रेप केस: मरते दम तक जेल में रहेगा आसाराम, बोला- मेरी उम्र पर तो रहम करो
आसाराम को अपने आश्रम केगुरुकुल की नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में पूरी उम्र जेल में ही काटनी होगी। जोधपुर के एससी/एसटी विशेष न्यायालय के जज मधुसूदन शर्मा ने बुधवार को 453 पेज के अपने आदेश में आसाराम को मरते दम तक उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही, गुरुकुल की हॉस्टल वार्डन एवं आसाराम की सेविका शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता और सेवक शरदचंद्र को 20-20 वर्ष के लिए कैद की सजा का एलान किया।
पिछले साढ़े चार साल से जेल में बंद 77 वर्षीय आसाराम ने फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों हाथ ऊपर करते हुए कहा ‘जैसी ऊपरवाले की मर्जी’। उसने तबीयत बिगड़ने का नाटक किया, लेकिन जेल के डॉक्टरों ने जांच में उसे सही पाया। इससे तीन घंटे पूर्व जब अदालत ने दोषी करार दिया, तो आसाराम ने जज से दोनों हाथ जोड़कर कहा, ‘मेरी उम्र पर रहम करो’। यह कहते ही उसकी आंखें नम हो गईं और दोनों हाथ अपने माथे पर रख लिए।
राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के कारण जोधपुर के एससी/एसटी विशेष न्यायालय के जज मधुसूदन शर्मा ने जोधपुर की सेंट्रल जेल में ही मुख्य आरोपी आसाराम व चार सह आरोपियों को फैसला सुनाया। जज ने सह आरोपी आसाराम के खानसामा प्रकाश द्विवेदी और सेवादार शिवा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था के तहत जोधपुर पुलिस ने जोधपुर सेंट्रल जेल को एक दिन पहले से ही छावनी बना रखा था। जज शर्मा सुबह करीब 8 बजे पहले जोधपुर कोर्ट परिसर स्थित अपनी एससी/एसटी विशेष अदालत पहुंचे। चुंकि जोधपुर जेल में अदालत लगानी थी, इसलिए उन्होंने यहां से ट्रांजिट ऑर्डर निकाले। इसके बाद 9.35 बजे वे जोधपुर जेल पहुंचे और करीब 9.40 बजे मामले की सुनवाई शुरू हुई।
जेल के एक हॉल में अदालत लगाई गई। यहां आसाराम और सह आरोपी उसी कठघरे में खड़े थे, जहां 31 साल पहले 1985 में चार वर्ष के लिए टाडा कोर्ट बनी थी, जिसके कठघरे में अकाली नेता गुरचरणसिंह तोहड़ा खड़े थे।
उम्मीद थी न्याय जरूर मिलेगा
जिसे रात-दिन भगवान की तरह पूजा और विश्वास किया, उसी ने परिवार की इज्जत से खिलवाड़ किया। ऐसे राक्षसी व्यक्ति के लिए भगवान से आजीवन कारावास की ही सजा मांगी थी और उन्हें कोर्ट पर भी पूरा भरोसा था कि चाहें जितने दिन लग जाएं लेकिन न्याय जरूर मिलेगा।
तीन गवाह मारे गए, कई लापता
इस मामले में सुनवाई के दौरान मुख्य गवाह कृपाल सिंह, वैद्य अमृत प्रजापति और अखिल गुप्ता पर जानलेवा हमले किए गए जिनमें उनकी मौत हो गई। इसके अलावा कई गवाह आसाराम के गुर्गों के हमले में गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कई ऐसे गवाह थे, जो गायब हो गए और उनका आज तक लापता हैं।
आसाराम पर इन धाराओं में आरोप साबित हुए और ये मिली सजा
- धारा 376(2)(एफ): आजीवन कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 376डी: आजीवन कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 370(4): 10 वर्ष कठोर कारावास, 1 लाख रुपये जुर्माना।
- धारा 342: एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
- धारा 506: एक वर्ष का कठोर कारावास, 1000 रुपये जुर्माना।
- जेजे एक्ट की धारा 23: 6 माह का साधारण कारावास।
जेल की कोर्ट में भी देरी से पहुंचे आसाराम, कहा-क्षमा करना भक्ति में लीन था
आसाराम को फैसला सुनाने के लिए जोधपुर जेल में ही कोर्ट लगाने के बावजूद असाराम ने जज को ही इंतजार करवा दिया और इस कारण सुनवाई देरी से शुरू हुई। सफेद कुर्ता और लाल टोपी पहने आसाराम करीब 9.40 बजे जेल में लगी अदालत पहुंचा और पहुंचते जज को कहा, ‘क्षमा करना, मैं थोड़ा भक्ति में लीन था।’ हालांकि जज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
जेल सूत्रों के अनुसार आसाराम फैसला सुनने के लिए अपने बैरक से निकलने से पहले पूजा करने बैठ गया था। उसे रात को भी नींद नहीं आई और बेचैन रहा। सुबह भी जल्दी उठकर सेल में इधर-ऊधर घूमता रहा।