केजरीवाल Vs उपराज्यपाल: दिल्ली का 'बॉस' बदल गया, अब ऑक्सीजन की कमी का जिम्मेदार कौन होगा?
केंद्र सरकार ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर उपराज्यपाल को दिल्ली का आधिकारिक प्रमुख तो बना दिया, लेकिन क्या इससे दिल्ली के रोजमर्रा के कामकाज पर कोई असर पड़ेगा? क्या इससे दिल्ली की स्थिति में कोई सुधार आएगा?
विस्तार
जिस दिन दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी में कोरोना मरीजों के इलाज में हो रही लापरवाही के लिए आम आदमी पार्टी सरकार को फटकार लगाई, उसी दिन देर रात केंद्र सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर 'दिल्ली का बॉस' बदल दिया। संसद में पारित कानून के मंगलवार को लागू होने के बाद अब दिल्ल्ली का आधिकारिक ‘बॉस’ उपराज्यपाल होगा। तो अब राजधानी में होने वाली किसी अव्यवस्था के लिए जिम्मेदार कौन होगा- मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल या उपराज्यपाल अनिल बैजल? सबसे बड़ी बात कि बॉस बदल जाने से दिल्ली का भाग्य कितना बदलेगा?
उपराज्यपाल के विरुद्ध अपील नहीं कर सकेगी दिल्ली सरकार
कानून के जानकार दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता दर्शन शर्मा के अनुसार कानून में हुआ यह बदलाव प्रतीकात्मक ज्यादा है। व्यावहारिक तौर पर दिल्ली के सारे प्रशासनिक कामकाज करने की जिम्मेदारी अभी भी अरविंद केजरीवाल सरकार के पास ही रहेगी। सरकार अपनी योजनाएं बना सकेगी और उसे लागू भी कर सकेगी। लेकिन किसी भी योजना को लागू करने के पहले उसे उपराज्यपाल से सहमति लेनी अनिवार्य हो जायेगी, जिससे दिल्ली सरकार अब तक बचने की कोशिश करती रही थी।
इस प्रकार अगर किसी कामकाज के लिए अगर हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में किसी को जिम्मेदार ठहराने की बात आएगी, तो इसके लिए दिल्ली सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया जा सकेगा, जबकि उपराज्यपाल इस तरह की जिम्मेदारी से मुक्त रहेंगे। लेकिन इस मामले में उनकी शक्ति इतनी अवश्य बढ़ गई है कि अगर वे किसी योजना से सहमत नहीं हैं तो वे उसे लागू करने से रोक सकेंगे। अब दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के किसी अधिकार के विरुद्ध अपील नहीं कर सकेगी।
सरकार को अपनी नाकामी का बहाना मिल गया
केंद्र सरकार के इस निर्णय से भाजपा के ही कई नेता सहमत नहीं हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के अनुसार केंद्र का यह दांव उल्टा पड़ सकता है। अब तक किसी भी नाकामी के लिए दिल्ली हाईकोर्ट अरविंद केजरीवाल की नाकामी को जिम्मेदार ठहरा रही थी, भाजपा भी उसे मुद्दा बनाकर जनता के बीच दिल्ली सरकार को जिम्मेदार बता रही थी, लेकिन इस बदलाव के बाद अब केजरीवाल सरकार को बहाना मिल जाएगा। वे अपनी किसी भी नाकामी के लिए जनता के बीच उपराज्यपाल की सहमति न मिलने का बहाना बना सकेंगे।
वे यह भी प्रचारित कर सकेंगे कि प्रशासनिक अधिकारियों का अब उन्हें सहयोग नहीं मिल रहा है क्योंकि दिल्ली के सरकार अब सीएम नहीं, बल्कि उपराज्यपाल हो गये हैं और वे उनके इशारे पर काम कर रहे हैं। यानी भाजपा नेताओं को लग रहा है, ‘दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल’ के अधिकारों की लड़ाई का एक और दौर शुरू हो सकता है जिसमें किसी नाकामी के लिए भाजपा केजरीवाल सरकार को दोषी नहीं ठहरा सकेगी।