से औरत बनने की यात्रा पर बताया कि उन्हें कई कठिनाइयों से जुझना पड़ा। 2006 में जब मैंने अपना जेंडर बदलवाया तो समाज ने मुझे हीन भावना से देखा। एक जेंडर कार्यकर्ता के तौर पर में मेरी खुद की कहानी में कई उतार-चढ़ाव थे।
6.48PM: क्यूमैथ के संस्थापक और सीईओ मनन खुर्मा ने बताया कि 'बीते 15 साल में एक टीचर के रूप में मैंने महसूस किया है कि मैथ्स सिर्फ एक विषय नहीं बल्कि थिंकिंग और प्रॉब्लम सॉल्विंग है। ब्लैक बोर्ड ही छात्रों के लिए असली विलेन है क्योंकि यह छात्र को आगे सोचने से रोकता है। मैथ्स को रिजनिंग की तरह ही सीखना होगा। अगर हम ऐसा नहीं करते हैं तो हमें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है। हम पजल और गेम्स के जरिए मैथ्स की कठिनाओं को आसानी से सुलझा सकते हैं। क्यूमैथ की क्लास में बच्चे पुराने बोरिंग से हटकर इन्हीं माध्यमों से मैथ्स की कठिनाओं को दूर करते हैं बल्कि वह इस विषय में बेहतर भी करते हैं।
6.17PM: बड़े पर्दे की फिल्म बनाने का लोकतांत्रीकरण विषय पर सुपरहिट मलयालम फिल्म आनंदम के डायरेक्टर और स्क्रिपट राइटर गणेश राज ने कहा कि 'इंटरनेट के जरिए मैं फिल्म इंडस्ट्री में अपने सपनों को साकार करने में कामयाब हुआ क्योंकि मेरा फिल्म इंडस्ट्री में कोई भी खास नहीं था। मैं एक साधारण परिवार से था और मैं पायलट बनना चाहता था। लेकिन मैंने अपने करियर की शुरूआत शॉर्ट फिल्में बनाकर की। मैंने वीकिपीडिया के जरिए फिल्म बनाने की बारीकियां सीखीं।'
4.20PM: भारत में यूनिसेफ की प्रतिनिधि डॉक्टर यास्मिन ए हक ने कहा कि '1.1 बिलियन स्कूल जाने वाले बच्चों में से ज्यादात्तर बच्चे प्राइमरी शिक्षा भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। डिजिटल वर्ल्ड के जरिए हम बच्चों को बेहतर एजुकेशन दे सकते हैं। भारत में पढ़ाई पूरी करने से पहले ही लड़कियों की शादी करवा दी जाती है। लेकिन हमें बदलाव लाना होगा और यह बदलाव हमारे जरिए ही आएगा।'
4.12PM: शांति के लिए काम करने वाले एक्टिवीस्ट समीर गुप्ता ने कहा कि 'भारत पाकिस्तान के रिश्ते आने वाले समय में बेहतर हो सकते हैं। हमें पाकिस्तान के साथ शांति स्थापित करने के लिए बातचीत करनी होगी। लेकिन इसके लिए हमें सही रास्ते को चुनना होगा।
3.52PM: आईआईटी दिल्ली में प्रोफेसर एम बालाकृष्णन ने कहा 'नेत्रहीनों की सुरक्षा और एजुकेशन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। हमारे पास ऐसी डिवाइस होनी चाहिए जिससे नेत्रहीन को यह पता चल सके कि रास्ते में कोई व्यवधान तो नहीं। हमने भी इसपर काम किया और डिवाइस बनाई। इसके साथ ही नेत्रहीनों के बसों में चढ़ने के लिए होने वाली तकलीफों को दूर करने के लिए भी डिवाइस तैयार की है। इन डिवाइस से नेत्रहीनों की सुरक्षा पुख्ता होती हैं।
3.39PM: ऑटिज्म, एक महामारी पर ऑटिज्म सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की संस्थापक डॉक्टर अर्चना नायर ने कहा कि 'यह कोई फिजिकल बीमारी नहीं है बल्कि मानसिक बीमारी है। लेकिन आज हमें इस बीमारी के बारे में बहुत कम जानकार है। देश में बहुत कम संगठन हैं जो इस बीमारी के बारे में लोगों को जागरूक करते हैं। इसमें वह अकेलापन महसूस करने लगते हैं।
3.14 PM: कथक का ढांचा विषय पर कथक प्रतिपादक दिव्या गोस्वामी दीक्षित ने कहा कि हम अपने भविष्य को लेकर इतने परेशान रहते हैं कि हम वर्तमान की खुशी को ठीक से महसूस नहीं कर पाते। डांस एक ऐसी भाषा है जो हमें बहुत कुछ समझाती है। यह मेरे लिए एक मेडिटेशन है। बिना डांसर के कोई डांस नहीं हो सकता। डांस एक मल्टी टास्किंग कला है जिसमें हमें कई भावों को साथ में परोसना होता है।
3.03PM: परवरिश इंस्टीट्यूट ऑफ पैरेंटिंग के सीईओ सुशांत कालरा ने कहा कि ये सच है कि परीक्षाओं में हमारे मार्क्स ही हमारी दिशा और दशा तय करते हैं। एक तरफ हम आपने बच्चों को कहते हैं कि मार्क्स जरूरी हैं लेकिन कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां इनोवेशन सबसे पहले है। आजकल अभिभावक अपने बच्चों के कम नंबर आने से निराशा होते हैं लेकिन सच तो यह है कि 2030 जो कि इनोवेशन के लिहाज से एक ऐसा समय होगा जहां स्किलस की जरूरत होगी।
2.47PM: एम्पावर, इंडिया वरिष्ठ प्रोग्राम अधिकारी निशा धवन ने बताया कि आज भी देश में लड़कियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जा रहा है। जबकि लड़को को खुली आजादी है। हमें लड़कियों को केंद्र में रखना होगा। लड़कियों को यौन शोषण से बचाना होगा। लड़कियों को पॉवर देनी होगी क्योंकि लड़कियां किसी से कमजोर नहीं। देश में कई ऐसी लड़कियां हैं जो कई चुनौतियों को पार कर आगे बढ़ रही हैं।
2.36PM: इनवेस्ट इंडिया के एमडी और सीईओ दीपक वागला ने बताया कि आने वाले 133 मिलियन वोटर फर्स्ट टाइम वोटर होंगे जिसमें से 97 मिलियन गांव से ताल्लुक रखने वाले तो वहीं 63 मिलियन युवा वोटर होंगे। और यही न्यू इंडिया की नई कहानी देश के सामने रखेंगे।