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विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव मंजूर, शुक्रवार को होगी चर्चा, सरकार आश्वस्त

Wed, 18 Jul 2018 10:47 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 18 Jul 2018 10:47 PM IST
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live: monsoon session PM narendramodi said Discussion on various important issues necessary

मोदी सरकार अपने करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में पहली बार शुक्रवार को संसद में अग्नि परीक्षा से गुजरेगी। बुधवार को लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सरकार के खिलाफ विपक्ष के द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। प्रस्ताव पर शुक्रवार को चर्चा होगी। चूंकि लोकसभा में संख्या बल की दृष्टि से मोदी सरकार आरामदायक स्थिति में है। ऐसे में इस प्रस्ताव से सरकार की स्थिरता पर कोई असर पडने वाला नहीं है। 

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बुधवार को सदन की कार्यवाही मॉब लिंचिंग, आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा और उच्च शिक्षा संस्थानों में यूजीसी के नए चार्टर पर हंगामे से हुई। प्रश्नकाल के बाद स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव पर 8 दलों की ओर से पेश किए गए नोटिस की जानकारी दी और टीडीपी को प्रस्ताव पेश करने का मौका दिया। इसके बाद प्रस्ताव के समर्थन में सदस्यों की संख्या गिनने के बाद स्पीकर ने नोटिस स्वीकार कर लिया। बाद में लोकसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) की बैठक में शुक्रवार पूर्वाहन 11 बजे से शाम छह बजे तक चर्चा कराने पर सहमति बनी। अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार होने और चर्चा की तारीख तय होने के बाद सरकार और विपक्ष ने रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा ने उस दिन सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए व्हिप जारी कर दिया है।
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सरकार आश्वस्त विपक्ष की निगाहें सहयोगी दलों पर 
संख्याबल पक्ष में होने के कारण सरकार अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के प्रति आश्वस्त है। प्रस्ताव पेश किए जाने से एक दिन पूर्व ही सभी सहयोगी दलों की बैठक बुला कर भाजपा ने राजग में फूट पडने की संभावना खत्म कर दी है। हालांकि इसके बावजूद विपक्ष की निगाहें भाजपा से नाराज चल रहे सांसदों और सहयोगी दलों पर है। विपक्ष का मानना है कि वोटिंग के दौरान अगर एक भी सहयोगी या नाराज सांसद ने बगावती तेवर दिखाया तो सरकार की किरकिरी होगी। गौरतलब है कि भाजपा में शत्रुघ्र सिन्हा, कीर्ति आजाद, ज्योति फूले सहित कुछ सांसद और रालोसपा-शिवसेना को नाराज बताया जा रहा है। 
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ये है लोकसभा का गणित 
इस समय लोकसभा में 535 सांसद हैं। इस हिसाब से विश्वास मत के प्रस्ताव को गिराने केलिए सरकार को 268 सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। सरकार के लिए यह बेहद आसान है, क्योंकि उसके पास अभी 310 सांसदों का समर्थन है जो कि जरूरी संख्या से 42 ज्यादा है। इसके अलावा 37 सांसदों वाली अन्नाद्रमुक और 20 सांसदों वाली बीजेडी ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया है। अगर इन दलों ने मतविभाजन का बहिष्कार किया तो सरकार की राह बेहद आसान हो जाएगी। 

विपक्ष को एकजुट करना है कांग्रेस का लक्ष्य 
कांग्रेस को भी पता है कि संख्याबल की दृष्टि से मोदी सरकार बेहद मजबूत स्थिति में है। मगर पार्टी लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा के खिलाफ विपक्ष को एकजुट करना चाहती है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि विपक्ष की एकजुटता का लाभ इसी सत्र में होने वाले राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव में भी मिलेगा। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ गोलबंद होने का सिलसिला शुरू होगा। 

मानसून सत्र के लिए 15 बिलों को सूचीबद्ध

 सरकार ने मानसून सत्र के लिए 15 बिलों को सूचीबद्ध किया है। इनमें सरकार की प्राथमिकता अगले लोकसभा चुनाव के लिए गेमचेंजर माने जाने वाले तीन तलाक को दंडनीय बनाने, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने और 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा दिलाने वाले बिलों का कानूनी जामा पहनाने का है। इसी सत्र में सरकार को कई अध्यादेशों के संदर्भ में भी बिल पेश करना है।

 इस सत्र के लिए अब तक सरकार ने जिन बिलों को सूचीबद्ध किया है, उनमें तीन तलाक, मासूमों से रेप पर फांसी के लिए आपराधिक कानून संशोधन बिल, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा बिल, सार्वजनिक परिसर अनधिकृत कब्जा निषेध संशोधन बिल, दंत चिकित्सक संशोधन बिल, जन प्रतिनिधि संशोधन बिल 2017, नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट संशोधन बिल, दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता बिल, भगोड़ा आर्थिक अपराध बिल, मानवाधिकार सुरक्षा संशोधन बिल, सूचना का अधिकार संशोधन बिल, डीएनए प्रौद्योगिकी उपयोग नियामक बिल, बांध सुरक्षा बिल, मानव तस्करी रोकथाम बिल, सुरक्षा एवं पुनर्वास बिल शामिल हैं। इसके अलावा सरकार की योजना नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार दूसरा संशोधन बिल, महत्वपूर्ण बंदरगाह प्राधिकार बिल, राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय बिल, भ्रष्टाचार रोकथाम संशोधन बिल, जिसे राज्यसभा में पेश करने के बाद प्रवर समिति को भेज दिया था, को चर्चा के लिए सदन में पेश करने की है।

सरकार की योजनाएं और चुनौतियां

 मानसून सत्र में सरकार को लोकसभा में 28 और राज्यसभा में 30 विधेयक पारित कराने हैं। तीन तलाक के अलावा सरकार इस बार बहुविवाह और निकाह हलाला जैसे मुद्दों पर भी विपक्ष को घेरेगी। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकपाल कानून बनाने के लिए 17 जुलाई की समयसीमा दी थी। सरकार को उसका अनुपालन भी सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, पीजे कुरियन के रिटायर होने के बाद लोकसभा के उपाध्यक्ष का चुनाव भी मानसून सत्र में होना है। बीजेपी की कोशिश है कि लोकसभा में बहुमत होने के नाते इस पद पर या तो उसका अपना उम्मीदवार जीते या उसके किसी सहयोगी दल का। लेकिन विपक्ष इसके लिए अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारना चाहता है।
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