फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Liquor and wine shop opened on monday in lockdown 3.0, shops were overcrowded

लॉकडाउन में शराब, तलब और मनोरंजन की कहानी, किसे जीवित रखने के लिए गुलजार हुए शराब के ठेके

Mon, 04 May 2020 04:37 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 04 May 2020 04:37 PM IST
सार

  • मेडिकल साइंस में लोगों की यह लाइन 'तलब' का हिस्सा होती है
  • चालीस दिन के लॉकडाउन के बाद भी लोगों में नहीं छूटी शराब की लत
  • इस दौरान लोग सोशल डिस्टेंसिंग को भूले, कई जगह पुलिस की सख्ताई

विज्ञापन
Liquor and wine shop opened on monday in lockdown 3.0, shops were overcrowded
Liquor and Wine Shop - फोटो : Social Media

विस्तार

सोमवार से लॉकडाउन का तीसरा चरण शुरू हो गया है। खास बात ये रही कि लॉकडाउन के 41वें दिन जब देश के कई हिस्सों में शराब की दुकानें खुलीं, तो वहां लंबी-लंबी कतारें लग गईं। कुछ जगहों पर पुलिस को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने के लिए सख्ती करनी पड़ी, तो कहीं शराब की दुकानों को बंद करा दिया गया।
विज्ञापन


महज कुछ ही देर में लंबी-लंबी लाइनों के साथ शराब के ठेके गुलजार हो गए। मानव व्यवहार एवं संबद्ध विज्ञान संस्थान (इहबास) के डॉक्टर ओमप्रकाश कहते हैं, मेडिकल साइंस में लोगों की यह लाइन 'तलब' का हिस्सा होती है।

विज्ञापन


लॉकडाउन में इस तलब के साथ एक डर भी रहा है। वह था कि कहीं लॉकडाउन और आगे सरक गया तो क्या होगा। इसी डर के चलते ठेकों के बाहर लोगों की लंबी कतारें लग गई। अधिकांश व्यक्ति कई दिन का स्टॉक लेने की फिराक में रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन



 

अमर उजाला डॉट कॉम के साथ एक खास बातचीत में डॉक्टर ओमप्रकाश ने बताया, आप किसी भी सभ्यता को देख लें, शराब 'मनोरंजन' का एक बड़ा जरिया रही है। बहुत से लोग तंबाकू और बीड़ी को भी नशे के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।

अपने देश में तो यही नशे सर्वाधिक किए जाते हैं। अनेक लोग इन्हें मनोरंजन का साधन भी मानते हैं। अब लॉकडाउन में ये सारे एक साथ नशे बंद हो गए। लॉकडाउन 2.0 के दौरान भी कई जगहों पर शराब की दुकानें खोलने की मांग उठी थी।

लॉकडाउन 3.0 में जब पहले दिन शराब की दुकानें खोली गईं, तो वहां सोशल डिस्टेंसिंग के सारे नियम टूट गए। अगर किसी को लॉकडाउन की अवधि में शराब छोड़नी होती, तो वह कब का छोड़ चुका होता।

मेडिकल साइंस में इसके लिए दस दिन का इलाज बताया गया है। अब लॉकडाउन में तो लोगों को चालीस दिन हो गए हैं, लेकिन उनकी तलब शांत नहीं हो सकी। नतीजा, वे ठेके खुलने के पहले ही दिन ही शराब लेने वालों की कतार में लग गए।

ये डर भी तो लगा है कि कहीं दोबारा से तलब को दबाना पड़ गया तो... 

शराब पीने वाले लोगों के व्यवहार को लेकर डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि अब लोगों को यह भरोसा नहीं है कि लॉकडाउन आगे नहीं बढ़ेगा। ये छूट आगे भी जारी रहेगी या नहीं। इन सबके चक्कर में लोग कई दिनों का स्टॉक जमा करने के लिए ठेकों पर पहुंच गए।



इसी वजह से सोशल डिस्टेंसिंग का चक्र भी टूटता नजर आया। इन लाइनों में जो लोग खड़े हैं, उनमें से ज्यादातर शराब के नॉमर्ल यूजर्स हैं। यही वो समुदाय है, जो शराब को तलब और मनोरंजन के तौर पर इस्तेमाल करता है।

दूसरे वे लोग हैं जो किसी शारीरिक समस्या के चलते इस पर निर्भर हैं। शराब मिलते ही वे चुप बैठ जाते हैं। तीसरी श्रेणी में वे लोग शामिल हैं, जो पूरी तरह शराब पर निर्भर रहते हैं। यानी ये लोग शराब को एक इलाज की तरह लेते हैं।

अगर इन्हें यह नहीं मिलती तो वे खुद को नुकसान तक पहुंचा सकते हैं। देश की कुल आबादी का करीब 10 फीसदी हिस्सा ऐसे लोगों का है।

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed