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गुजरात चुनावः पुराने जीत के फार्मूले पर असमंजस में भाजपा, इसलिए लटके टिकट

Fri, 17 Nov 2017 12:05 PM IST
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Nov 2017 12:05 PM IST
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List of party candidates will be released after discussions between Modi-Shah

गुजरात में बीते तीन विधानसभा चुनाव में सत्ता विरोधी लहर थामने के लिए थोक के भाव में विधायकों का टिकट काटने वाली भाजपा इस बार असमंजस में है। इस विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने इसी फार्मूले को जारी रखते हुए करीब 42 विधायकों की सूची तैयार की थी।

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मगर इस बार इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का टिकट काटने के सवाल पर पार्टी असमंजस में है। यही कारण है कि बुधवार को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद भी उम्मीदवारों की सूची जारी नहीं की गई। अब पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और पीएम नरेंद्र मोदी इस बारे में नए सिरे से विमर्श करेंगे, इसक बाद ही सूची जारी होगी।
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पार्टी सूत्रों के मुताबिक सूची रुकने की यही अकेली वजह नहीं है। करीब तीन दर्जन सीटों को छोड़ कर सभी सीटों पर उम्मीदवार तय कर लिए गए हैं। पार्टी उम्मीवारों के सवाल पर कांग्रेस की भी थाह लेना चाहती है। हां, विमर्श का विषय यह भी है कि हमेशा की तरह इस बार भी थोक में विधायकों का टिकट काट कर सरकार के प्रति नाराजगी दूर करने के सफल फार्मूले पर अमल किया जाए या नहीं। नरमी बरतने की स्थिति में भी कम से कम दो दर्जन विधायकों को टिकट से हाथ धोना होगा।
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दरअसल नेतृत्व को इस बात का भी डर है कि थोक में टिकट काटने पर इस बार कहीं ऐसे विधायक बगावत का रास्ता न अपना लें। खासतौर पर अगर टिकट काटने के कारण पाटीदार बिरादरी के विधायकों ने विरोध किया तो मुश्किलें बढ़ सकती हैं।  गौरतलब है कि बीते तीन विधानसभा चुनाव में थोक के भाव विधायकों का टिकट काट कर सरकार के प्रति नाराजगी को दूर करने में सफलता हासिल की थी।


दरअसल टिकट काटने केलिए पार्टी नेतृत्व ने राज्य की सभी सीटों का बीते डेढ़ साल में 5 बार सर्वे कराया था। इसके आधार पर योग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की थी। मगर बुधवार की बैठक में राज्य इकाई द्वारा तैयार उम्मीदवारों के पैनल में सर्वे के आधार पर तैयार की गई सूची में शामिल कई नाम शामिल ही नहीं थे। इसके बाद सूची को अंतिम रूप देने से पहले शीर्ष स्तर पर विमर्श की सहमति बनी।

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