फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Live streaming of court proceedings has flipside, judges need to be trained: CJI

Live Streaming Of Court Cases: सीजेआई बोले- लाइव स्ट्रीमिंग के कई प्रतिकूल पहलू, जजों का प्रशिक्षण जरूरी

Sat, 06 May 2023 11:03 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर Published by: निर्मल कांत Updated Sat, 06 May 2023 11:03 PM IST
सार

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कटक में डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा, यूट्यूब पर बहुत सारी मजेदार चीजें चल रही हैं, जिन्हें हमें नियंत्रित करने की जरूरत है क्योंकि यह गंभीर चीजें हैं। कोर्ट में जो होता है वह बेहद गंभीर मामला है।

विज्ञापन
Live streaming of court proceedings has flipside, judges need to be trained: CJI
CJI DY Chandrachud: - फोटो : ANI

विस्तार

मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने शनिवार को एक बार फिर कहा कि अदालती कार्यवाही की नई अपनाई गई लाइव स्ट्रीमिंग पद्धति के कुछ प्रतिकूल पहलू हैं। सीजेआई ने कहा कि जजों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है,  क्योंकि उनके द्वारा कहा गया हर शब्द सोशल मीडिया के युग में सार्वजनिक दायरे में है। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कटक में डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने कहा, यूट्यूब पर बहुत सारी मजेदार चीजें चल रही हैं, जिन्हें हमें नियंत्रित करने की जरूरत है क्योंकि यह गंभीर चीजें हैं। कोर्ट में जो होता है वह बेहद गंभीर मामला है। हम जो लाइव स्ट्रीमिंग कर रहे हैं उसका एक दूसरा पहलू भी है। जज के रूप में हमें प्रशिक्षित होने की जरूरत है क्योंकि हम जो भी शब्द अदालत में कहते हैं वह सार्वजनिक होते हैं। हमें पता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रतिकूल पहलू भी हैं। उदाहरण के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हमें यह बताने की अनुमति देना बहुत मुश्किल होगा कि एक आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद क्या सजा दी जाए।
विज्ञापन

 

पटना और गुजरात के हाईकोर्ट का दिया उदाहरण
सीजेआई ने पटना व गुजरात हाईकोर्ट की क्लिप के दिए उदाहरण। पटना हाईकोर्ट में जज आईएएस अधिकारी से उसके पहनावे पर सवाल करता है। वहीं गुजरात हाईकोर्ट में जज एक महिला वकील से पूछते दिख रहे हैं कि उन्होंने अपने मामले में तैयारी क्यों नहीं की।

ई अदालत की परियोजना सस्ती सुलभ और प्रभावी
सीजेआई ने कहा, ई-अदालत परियोजना की दृष्टि सस्ती, सुलभ, लागत प्रभावी, पर्यावरण आदि है। 20 जिलों के अधिवक्ता ओडिशा में अपने जिलों में बैठकर हाईकोर्ट में पेश हो सकते हैं। राज्य सरकारें इस प्रोजेक्ट में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं। हम भारत के वित्त विभाग पर 100 प्रतिशत निर्भर हैं। 10,000 से 15,000 पन्नों के फैसले हमें ट्रिब्यूनल से भेजे जाते हैं। एक जज इसे कैसे पचा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed