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सियासत: उत्तराखंड की तरह भाजपा ने इन राज्यों में भी तीन-तीन बार बदले सीएम, फिर भी हुई करारी हार

Sat, 03 Jul 2021 07:24 PM IST
सुरेंद्र जोशी अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सुरेंद्र जोशी Updated Sat, 03 Jul 2021 07:24 PM IST
सार

उत्तराखंड में चार महीने में भाजपा ने तीन मुख्यमंत्री बदले। त्रिवेंद्र सिंह रावत, तीरथ सिंह रावत के बाद अब पुष्कर सिंह धामी बनेंगे मुख्यमंत्री। इसे लेकर विपक्ष कर रहा है भाजपा की आलोचना।
 

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Like Uttarakhand, BJP changed CM thrice in these states, yet suffered a crushing defeat
pushkar singh dhami - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में भाजपा को चार महीने में तीन-तीन मुख्यमंत्री बदलने पड़े हैं। ऐसा ही वह दिल्ली, यूपी व कर्नाटक में भी कर चुकी है, लेकिन उसे विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 

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उत्तराखंड में सबसे पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत को पार्टी के अंतर्विरोधों के कारण हटाना पड़ा। उसके बाद लाए गए तीरथ सिंह रावत को केवल 115 दिनों के अंदर संवैधानिक बाध्यता के नाम पर बिदा कर दिया गया। अब पार्टी ने युवा चेहरे पुष्कर सिंह धामी पर दांव लगाया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस निर्विवादित चेहरे के सामने आने से उसे उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल हो सकेगी।
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मध्यप्रदेश व गुजरात में फायदा भी हुआ
मुख्यमंत्री बदल कर चुनाव मैदान में उतरने का दांव भाजपा दिल्ली, उत्तर प्रदेश व कर्नाटक में भी आजमा चुकी है, लेकिन उसे चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि मध्य प्रदेश में उमा भारती के बाद बाबूलाल गौर फिर गौर की जगह शिवराज सिंह चौहान को और गुजरात में केशुभाई पटेल को हटा कर नरेंद्र मोदी को सीएम बनाने से पार्टी को फायदा भी मिला था।
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दिल्ली में खुराना, वर्मा व स्वराज को मैदान में उतारा था
भाजपा ने इसके पहले दिल्ली में एक विधानसभा के कार्यकाल में तीन-तीन बार मुख्यमंत्री बदलने का फार्मूला अपनाया था। दिल्ली विधानसभा चुनाव 1993 में उसे जीत हासिल हुई। इसके बाद पार्टी ने अपने दिग्गज नेता मदन लाल खुराना को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाया था। जनता के बीच बेहद लोकप्रिय मदन लाल खुराना के शासनकाल में सब कुछ अच्छा चल रहा था, लेकिन इसी बीच उनका नाम जैन हवाला कांड में सामने आ गया। पार्टी के कहने पर मदन लाल खुराना ने नैतिकता के आधार पर अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वे केवल दो साल 86 दिन तक मुख्यमंत्री पद पर रहे।

मदनलाल खुराना के बाद पार्टी में दूसरे नंबर के दिग्गज साहब सिंह वर्मा को दिल्ली की कमान सौंपी गई। वे भी जनता के बीच एक बेहद अच्छी साख रखने वाले लोकप्रिय नेता थे। उनके शासनकाल में भी दिल्ली का कामकाज बेहतर चल रहा था। लेकिन विधानसभा के कार्यकाल के अंत तक पार्टी को यह महसूस हो रहा था कि पार्टी को साहब सिंह वर्मा के नाम पर जीत नहीं मिल सकती। लिहाजा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें इस्तीफा देने के लिए कह दिया। वे दो साल 228 दिन तक दिल्ली के मुख्यमंत्री रहे।

साहब सिंह वर्मा के स्थान पर भाजपा ने सुषमा स्वराज को मैदान में उतारा। वे बेहद लोकप्रिय नेता थीं। उनकी भाषण शैली लोगों को आकर्षित कर लेती थी। पार्टी में केंद्रीय मंत्री के रूप में उनकी भूमिका काफी असरदार थी। पार्टी को लग रहा था कि अगर सुषमा स्वराज को अगले मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किया जाए तो उसे चुनावों में लाभ मिल सकता है।

भाजपा को भारी पड़े प्याज के दाम
संयोग ही था कि ठीक चुनाव के पहले दिल्ली सहित पूरे देश में प्याज की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गईं। उस समय यानी 1998 में दिल्ली में प्याज की कीमत 40 से 60 रूपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी। भाजपा ने बड़ी मेहनत की और प्याज की कीमतें कम करने की कोशिश की। लेकिन पार्टी की कोशिशों से जनता सहमत नहीं हुई।

सुषमा स्वराज की अगुवाई में पार्टी चुनावों में गई, लेकिन उसे जनता के गुस्से का शिकार होना पड़ा और भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। सुषमा स्वराज केवल 52 दिन तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं।

कामयाब नहीं होगा बीजेपी का फार्मूला : मोहनिया
आम आदमी पार्टी और उत्तराखंड के प्रभारी दिनेश मोहनिया ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के आंतरिक सर्वेक्षण में यह बात सामने आ गई है कि पार्टी को राज्य विधानसभा चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ेगा। यही कारण है कि वह बार-बार मुख्यमंत्री बदलकर अपनी हार को टालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह कोशिश कामयाब नहीं होगी क्योंकि उत्तराखंड की जनता अब भाजपा के भ्रष्टाचार से मुक्ति पाना चाहती है।


कांग्रेस ने भी साधा निशाना
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा बार-बार मुख्यमंत्री बदलकर अपनी नाकामियों को जनता के सामने छुपाना चाहती है। लेकिन उसे समझ आना चाहिए कि इस तरह की कोशिशों से जनता को बरगलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता भाजपा से मुक्ति चाहती है और वह सही समय पर अपना निर्णय सुना देगी।

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